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जब एनडी तिवारी को आया किसी की मूंछों पर प्यार

Wed, 25 Sep 2013 02:26 AM IST
मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ
मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ Updated Wed, 25 Sep 2013 02:26 AM IST
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controversy with nd tiwari

उनका यह लखनऊ प्रेम है या फिर ढलती उम्र का असर। कोई बीमारी है या कुछ और।

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हकीकत कुछ भी हो पर चार बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके नारायण दत्त तिवारी आजकल अपनी विशिष्ट सक्रियता की वजह से सुर्खियों में हैं।

कभी अचानक किसी दफ्तर में पहुंच जाते हैं और कार्यकलाप दुरूस्त करने के निर्देश देने लगते हैं तो किसी कार्यक्रम में पहुंचकर देशप्रेम के गीत तरन्नुम के साथ गाने की कोशिश करते हैं।

उनके औचक निरीक्षण भी मीडिया की सुर्खियां पा रह हैं। पर यह उनके बड़े कद का ही कमाल है कि उनकी इन हरकतों पर कहीं कोई एतराज नहीं होता।

ज्यादातर लोगों में उनके प्रति वैसा ही सम्मान झलकता है जो उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्हें हासिल था।

दरअसल 88 साल के नारायण दत्त तिवारी मुलायम सिंह यादव के अनुरोध पर पिछले 7-8 महीने से देहरादून छोड़कर लखनऊ में रह रहे हैं।

शुरूआत में एकाध कार्यक्रमों में वह मुलायम सिंह के साथ नजर आए तो लोग चौकन्ना हुए। कहा जाने लगा कि कांग्रेस में उपेक्षा का दंश इतना गहरा हो गया कि वह अब मुलायम की राजनीतिक मदद के लिए लखनऊ आ गए हैं।
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कुछ दिनों में बड़ा सियासी गुल खिलेगा। पर जब कोई बड़ा सियासी धमाके की तस्वीर नहीं उभरी तो लोगों का भ्रम टूटने लगा।

इस बीच राजधानी में उनकी सक्रियता के चर्चे शुरू हुए। करीब दो महीने पहले राजधानी के सीतापुर रोड पर बने फ्लाईओवर के लोकार्पण करने का अवसर पर आयोजकों ने विकास पुरूष के नाम से मशहूर रहे तिवारी जी को भी बुलाया।
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मंच पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व प्रदेश सरकार के कई मंत्री मौजूद थे। तिवारी जी कुछ देर तक तो शांत सहज रहे पर थोड़ी ही देर में वह मंच के प्रमुख केंद्रबिंदु बन गए।

पहले तो बेमौके के कुछ गीत से उन्होंने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा लेकिन जल्द ही वे बगल में बैठे मंत्री राजा अरिदमन सिंह की मूंछों से खेलना शुरू कर सभा को अचरज में डाल दिया।

वे यहीं रुके नहीं वह मंत्री महोदय की मूंछों को बहुत खूबसूरत बताते हुए मोबाइल से उनकी तस्वीर बनाने लगे। अरिदमन और मुख्यमंत्री ने किसी तरह मंच को संभाला।

शहर में इस बात की चर्चा खत्म होने से पहले ही एक शाम वे अचानक पीजीआई पहुंच गए। मरीजों को जमीन पर लेटा देखकर भड़क गए।

डायरेक्टर को बुलाकर हड़काया और सीएम तक को फोन मिलवा दिया। फिर एक दिन अचानक वे चिड़ियाघर में दिखाई दिए। वहं उन्होंने जानवरों के बाड़े देखे, बच्चों वाली ट्रेन की सवारी की।

उन्होंने निदेशक को जू में कंगारू मंगाने की सलाह ही नहीं दी, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया को इसकेलिए फोन भी मिलवा दिया।

इसी तरह एक दिन पावर कारपोरेशन के दफ्तर पहुंच गए और बिजली व्यवस्था का हाल चाल लेने लगे। एक रात करीब दो बजे नाका थाने में उनके अचानक दबिश ने भी खूब चर्चा बटोरी।

उन्होंने थाने में स्टाफ की स्थिति से लेकर अपराध की स्थिति तक की समीक्षा कर डाली। पुलिसवाले भी यस सर-जी सर कहते रहे।

लेकिन उनका ताजा किस्सा सबसे ज्यादा चर्चा में है। 22 सितंबर की शाम शहीदों की याद में आयोजित एक कार्यक्रम में वे आमंत्रित थे।

कार्यक्रम समाप्ति की ओर था, तिवारी जी मूड में आ गए और कदम से कदम बढ़ाए जा.. गाने लगे साथ ही माइक की फरमाइश की।

कार्यक्रम की एंकर माइक लेकर उनके पास गई तो गाते हुए तिवारी जी थोड़ा संतुलन खो बैठे और सहारे के लिए उनका हाथ एंकर के गले तक चला गया। बस चटखारों के साथ चर्चाएं शुरू हो गईं।

हालांकि एंकर शिवानी (नाम परिवर्तित) कहती है कि तिवारी जी मेरे पिता के समान हैं, कार्यक्रम के दौरान मैंने उनके पैर छुए उन्होंने आर्शीवाद भी दिया। बिना मतलब का बतंगड़ बना दिया गया है।


एक वृद्धावस्था मानसिक रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर ढलती उम्र में किसी व्यक्ति के सामान्य व्यवहार में अप्रत्याशित बदलाव आने लगे, वह कुछ काम बिना प्रयोजन के करने लगे और वह पुरानी बातों को ज्यादा याद करें इसे डिमेंशिया नामक बीमारी का एक लक्षण माना जा सकता है।

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