{"_id":"5d24f18e8ebc3e6cf23192fb","slug":"control-room-was-dedecting-wrong-location-of-janrath-lucknow-news-lko4698158180","type":"story","status":"publish","title_hn":"जनरथ खड़ी थी आलमबाग बस अड्डे पर और कंट्रोल रूम लोकेशन बता रहा था उन्नाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जनरथ खड़ी थी आलमबाग बस अड्डे पर और कंट्रोल रूम लोकेशन बता रहा था उन्नाव
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जनरथ खड़ी थी आलमबाग अड्डे पर, कंट्रोल रूम बता रहा था उन्नाव की लोकेशन
लखनऊ। आगरा के एत्मादपुर में हादसे का शिकार होने वाली यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम की जनरथ बस जब आलमबाग बस अड्डे पर खड़ी थी, तब कंट्रोल रूम उसे नेशनल हाइवे-25 पर लगभग 51 किमी. प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ना बता रहा था। बस की लोकेशन व स्पीड बताने में नाकाम मुख्यालय के अफसर अपनी गर्दन बचाने के लिए जनरथ बस की वीटीएस (व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम) को खराब होने का दावा कर रहे हैं। जनरथ बस की दुर्घटना के वक्त स्पीड की जानकारी न मिलने से उसके नाले में गिरने के ठोस कारण का पता करने में दिक्कत हो रही है। जबकि परिवहन निगम मुख्यालय में अफसरों की फौज बसों की ट्रैकिंग करने के नाम पर मौज कर रही है। सवाल यह है कि जब एसी बस का वीटीएस खराब है तो साधारण बसों की हालत क्या होगी।
कूड़ा हो गईं 12 हजार की वीटीएस
केंद्र सरकार ने परिवहन निगम व बसों को हाईटेक बनाने के लिए 25 करोड़ रुपये से अधिक की रकम आईटीएमएस (इंटेलीजेंस ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम) स्कीम के तहत मुहैया कराई थी। इस रकम से निगम की लगभग 10 हजार से अधिक बसों में वीटीएस और मुख्यालय में कंट्रोल को स्थापित किया गया। वीटीएस के जरिये बस कितनी स्पीड से दौड़ रही हो और उसकी लोकेशन क्या है, यह जानकारी हासिल होती है। लेकिन इस समय अधिकतर बसों की वीटीएम कूड़ा हो चुकी हैं, जिसकी कीमत लगभग 12 हजार रुपये है।
एक नजर में दुर्घटनाग्रस्त जनरथ की लोकेशन
अवध डिपो से निकली रात 8:00 बजे
आलमबाग अड्डे पहुंची 9:00 बजे
आलमबाग से रवानगी रात 11:00 बजे
आगरा टोल पार किया तड़के 4:01 बजे
नाले में गिरी सुबह 4:25 बजे
विज्ञापन
लखनऊ। आगरा के एत्मादपुर में हादसे का शिकार होने वाली यूपी राज्य सड़क परिवहन निगम की जनरथ बस जब आलमबाग बस अड्डे पर खड़ी थी, तब कंट्रोल रूम उसे नेशनल हाइवे-25 पर लगभग 51 किमी. प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ना बता रहा था। बस की लोकेशन व स्पीड बताने में नाकाम मुख्यालय के अफसर अपनी गर्दन बचाने के लिए जनरथ बस की वीटीएस (व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम) को खराब होने का दावा कर रहे हैं। जनरथ बस की दुर्घटना के वक्त स्पीड की जानकारी न मिलने से उसके नाले में गिरने के ठोस कारण का पता करने में दिक्कत हो रही है। जबकि परिवहन निगम मुख्यालय में अफसरों की फौज बसों की ट्रैकिंग करने के नाम पर मौज कर रही है। सवाल यह है कि जब एसी बस का वीटीएस खराब है तो साधारण बसों की हालत क्या होगी।
कूड़ा हो गईं 12 हजार की वीटीएस
केंद्र सरकार ने परिवहन निगम व बसों को हाईटेक बनाने के लिए 25 करोड़ रुपये से अधिक की रकम आईटीएमएस (इंटेलीजेंस ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम) स्कीम के तहत मुहैया कराई थी। इस रकम से निगम की लगभग 10 हजार से अधिक बसों में वीटीएस और मुख्यालय में कंट्रोल को स्थापित किया गया। वीटीएस के जरिये बस कितनी स्पीड से दौड़ रही हो और उसकी लोकेशन क्या है, यह जानकारी हासिल होती है। लेकिन इस समय अधिकतर बसों की वीटीएम कूड़ा हो चुकी हैं, जिसकी कीमत लगभग 12 हजार रुपये है।
विज्ञापन
एक नजर में दुर्घटनाग्रस्त जनरथ की लोकेशन
अवध डिपो से निकली रात 8:00 बजे
आलमबाग अड्डे पहुंची 9:00 बजे
आलमबाग से रवानगी रात 11:00 बजे
आगरा टोल पार किया तड़के 4:01 बजे
नाले में गिरी सुबह 4:25 बजे