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हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में गैर हिंदी शिक्षक और प्रोफेशनल्स भी दे रहे अपना योगदान

Mon, 07 Sep 2020 04:39 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Mon, 07 Sep 2020 04:39 PM IST
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contribution of non-Hindi teachers and professionals for Hindi
विजय मिश्रा, कृष्ण कुमार यादव - फोटो : amar ujala

हिंदी साहित्य को समृद्ध करने में न सिर्फ हिंदी शिक्षकों का योगदान रहा बल्कि अंग्रेजी भाषा के शिक्षक और अन्य पेशे में जुड़े लोगों ने भी हिंदी की काफी सेवा की है। हिंदी की सेवा करने की उनकी लगन ने उन्हें न सिर्फ नाम दिलाया बल्कि दूसरे लोगों को भी इसके लिए प्रेरित किया।

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इस कड़ी में अंग्रेजी के शिक्षक तो हैं ही साथ ही डाक विभाग और स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले प्रतिष्ठित नाम भी हैं। सबने अपने-अपने तरीके से हिंदी साहित्य साधना में आहुति देने का काम किया है। इनकी साधना से हिंदी गैर हिंदी भाषियों में भी अपनी गहरी पैठ बना रही है। 

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अपने लेखन से हिंदी को समृद्ध कर रहे अंग्रेजी के व्याख्याता

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रविंद्र सिंह - फोटो : amar ujala

लखनऊ विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के व्याख्याता रविंद्र सिंह की लिखी किताबें दुनिया भर के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत अंग्रेजी के साथ ही हिंदी पर भी समान अधिकार का होना है। सिंह के हिंदी लेखन की लंबी सूची है। उनके दर्जनों नाटक और एकांकी के अलावा हिंदी कविता में पथिक और प्रवाह, मोन्ताज, माटी का प्रकाशन हो चुका है।

बाल साहित्य में भी उनकी काफी रचनाओं का प्रकाशन हो चुका है। उन्हें अखिल भारतीय साहित्य परिषद से सारस्वत सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से भारतेन्दु हरिश्चंद्र नामित पुरस्कार एवं मोहन राकेश सर्जना पुरस्कार, साहित्य के लिए डॉ. एसएम सिन्हा सम्मान, डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर पुरस्कार सहित दर्जनों पुरस्कार मिल चुके हैं। प्रो. सिंह के अनुसार हम हिंदी भाषी हैं। हमारी सोच हिंदी में होती है। इसे सशक्त होना चाहिए तभी हमारा देश और तरक्की कर सकता है। 

प्रशासनिक सेवा के साथ ही साहित्य लेखन 

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कृष्ण कुमार यादव - फोटो : amar ujala

राजकीय सेवा के दायित्वों का निर्वहन करते हुए श्रेष्ठ कृतियों का सृजन कर रहे ‘भारतीय डाक सेवा’ के अधिकारी कृष्ण कुमार यादव। कृष्ण कुमार यादव इस समय लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय में अध्ययन के दौरान ही हिंदी में साहित्य सृजन आरंभ कर दिया था, जो आज तक जारी है और अब तक उनकी 7 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं।

उत्कृष्ट लेखन के लिए अवध सम्मान, साहित्य-सम्मान, विज्ञान परिषद शताब्दी सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। कृष्ण कुमार यादव का कहना है कि डिजिटल क्रांति के युग में हिंदी में विश्व भाषा बनने की क्षमता है। हिंदी सिर्फ एक भाषा ही नहीं बल्कि हम सबकी पहचान है, यह हर हिंदुस्तानी का हृदय है। 

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काव्य रचना पढ़कर राष्ट्रपति ने हिंदी में भेजा पत्र 

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विजय मिश्रा - फोटो : amar ujala

लखनऊ पब्लिक स्कूल ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज में अंग्रेजी के शिक्षक विजय मिश्रा की पहचान सिर्फ एक शिक्षक की ही नहीं है। विभिन्न पत्रिकाओं में उनकी कविताएं प्रकाशित होती रहती हैं। विजय मिश्रा बताते हैं कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को उन्होंने अपनी कृति भेंट की थी।

इसके बाद उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा जब उन्हें राष्ट्रपति कार्यालय से पुस्तक की प्रशंसा में हिंदी में पत्र प्राप्त हुआ। विजय मिश्रा के अनुसार हिंदी भले ही एक विषय के रूप में पढ़ाई जाती है, पर यह मातृ भाषा है। इसमें लिखने के लिए किसी विषय या पेशे का होने की जरूरत नहीं होती। व्यक्ति अपनी मातृ भाषा को महसूस करके ही लिख सकता है। 

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