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Lucknow News: बेकरी उद्योग में मैदे की खपत घटी, उत्पादन रह गया आधा
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लखनऊ में गैस संकट।
लखनऊ। गैस संकट ने खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की कमर तोड़ दी है। बेकरी कंपनियों, हलवाई व रेस्टोरेंट संचालकों ने कामकाज ठप होने से मैदे की मांग कम कर दी है। इससे आटा, मैदा और सूजी तैयार करने वाली फ्लोर मिलों का उत्पादन 50 प्रतिशत तक गिर गया है। उधर, बारदाना महंगा होने से फ्लोर मिल संचालकों की लागत भी बढ़ रही है। उद्यमी बताते हैं कि कई जगह से कर्मचारी हटाने की बात आ रही है।
Iगैस की किल्लत के साथ ही पेट्रोलियम वेस्ट की कीमतें बढ़ने से बारदाना (पैकेजिंग मैटेरियल) महंगा हो गया है। 15 रुपये वाली बोरी अब 25 की मिल रही है। घरेलू बाजार में खपत घटने और निर्यात रुकने से कारोबार जारी रखना मुश्किल हो गया है।
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- प्रमोद वैश्य, फ्लोर मिल संचालक, अध्यक्ष (एसोचैम यूपी-यूके) I
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Iगैस संकट का असर पूरे प्रदेश के आंकड़ों में भी दिख रहा है। प्रदेश में जिन फ्लोर मिलों का सालाना उत्पादन करीब 100 लाख टन रहता था, वह 50 लाख टन रह गया है। पीएनजी पर निर्भर बिस्किट और नूडल्स कंपनियों से डिमांड लगभग खत्म हो गई है। एक-एक रोलर फ्लोर मिल में करीब 500-500 श्रमिक काम करते हैं, जिनके सामने अब रोजगार और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
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- दीपक बजाज, प्रदेश अध्यक्ष, रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन I
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Iखान-पान उद्योग और रेस्टोरेंट बंद होने से मैदे की मांग आधी रह गई है। बाजार में नया गेहूं आने में अभी करीब एक महीना बाकी है, ऐसे में पुराने स्टॉक की कमी और गिरती मांग ने उत्पादन चक्र को पूरी तरह प्रभावित किया है।
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- विकास सिंघल, उद्यमीI
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महंगे बारदाना से कैसे हो पाएगी खरीदI
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Iबड़ी चिंता यह है कि डेढ़ गुना कीमत बढ़ने के बावजूद बारदाना मिल नहीं पा रहा है। 15-20 दिन में गेहूं की नई फसल आ जाएगी। ऐसे में बारदाना कहां से आएगा और बिना बोरियों के गेहूं को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा? सरकार ने गेहूं खरीद की एमएसपी 125 रुपये बढ़ाकर 2585 कर दी है। बारदाना की बढ़ी कीमतों के बीच तय एमएसपी पर खरीद कैसे होगी, जब 10 रुपये एक बोरी तक कीमत बढ़ी होगी।
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- धर्मेंद्र जैन, पूर्व अध्यक्ष, यूपी रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन
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Iगैस की किल्लत के साथ ही पेट्रोलियम वेस्ट की कीमतें बढ़ने से बारदाना (पैकेजिंग मैटेरियल) महंगा हो गया है। 15 रुपये वाली बोरी अब 25 की मिल रही है। घरेलू बाजार में खपत घटने और निर्यात रुकने से कारोबार जारी रखना मुश्किल हो गया है।
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- प्रमोद वैश्य, फ्लोर मिल संचालक, अध्यक्ष (एसोचैम यूपी-यूके) I
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Iगैस संकट का असर पूरे प्रदेश के आंकड़ों में भी दिख रहा है। प्रदेश में जिन फ्लोर मिलों का सालाना उत्पादन करीब 100 लाख टन रहता था, वह 50 लाख टन रह गया है। पीएनजी पर निर्भर बिस्किट और नूडल्स कंपनियों से डिमांड लगभग खत्म हो गई है। एक-एक रोलर फ्लोर मिल में करीब 500-500 श्रमिक काम करते हैं, जिनके सामने अब रोजगार और आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
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- दीपक बजाज, प्रदेश अध्यक्ष, रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन I
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Iखान-पान उद्योग और रेस्टोरेंट बंद होने से मैदे की मांग आधी रह गई है। बाजार में नया गेहूं आने में अभी करीब एक महीना बाकी है, ऐसे में पुराने स्टॉक की कमी और गिरती मांग ने उत्पादन चक्र को पूरी तरह प्रभावित किया है।
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- विकास सिंघल, उद्यमीI
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महंगे बारदाना से कैसे हो पाएगी खरीदI
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Iबड़ी चिंता यह है कि डेढ़ गुना कीमत बढ़ने के बावजूद बारदाना मिल नहीं पा रहा है। 15-20 दिन में गेहूं की नई फसल आ जाएगी। ऐसे में बारदाना कहां से आएगा और बिना बोरियों के गेहूं को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा? सरकार ने गेहूं खरीद की एमएसपी 125 रुपये बढ़ाकर 2585 कर दी है। बारदाना की बढ़ी कीमतों के बीच तय एमएसपी पर खरीद कैसे होगी, जब 10 रुपये एक बोरी तक कीमत बढ़ी होगी।
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- धर्मेंद्र जैन, पूर्व अध्यक्ष, यूपी रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन

लखनऊ में गैस संकट।

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