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सपा में बज उठा बगावत का बिगुल

Fri, 13 Dec 2013 12:53 PM IST
राजेन्द्र सिंह/लखनऊ
राजेन्द्र सिंह/लखनऊ Updated Fri, 13 Dec 2013 12:53 PM IST
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contrast in many seats of samajwadi party

लालगंज सुरक्षित सीट से नौ अक्तूबर को सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज का टिकट काटकर विधायक बेचई सरोज को प्रत्याशी बना दिया गया।

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दरोगा प्रसाद के समर्थकों ने सपा मुख्यालय और क्षेत्र में प्रदर्शन कर पार्टी पर दबाव बनाने की कोशिश की।

नेतृत्व ने प्रत्याशी बदलने पर पुनर्विचार नहीं किया तो उन्होंने बृहस्पतिवार को पार्टी से बगावत कर समर्थकों समेत भाजपा का झंडा थाम लिया।

सपा में असंतोष और बगावत की यह स्थिति सिर्फ लालगंज में ही नहीं है। कई सीटों पर प्रत्याशी चयन या उन्हें बदलने को लेकर पनपा आक्रोश सड़कों पर आ चुका है।

कई नेताओं को लालबत्तियां बांटकर डैमेज कंट्रोल की कोशिशें की जा रही हैं लेकिन नतीजा उम्मीद के मुताबिक नहीं आ रहा। कहीं खुलकर तो कहीं पर्दे के पीछे से प्रत्याशियों पर हमले हो रहे हैं।

पूर्वांचल की राजनीति में खास भूमिका निभाने वाले आजमगढ़ से जौनपुर तक यही स्थिति है।
पार्टी में ताजी बगावत का मामला पूर्वांचल की लालगंज सीट पर सामने आया है।

आजमगढ़ जिले में पड़ने वाली इस संसदीय सीट से मौजूदा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज को प्रत्याशी बनाया गया था।

दो माह पहले टिकट कटा तो उनके समर्थक विरोध पर उतर आए। पार्टी भी खेमों में बंट गई। आखिर सरोज भगवा खेमे में चले गए।

इसी तरह जौनपुर पर समूचे पूर्वांचल की नजरें टिकी हैं। वजह है, सपा की अंदरूनी राजनीति से सियासी पारा चढ़ना।

यह गरमाहट शुरू हुई है जौनपुर सीट के प्रत्याशी डॉ. केपी यादव का टिकट काटने से। उन्हें 16 नवंबर 2012 को प्रत्याशी घोषित किया गया और एक साल दस दिन बाद यानी 26 नवंबर 2013 को उनकी जगह कैबिनेट मंत्री और कद्दावर नेता पारसनाथ यादव को उम्मीदवार बनाया गया है।
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इसके विरोध में डॉ. केपी यादव के समर्थकों ने हंगामा किया, जाम लगाया। फिर समाजवादी कुटिया पर पंचायत की और निकल पड़े जनभावना यात्रा पर।

वह कहते हैं, टिकट कटने के बाद आठ दिन तक लखनऊ में नेताजी से मिलने की कोशिश करता रहा लेकिन दर्द सुनने की कोशिश नहीं की गई।

घर पर पांच हजार लोगों ने आकर नाइंसाफी के खिलाफ जनता के बीच जाने की सलाह दी। इस कारण जनभावना यात्रा शुरू की गई।

देखना है, सपा नेतृत्व अपने फैसले पर पुनर्विचार करता है या नहीं। अगले महीने के शुरू में जनअदालत महारैली करके सियासी फैसला किया जाएगा।

फर्रुखाबाद को लेकर भी पार्टी चिंतित है। यहां भी प्रत्याशी बदलने पर विवाद खड़ा हुआ है। यहां राज्यमंत्री नरेन्द्र यादव के तेवर तीखे हैं। उनके समर्थक मंत्री पुत्र का टिकट कटने से आहत हैं।
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सुल्तानपुर में पार्टी का एक खेमा शकील अहमद की उम्मीदवारी खत्म करने पर आपत्ति जता रहा है। पार्टी ने इस सीट से बाहुबली अतीक अहमद को उम्मीदवार बनाया है।

श्रावस्ती सीट पर यासर शाह का विरोध है तो लालगंज में भी एक खेमे के सुर बदले हुए हैं।

सहारनपुर में इमरान मसूद के साथ पार्टी का बड़ा खेमा है लेकिन फिरोज आफताब का टिकट कटने के बाद विरोध के खूब स्वर उठे।

मेरठ में प्रत्याशी और राज्यमंत्री शाहिद मंजूर के समर्थकों को हाल ही में तीन लोगों को लालबत्ती देने का फैसला नहीं पच रहा है।

मुजफ्फरनगर सीट पर एक खेमा गौरव स्वरूप की उम्मीदवारी बदलने के पक्ष में है। तर्क है कि दंगे के बाद गौरव के पक्ष में समीकरण नहीं है। ऐसी स्थितियां कई और सीटों पर भी बनी हुई हैं।

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