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UP News: नकली दवाओं के खेल का खुलासा; यूपी के रास्ते नेपाल-बांग्लादेश तक होती सप्लाई; 40% तक बाजार में कब्जा

Tue, 21 Jul 2026 09:17 AM IST
Bhupendra Singh चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Tue, 21 Jul 2026 09:17 AM IST
सार

यूपी के रास्ते अन्य राज्यों तक नकली दवाएं पहुंचाई जा रही हैं। महराजगंज, सिद्धार्थनगर से नेपाल, प. बंगाल से बांग्लादेश तक दवाओं की खेप पहुंच रही है। कारोबारियों का अनुमान है कि बाजार में 40 फीसदी तक नकली दवाएं मौजूद हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर..

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Counterfeit drugs are being transported to other states through UP capturing up to 40% of market
नकली दवा कारोबार (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तर प्रदेश में नकली दवाओं का संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो एक मंडी से दूसरी मंडी और वहां से छोटे शहरों व मेडिकल स्टोर तक दवाओं की आपूर्ति कर रहा है। राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से निकलने वाली नामचीन कंपनियों की नकली दवाएं यूपी के रास्ते नेपाल और बांग्लादेश तक पहुंच रही हैं। इसका खुलासा खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच में हुआ है।

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एफएसडीए की टीम इस नेटवर्क को तोड़ने में जुटी है। पिछले महीने भर में करीब 20 करोड़ रुपये की नकली दवाएं पकड़ी गई हैं। 50 से अधिक मेडिकल स्टोर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर कई जिलों में लगातार छापेमारी चल रही है।

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यूपी नकली दवाओं का सबसे बड़ा बाजार

जांच में सामने आया है कि यूपी नकली दवाओं के कारोबार का सबसे बड़ा बाजार बन चुका है। राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से आने वाली नकली दवाओं की खेप पहले आगरा और लखनऊ की प्रमुख दवा मंडियों तक पहुंचती है। वहां से इन्हें प्रदेश के विभिन्न जिलों में भेजा जाता है। 

एफएसडीए की सक्रियता के दौरान सप्लाई रोक दी जाती है, जबकि निगरानी कम होते ही नेटवर्क दोबारा सक्रिय हो जाता है। कई मामलों में छोटे शहरों से महानगरों तक नकली दवाएं कोरियर के जरिए भी भेजी जाती हैं। सरकारी और निजी बस अड्डों के आसपास बने गोदामों से इन्हें मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाया जाता है। दवा कारोबारियों का अनुमान है कि बाजार में 40 फीसदी तक नकली दवाएं मौजूद हैं।
 

नेपाल तक बना है पुख्ता नेटवर्क

एफएसडीए की जांच के अनुसार महराजगंज और सिद्धार्थनगर के रास्ते नकली दवाओं की खेप नेपाल भेजी जा रही है। इसी तरह वाराणसी से बिहार और पश्चिम बंगाल तक दवाएं पहुंचती हैं, जहां पैकेजिंग बदलकर उन्हें बांग्लादेश भेजा जाता है। सूत्रों के अनुसार जांच में कई दवाओं के नमूनों में दवा का अंश न के बराबर मिला है। आशंका है कि जल्द एक्सपायर होने वाली दवाओं पर नया रैपर चढ़ाकर उन्हें बाजार में उतारा जा रहा है। 

फैक्ट फाइल

  • प्रदेश में थोक दवा दुकानें : करीब 60 हजार
  • फुटकर दवा दुकानें : करीब 1.05 लाख
  • रोजाना मेडिकल स्टोरों पर कारोबार : लगभग 100 करोड़ रुपये
  • देश के दवा बाजार में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी : करीब 25 फीसदी
  • यूपी में प्रमुख दवा मंडियां : लखनऊ, आगरा, वाराणसी और कानपुर
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केस-1

आगरा की विभोर मेडिकल एजेंसी से अंशिका फार्मा ने चेमोरॉल फोर्ट (बैच नंबर 2केयू6एल055) खरीदी और कोलकाता के पाल ब्रदर्स को बेची। जांच में स्टॉक रजिस्टर में अंशिका फार्मा का रिकॉर्ड मिला, लेकिन खरीद के बिल फर्जी पाए गए।

केस-2

लखनऊ के आलमबाग में पकड़ी गई दवा नकली निकली। पकड़े गए व्यक्ति ने बताया कि वह इसे वाराणसी के न्यू सर्जिकल से बिना बिल के खरीदकर लाया था। बाद में गिरफ्तार संदीप सिंह ने खुलासा किया कि उसने यह नकली दवा प्रयागराज निवासी संजय सिंह चौहान से खरीदी थी।

क्या कहते हैं कारोबारी

ज्यादा मार्जिन और बिना बिल की दवा खरीदने से बचें। पैकिंग की अच्छी तरह जांच करें। नकली दवाएं मरीजों के साथ-साथ दुकानदारों के लिए भी नुकसानदेह हैं। इससे दीर्घकालीन कारोबार संभव नहीं है। दवा विक्रेताओं को लगातार जागरूक किया जा रहा है। -सुरेश कुमार, अध्यक्ष, दवा व्यापार मंडल

क्या कहते हैं जिम्मेदार

नकली दवाओं का नेटवर्क खत्म करने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। आगरा से मिले इनपुट के आधार पर लखनऊ, वाराणसी समेत अन्य जिलों में जांच हुई है। जैसे-जैसे सैंपल रिपोर्ट आ रही हैं, संबंधित बैचों को बाजार से हटवाया जा रहा है। -शशि मोहन गुप्ता, उप आयुक्त, एफएसडीए
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