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राहत भरी खबर: कोरोना पॉजिटिव ढाई साल का मासूम हुआ ठीक, केजीएमयू से किया गया डिस्चार्ज
Sun, 12 Apr 2020 09:59 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 12 Apr 2020 09:59 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
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राजधानी की पहली कोरोना पॉजिटिव महिला डॉक्टर के ढाई साल के बेटे को केजीएमयू से शनिवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। अब वह पूरी तरह से ठीक है, लेकिन अभी 14 दिन तक क्वारंटीन रहेगा।
कनाडा से आई महिला डॉक्टर को कोरोना की पुष्टि के बाद केजीएमयू में भर्ती कराया गया था। जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उसे घर भेज दिया गया। इसी बीच उसके सास-ससुर भी पॉजिटिव पाए गए, जिन्हें कमांड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
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इस दौरान पूरे परिवार की जांच हुई तो महिला का ढाई साल का बेटा भी कोरोना पॉजिटिव मिला। उसे पांच अप्रैल को केजीएमयू में भर्ती कराया गया। छोटे बच्चे का अकेले रहना संभव नहीं था, इसलिए उसके साथ मां को रखा गया। शुक्रवार को बच्चे की रिपोर्ट निगेटिव आई।
शनिवार को दूसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आने के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। इससे पहले मां की भी जांच कराई गई, उसकी भी रिपोर्ट निगेटिव आई है। संक्रामक रोग यूनिट के प्रभारी डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि बच्चे को 14 दिन तक क्वारंटीन रहने को कहा गया है।
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कनाडा से आई महिला डॉक्टर को कोरोना की पुष्टि के बाद केजीएमयू में भर्ती कराया गया था। जांच रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद उसे घर भेज दिया गया। इसी बीच उसके सास-ससुर भी पॉजिटिव पाए गए, जिन्हें कमांड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
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इस दौरान पूरे परिवार की जांच हुई तो महिला का ढाई साल का बेटा भी कोरोना पॉजिटिव मिला। उसे पांच अप्रैल को केजीएमयू में भर्ती कराया गया। छोटे बच्चे का अकेले रहना संभव नहीं था, इसलिए उसके साथ मां को रखा गया। शुक्रवार को बच्चे की रिपोर्ट निगेटिव आई।
शनिवार को दूसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आने के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। इससे पहले मां की भी जांच कराई गई, उसकी भी रिपोर्ट निगेटिव आई है। संक्रामक रोग यूनिट के प्रभारी डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि बच्चे को 14 दिन तक क्वारंटीन रहने को कहा गया है।
बच्चे के लिए वार्ड में थे विशेष इंतजाम
डॉ. हिमांशु ने बताया कि बच्चे को वार्ड में किसी तरह का तनाव न हो, इसे ध्यान में रखते हुए कई इंतजाम किए गए थे। वीडियो कॉलिंग की सुविधा के साथ टीवी पर गेम उपलब्ध कराए गए।
प्रयास किया गया कि बच्चे को यह महसूस न हो कि वह अस्पताल में है। डॉ. हिमांशु ने बताया कि किसी व्यक्ति में एक बार कोरोना का अटैक होने के बाद उसकी बॉडी में संबंधित वायरस के खिलाफ एंटी बॉडीज बन जाती हैं।
इसके बावजूद महिला डॉक्टर को ग्लव्स, एप्रिन, मास्क उपलब्ध कराए गए थे। उन्हें निर्देश दिया गया था जिस वक्त बच्चे को गोद में लें, इसे पहने रखें। सप्ताह भर में उनकी भी दो बार जांच कराई गई थी। डिस्चार्ज होते वक्त फाइनल जांच की रिपोर्ट भी निगेटिव आई।
प्रयास किया गया कि बच्चे को यह महसूस न हो कि वह अस्पताल में है। डॉ. हिमांशु ने बताया कि किसी व्यक्ति में एक बार कोरोना का अटैक होने के बाद उसकी बॉडी में संबंधित वायरस के खिलाफ एंटी बॉडीज बन जाती हैं।
इसके बावजूद महिला डॉक्टर को ग्लव्स, एप्रिन, मास्क उपलब्ध कराए गए थे। उन्हें निर्देश दिया गया था जिस वक्त बच्चे को गोद में लें, इसे पहने रखें। सप्ताह भर में उनकी भी दो बार जांच कराई गई थी। डिस्चार्ज होते वक्त फाइनल जांच की रिपोर्ट भी निगेटिव आई।