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Lucknow News: कपास में नहीं लगेगा कीट, पैदावार भी होगी ज्यादा

Sun, 02 Mar 2025 02:01 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 02 Mar 2025 02:01 AM IST
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Cotton will not be affected by pests, yield will also be higher
लखनऊ। सीएसआईआर राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) ने आनुवंशिक रूप से संशोधित (जेनेटिकली मोडिफाइड) कपास विकसित की है। इसमें कीट नहीं लगेगा। किसानों तक इसका बीज पहुंचाने के लिए संस्थान ने नागपुर की कंपनी से करार किया है। अगले तीन साल में इसका बीज किसानों तक पहुंचने लगेगा।
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एनबीआरआई के निदेशक डॉ. अजीत कुमार शासनी ने शनिवार को प्रेसवार्ता कर बताया कि देश में वर्ष 2002 में आनुवंशिक रूप से संशोधित कपास आई थी। इसके बाद अमरीकी कंपनी मोनसेंटो के साथ संयुक्त रूप से विकसित बोलगार्ड-1 और बोलगार्ड-2 जैसी किस्मों ने कुछ बॉलवर्म प्रजातियों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने का प्रयास किया गया, मगर ये किस्में पिंक बॉलवर्म (गुलाबी इल्ली कीट) के खिलाफ पूर्ण प्रतिरोधकता हासिल करने में असमर्थ रहीं। इससे कपास की पैदावार में काफी गिरावट दर्ज की गई। पिंक बॉलवर्म को देश में स्थानीय रूप से गुलाबी सूंडी के रूप में जाना जाता है।
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पैदावार फिर से बढ़ाने के लिए डॉ. पीके सिंह और उनकी टीम ने नया कीटनाशक जीन विकसित किया है, जो पिंक बॉलवर्म के विरुद्ध ज्यादा प्रभावी है। इसका परीक्षण भी किया जा चुका है। संस्थान में हुए विभिन्न प्रयोगशाला परीक्षणों से यह भी पता चला कि नया कपास पिंक बॉलवर्म के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है। यह कपास के पत्ते के कीड़े और फॉल आर्मीवर्म जैसे अन्य कीड़ों से भी सुरक्षा प्रदान करता है।
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किसानों के लिए आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ
नए विकसित बीज से कपास की पैदावार में 20 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। इससे किसानों की आय में लगभग 10 हजार प्रति हेक्टेयर की वृद्धि होगी। बार-बार कीटनाशकों के छिड़काव की जरूरत न होने से किसानों को प्रति हेक्टेयर लगभग दो हजार रुपये की बचत भी होगी। पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
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