पति-पत्नी ने एक ही फंदे से लटककर दे दी जान, जानें क्या थी वजह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मड़ियांव के प्रीतिनगर में हुई इस घटना की सूचना मिलते ही आनन-फानन पुलिस भी पहुंची गई। पुलिस के अनुसार, गंभीर बीमारी से पीड़ित दंपती को डॉक्टरों ने बीमारी की आखिरी अवस्था बताई थी।
बचने की कोई उम्मीद न देख दोनों ने खुदकुशी कर ली। पुलिस ने बताया कि दोनों के शव बेडरूम में एक ही फंदे से लटके पाए गए। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
इंस्पेक्टर नागेश मिश्रा ने बताया कि खादी ग्रामोद्योग से रिटायर्ड पिता दानीराम व मां उर्मिला देवी मड़ियांव के प्रीतिनगर में रहते हैं। बेटा प्रकाश (32) दिल्ली की एक निजी कंपनी में काम करता था।
पत्नी रेनू (28) भी उसके साथ ही रहती थी। 11 महीने पहले रेनू ने दिल्ली में बेटे सौरभ को जन्म दिया। इसके दो महीने बाद ही प्रकाश की तबीयत खराब हो गई। काफी उपचार के बाद भी फायदा नहीं हुआ।
एक ही दुपट्टे के सहारे लटक रहे थे शव
चिकित्सकों का कहना था कि बीमारी एडवांस स्टेज में है। कुछ दिन पूर्व चिकित्सकों ने पत्नी रेनू की भी जांच कराने को कहा। बकौल इंस्पेक्टर, 14 फरवरी को दोनों ने केजीएमयू में रजिस्ट्रेशन कराया था।
18 फरवरी को रिपोर्ट आई जिसमें दोनों के बीमारी का शिकार होने की पुष्टि की गई थी। चिकित्सकों को आशंका थी कि रेनू का दुधमुंहा बेटा सौरभ भी बीमारी से पीड़ित हो सकता है। डॉक्टरों ने अगले सप्ताह बच्चे को भी जांच के लिए बुलाया था।
पुलिस के मुताबिक रात में प्रकाश और रेनू एक कमरे में जबकि दूसरे में माता-पिता सोये थे। आधी रात को सौरभ रोता हुआ दादा-दादी के कमरे में आया। इस पर उर्मिला की नींद टूटी गई।
वह सौरभ को अपने कमरे में देखकर हैरान रह गईं। उर्मिला प्रकाश के कमरे की तरफ गईं तो दरवाजा बंद मिला। उन्होंने दरवाजे को धक्का दिया तो वह खुल गया। भीतर का नजारा देखते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
बेटे और बहू के शव पंखे से एक ही दुपट्टे के सहारे लटक रहे थे। उर्मिला देवी ने शोर मचाते हुए पति को बुलाया। सूचना पाकर आई पुलिस ने कमरे की तलाशी ली लेकिन कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। पुलिस का कहना है कि दोनों ने बीमारी से परेशान होकर खुदकुशी की है।
पिता की पेंशन से पल रहा था परिवार
प्रकाश और पत्नी रेनू की बीमारी का पता चलते ही चिकित्सकों को लगा कि दुधमुंहा भी बीमारी की चपेट में हो सकता है। इसके चलते दो दिन पहले ही रेनू से बच्चे को दूध पिलाने से मना कर दिया था।
चिकित्सकों का कहना था कि बच्चे की जांच होने तक उसे बाहर का दूध दिया जा सकता है। मां के दूध से बच्चे को संक्रमण और बढ़ सकता था। रेनू चिकित्सकों की बात से बहुत परेशान हो गई थी। घर आकर वह गुमसुम रहने लगी। उसे बेटे की चिंता खाए जा रही थी। प्रकाश ने समझाने की कोशिश की लेकिन वह मन से हार चुकी थी।
दानीराम ने बताया कि वह मूलरूप से उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के रहने वाले हैं। प्रकाश के अलावा एक बड़ा बेटा रमेश महानगर में रहता है। वर्ष 2009 में वह खादी ग्रामोद्योग से रिटायर हुए थे।
कई साल पहले ही उन्होंने मड़ियांव के प्रीतिनगर में मकान बनवा लिया था। इसी मकान को लेकर दानीराम का रमेश से कुछ झगड़ा चल रहा है। अभी तक वह अपनी पेंशन से दैनिक खर्चे पूरे कर रहे थे लेकिन प्रकाश की बीमारी के बाद घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ गई थी।
परिवार का खर्च, रोजमर्रा की जरूरतें और बेटे के उपचार के लिए पेंशन कम पड़ रही थी। दानीराम ने कोई निजी नौकरी करने की भी सोची थी। परिवारीजनों का कहना है कि हो सकता है कि पहले से बीमारी से परेशान प्रकाश और रेनू ने पिता की आर्थिक स्थिति देखकर आत्मघाती कदम उठा लिया हो।