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Lucknow News: बिना प्रशिक्षण चालकों को साैंप दी ई रिक्शों की कमान

Fri, 28 Aug 2026 02:42 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 28 Aug 2026 02:42 AM IST
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Control of e rickshaws handed over to untrained drivers
कैसरबाग चौराहे पर ई रिक्शा में सवारी भरते चालक।
लखनऊ। शहर की सड़कों पर बढ़ते ई रिक्शों के बीच यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए बनाए गए नियम ही बेअसर साबित हो रहे हैं। नए ई रिक्शा चालकों के लिए अनिवार्य दस दिवसीय प्रशिक्षण आज तक लागू नहीं हो सका। नतीजा, हजारों अप्रशिक्षित चालक सड़कों पर ई रिक्शे दौड़ा रहे हैं और जाम व अव्यवस्थित यातायात की समस्या लगातार बढ़ रही है।
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मार्च 2021 में सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) ने अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत नए ई रिक्शा पंजीकरण पर चालकों को प्रशिक्षित करना अनिवार्य था। हजारों ई रिक्शों का पंजीकरण हुआ लेकिन एक भी चालक को प्रशिक्षण नहीं मिला। अप्रशिक्षित चालकों के हाथ में ई रिक्शे होने से जाम की समस्या बढ़ गई है। स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के बजाय लर्नर लाइसेंस पर ही कई ई रिक्शों का पंजीकरण कर लिया गया।
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पांच यार्ड बनें तो ई रिक्शों पर हो कार्रवाई
शहर में ई रिक्शों पर कार्रवाई के लिए पांच यार्ड बनाए जाने हैं। इस योजना को धरातल पर नहीं उतारा जा पा रहा है। यही वजह है कि ई रिक्शे पकड़े जाते हैं लेकिन उन पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती। लखनऊ में कानपुर, सुल्तानपुर, रायबरेली, अयोध्या व सीतापुर रोड पर यार्ड बनाए जाने हैं।
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नियम बने पर लागू नहीं हुए
लखनऊ आटो टेंपो एसोसिएशन लार्ट्स के पंकज दीक्षित ने बताया कि कई नियम लागू नहीं हुए। वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के आदेश के बाद भी फीडर रूट नहीं बने। वर्ष 2021 की अधिसूचना पर प्रशिक्षण और वर्ष 2024 में जोनवार चालान व्यवस्था भी लागू नहीं हुई। 44 निर्धारित ई रिक्शा स्टैंड पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इसलिए अधिक बिकते हैं ई रिक्शे
आरटीओ अधिकारी बताते हैं कि ई रिक्शों के पंजीकरण में कई छूट मिलती है। इनमें कर में शत प्रतिशत सब्सिडी और फिटनेस की आवश्यकता नहीं होना शामिल है। परमिट शुल्क का झंझट नहीं है और कई ई रिक्शे चोरी की बिजली से चार्ज हो रहे हैं। इनकी संख्या पर कोई कैपिंग नहीं है, जिससे इनकी बिक्री अधिक होती है। एक ई रिक्शा 60 रुपये की चार्जिंग में 100 किलोमीटर चलता है, जो किफायती है। ई ऑटो 120 रुपये में चार्ज होकर 80 किमी ही चलते हैं। सीएनजी ऑटो टेंपा की चार्जिंग पर 240 रुपये खर्च होते हैं और 100 किमी चलते हैं।

आपके सुझाव का है इंतजार
ई रिक्शों से शहर में होने वाली परेशानियों से आप रोजाना रूबरू होते हैं। ऐसे में अपनी समस्याएं व ई रिक्शों से होने वाली दुश्वारियों से निस्तारण के सुझाव अमर उजाला के व्हाट्सएप नंबर 7617566164 पर साझा कर सकते हैं। हमें आपके सुझावों का इंतजार रहेगा।

फैक्ट
-150 ई रिक्शों के शोरूम हैं
-70314 ई रिक्शा, ई ऑटो हो चुके हैं पंजीकृत
-50 हजार से अधिक ई रिक्शों की फिटनेस नहीं
-10 हजार से अधिक ई रिक्शे कंडम हालत में दाैड़ रहे
-पांच हजार ई रिक्शों के चालान प्रतिमाह अवैध पार्किंग में होते हैं
-100 ई रिक्शे ऐसे, जिन पर 50 से अधिक चालान, फिर भी दाैड़ रहे


मोर्थ की अनुमति के बगैर ई रिक्शों के पंजीकरण पर रोक नहीं लग सकती, जिससे संख्या पर नियंत्रण नहीं है। ऐसे में पुराना ई रिक्शा हटवाकर नया पंजीकरण होना चाहिए। इसके अलावा लर्निंग डीएल के बजाय स्थायी डीएल होने पर ही पंजीकरण कराया जाए।

-मयंक श्रीवास्तव, अध्यक्ष, ई रिक्शा चालक कल्याण समिति


न्यायालय की ओर से ई रिक्शों को लेकर नीति बनाने के आदेश दिए गए हैं। चूंकि ई रिक्शों का पंजीकरण बगैर केंद्र सरकार की अनुमति के आरटीओ स्तर पर नहीं रोका जा सकता, इसलिए संख्या नियंत्रित करने व परमिट की व्यवस्था का प्रयास किया जा रहा है।
-प्रभात पांडेय, आरटीओ प्रवर्तन, लखनऊ

कैसरबाग चौराहे पर ई रिक्शा में सवारी भरते चालक।

कैसरबाग चौराहे पर ई रिक्शा में सवारी भरते चालक।

कैसरबाग चौराहे पर ई रिक्शा में सवारी भरते चालक।

कैसरबाग चौराहे पर ई रिक्शा में सवारी भरते चालक।

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