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धर्मांतरण मामला: अपर्णा यादव के आरोपों पर केजीएमयू प्रशासन का जवाब, "सबसे कम समय में कार्रवाई की"
Fri, 09 Jan 2026 03:24 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 09 Jan 2026 03:24 PM IST
सार
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने धर्मांतरण और यौनशोषण मामले में केजीएमयू प्रशासन पर कार्रवाई करने में लापरवाही करने का आरोप लगाया। जिस पर केजीएमयू प्रशासन ने प्रेस कांफ्रेंस कर जवाब दिया।
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राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
'केजीएमयू प्रशासन अपराधियों को संरक्षण दे रहा है। उन्हें बचाने का काम कर रहा है। शुरुआत से ही मामले में लापरवाही करते आया है। जब भी को पीड़िता आयोग में न्याय की उम्मीद से जाती है तो उसे धमकाया जाता है। महिलाओं के साथ यह अन्याय नहीं सहा जाएगा।'
ये बातें राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने शुक्रवार को केजीएमयू में प्रेसवार्ता में कहीं। उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने बताया कि वह केजीएमयू कुलपति सोनिया नित्यानंद से मुलकात कर प्रेसवार्ता करने आई थीं, लेकिन वीसी ने मुलाकात से इनकार कर दिया।
वीसी ऑफिस का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया गया। करीब दस मिनट तक वीसी ऑफिस के दरवाजे को वह खोलने के लिए कहती रहीं, लेकिन दरवाजा नहीं खोला गया। जब समर्थकों और हिंदू संगठन के लोगों ने दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया तब जाकर दरवाजा खोला गया।
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अर्पणा यादव ने कहा कि पीड़िता ने पहले केजीएमयू प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर उसने आयोग का दरवाजा खटखटाया। इससे पहले भी यौन उत्पीड़न मामले में दिसंबर में एक महिला प्रोफेसर ने आयोग का सहारा लिया न्याय के लिए। पिछले छह महीने से महिला प्रोफेसर को प्रताड़ित किया जा रहा था। पिछले कुछ महीनों में यौन उत्पीड़न के कई मामले आ चुके हैं।
पीड़िताओं को केजीएमयू की ओर से धमकाया जाता है कि आयोग क्यों गईं। क्यों पीड़िताओं को आयोग आने से रोका जाता है। ऐसे कई सवाल उन्होंने कुलपति से पूछे। उन्होंने बताया कि कुलपति और प्रशासन के किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति उनसे मुलाकात नहीं की।
मामले को दबाने के लिए केजीएमयू ने पीड़िता को सबसे दूर रखने में लगा है। यह केजीएमयू का पहला ममला नहीं है वहां ही ही यौन उत्पीड़न की शिकार प्रोफेसर की शुक्रवार को आयोग में सुनवाई की गई। मामले की जांच की जा रही है ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।
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ये बातें राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने शुक्रवार को केजीएमयू में प्रेसवार्ता में कहीं। उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए। साथ ही उन्होंने बताया कि वह केजीएमयू कुलपति सोनिया नित्यानंद से मुलकात कर प्रेसवार्ता करने आई थीं, लेकिन वीसी ने मुलाकात से इनकार कर दिया।
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वीसी ऑफिस का दरवाजा अंदर से बंद कर दिया गया। करीब दस मिनट तक वीसी ऑफिस के दरवाजे को वह खोलने के लिए कहती रहीं, लेकिन दरवाजा नहीं खोला गया। जब समर्थकों और हिंदू संगठन के लोगों ने दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया तब जाकर दरवाजा खोला गया।
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अर्पणा यादव ने कहा कि पीड़िता ने पहले केजीएमयू प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर उसने आयोग का दरवाजा खटखटाया। इससे पहले भी यौन उत्पीड़न मामले में दिसंबर में एक महिला प्रोफेसर ने आयोग का सहारा लिया न्याय के लिए। पिछले छह महीने से महिला प्रोफेसर को प्रताड़ित किया जा रहा था। पिछले कुछ महीनों में यौन उत्पीड़न के कई मामले आ चुके हैं।
पीड़िताओं को केजीएमयू की ओर से धमकाया जाता है कि आयोग क्यों गईं। क्यों पीड़िताओं को आयोग आने से रोका जाता है। ऐसे कई सवाल उन्होंने कुलपति से पूछे। उन्होंने बताया कि कुलपति और प्रशासन के किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति उनसे मुलाकात नहीं की।
केजीएमयू प्रशासन ने महिला आयोग की उपाध्यक्ष के आरोपों को नकारा, कहा- सबसे कम समय में कार्रवाई की, देखें पूरा वीडियो
आरोपी को भगाने में दो प्रोफेसर का हाथ
अर्पणा यादव ने आरोप लगाया कि आरोपी डॉ. रमीज मलिक को भगाने में प्रो. वाहिद अली और प्रो. सुरेश बाबू का हाथ है। मामला सामने आने के बाद दस दिन तक दोनों की आरोपी से हुई बात। उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्यों इन दोनों के खिलाफ केजीएमयू की ओर से कोई जांच नहीं की गई। वहीं, आरोपी भागने से पहले दो लाख रुपये अपने घर से लिए थे। इसके पीछे अंदर के लोगों का हाथ है।विशाखा कमेटी के सदस्याओं को बताया अपराधी
प्रेसवार्ता में उन्होंने विशाखा कमेटी के सदस्य फीजियोलॉजी के प्रोफेसर और एक अन्य सदस्य को छेड़छाड़ का दोषी बताया। कहा कि दोषियों को कमेटी में शामिल किया गया है। साथ ही कहा कि कमेटी की जांच रिपोर्ट हमेशा संदिग्ध क्यों आती है। इस पर भी जांच होनी चाहिए।सुनवाई में नहीं पहुंची पीड़िता
अपर्णा यादव ने बताया कि पीड़िता इतनी डरी हुई है कि वह शुक्रवार सुनवाई में शामिल होने के लिए आयोग नहीं पहुंची। फोन के जरिये उसकी सुनवाई की गई। उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। दबाव बनाया जा रहा है।मामले को दबाने के लिए केजीएमयू ने पीड़िता को सबसे दूर रखने में लगा है। यह केजीएमयू का पहला ममला नहीं है वहां ही ही यौन उत्पीड़न की शिकार प्रोफेसर की शुक्रवार को आयोग में सुनवाई की गई। मामले की जांच की जा रही है ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।
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