सात प्रधानमंत्रियों की सुरक्षा में रहे हेड कांस्टेबल ने खुद को गोली से उड़ाया
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महानगर स्थित सुरक्षा मुख्यालय में शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री सुरक्षा में तैनात रहे पीएसओ (हेड कांस्टेबल) देवी शंकर मिश्रा (54) ने सर्विस पिस्टल से कनपटी पर गोली मारकर खुदकुशी कर ली।
परिवारीजनों का कहना था कि देवी शंकर सात प्रधानमंत्रियों के सुरक्षा दस्ते में रहे, लेकिन उत्तर प्रदेश में आते ही भ्रष्टाचार व प्रताड़ना के शिकार होने लगे। उन्होंने सुरक्षा मुख्यालय के इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह पर ड्यूटी के लिए रुपये मांगने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। परिवारीजनों ने पोस्टमार्टम के बाद शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया।
पुलिस अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन देकर शांत कराया। क्षेत्राधिकारी महानगर संतोष कुमार सिंह का कहना है कि देवी शंकर मिश्रा ने खुदकुशी की है। कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। परिवारीजनों ने तहरीर दी है। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
क्षेत्राधिकारी ने बताया कि देवी शंकर मिश्रा मूलरूप से उन्नाव के अचलगंज स्थित पड़री गांव के थे और कई साल से यहां सरोजनीनगर के शांतिनगर में मकान बनवाकर रह रहे थे। शुक्रवार सुबह करीब सवा नौ बजे वह सुरक्षा मुख्यालय स्थित ऑफिस पहुंचे। कुछ देर बाद उन्होंने सर्विस पिस्टल से दायीं कनपटी में गोली मार ली।
गोली की आवाज सुनते ही अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे तो देवी शंकर खून से लथपथ पड़े थे। पास ही उनकी सर्विस पिस्टल पड़ी थी। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। सहायक पुलिस अधीक्षक ट्रांस गोमती अमित कुमार व महानगर इंस्पेक्टर अशोक कुमार सिंह समेत अन्य अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया।
सर्विस पिस्टल फोरेंसिक जांच के लिए जब्त कर ली गई है। पुलिस ने देवी शंकर के कपड़ों की तलाशी ली, लेकिन सुसाइड नोट नहीं मिला। देवी शंकर के बड़े भाई रवि शंकर व पत्नी मंजू ने खुदकुशी के पीछे विभाग में तैनात व हाल ही में पीएसी से आए इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह पर प्रताड़ना व रिश्वत मांगने को वजह बताया।
उनका कहना था कि देवी शंकर मुख्यमंत्री के सुरक्षा दस्ते में थे। इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह उनसे ड्यूटी लगाने के लिए हर महीने 50 हजार रुपये मांग रहा था। इनकार पर इंस्पेक्टर ने उन्हें मुख्यमंत्री की सुरक्षा ड्यूटी से हटाकर मुख्यालय में तैनात कर दिया था। इससे वह तनाव में थे। शुक्रवार सुबह देवी शंकर मिश्रा जब ड्यूटी पर गए तब भी उनकी इंस्पेक्टर से कहासुनी हुई। हालांकि, सुरक्षा मुख्यालय और पुलिस ने इस बात की जानकारी से इनकार किया है। परिवारीजनों ने जांच की मांग की है।
मौत से कुछ घंटे पहले ही पत्नी से किया था प्रताड़ना का जिक्र
मंजू ने बताया कि वह कई दिन से तनावग्रस्त थे। बृहस्पतिवार को वह दोपहर में घर पहुंचे तो पत्नी को कुछ गड़बड़ लगा। शाम करीब पांच बजे किसी तरह पत्नी ने उन्हें खाना खिलाया। बातचीत के दौरान ही देवी शंकर मिश्रा ने प्रताड़ना का जिक्र किया। शुक्रवार सुबह वह सर्विस पिस्टल जमा करने की बात कहकर घर से निकले थे।
84 में शुरू की थी नौकरी
रवि शंकर ने बताया कि उनके भाई ने 1984 में नौकरी शुरू की थी। इससे पूर्व वह दिल्ली में एसपीजी में तैनात था और इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, चंद्रशेखर, वीपी सिंह समेत सात प्रधानमंत्री की सुरक्षा में रहा। वहां से लौटकर देवी शंकर मिश्रा उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सुरक्षा दस्ते का हिस्सा बना।
बेटी की शादी की तैयारी थी, बिखर गया परिवार
देवी शंकर मिश्रा की मौत से पूरा परिवार बिखर गया है। पत्नी मंजू ने बताया कि बड़ी बेटी ज्योति की शादी चंडीगढ़ में हो चुकी है। छोटी बेटी कोमल अंबालिका इंस्टीट्यूट से एमबीए द्वितीय सेमेस्टर की छात्रा है। उसकी शादी के लिए देवी प्रसाद लड़का तलाश रहे थे। देवी शंकर तीन भाई में सबसे छोटे थे। बड़े भाई हरि शंकर उन्नाव में पैतृक आवास में रहकर खेती-किसानी करते हैं, जबकि दूसरे नंबर के रवि शंकर पीएसी 32वीं वाहिनी में हेड कांस्टेबल हैं।
पता होता कि ऐसा हो जाएगा तो साथ चली जाती
मंजू ने कहा कि सुबह वह जागे तो सबकुछ सामान्य था। करीब आठ बजे वह बेटी को इंस्टीट्यूट की बस में बैठाने गए। लौटकर आए तो चाय पी और नहाकर तैयार होने के बाद नौ बजे बाइक से ऑफिस चले गए। करीब दस बजे ऑफिस के कर्मचारियों ने उनकी तबीयत खराब होने की सूचना दी। वह जैसे ही ट्रॉमा पहुंची, पति का शव देखकर कहर टूट पड़ा। मंजू ने कहा कि, पता होता कि ऐसा होगा तो वह साथ ही ऑफिस चली जातीं।
बेटी को नौकरी व मुआवजे की मांग
परिवारीजनों ने शाम करीब पांच बजे पोस्टमार्टम हाउस के पास सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने आरोपी इंस्पेक्टर को मौके पर बुलाने की मांग की। पुलिसकर्मियों ने जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिलाया तब वह शांत हुए। परिवारीजनों ने देवी शंकर की बेटी कोमल को सरकारी नौकरी देने और मुआवजे की मांग की है। इस बीच किसी अधिकारी के भी पोस्टमार्टम हाउस न पहुंचने पर परिवारीजनों ने नाराजगी जताई। शाम करीब सात बजे एसएसपी कलानिधि नैथानी के समझाने पर परिवारीजनों ने जाम समाप्त किया। इस दौरान लगभग दो घंटे तक इलाके में यातायात व्यवस्था बाधित रही।
मनमाने तरीके से कराते हैं काम, ड्यूटी के लिए मांगते हैं पांच हजार रुपये
मंजू व अन्य परिवारीजनों ने सुरक्षा मुख्यालय में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। उनका कहना था कि कर्मचारियों से मनमाने तरीके से काम कराया जाता है। ड्यूटी लगाने के नाम पर पांच हजार रुपये मांगे जाते हैं। इन्कार पर प्रताड़ित किया जाता है। मंजू ने बताया कि पति ने कुछ महीने पहले भवन निर्माण के लिए लोन लिया था। इससे कुछ आर्थिक तंगी चल रही थी। इसलिए उन्होंने इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह को रुपये देने में असमर्थता जताई थी। मंजू ने कहा कि अगर वह रुपया दे देते तो शायद आज जिंदा होते।
इंस्पेक्टर पर अपनी सर्विस रिवॉल्वर से गोली मारने का आरोप लगा दी तहरीर
देवी शंकर मिश्रा की पत्नी मंजू ने इंस्पेक्टर मनोज कुमार सिंह पर अपनी सर्विस रिवॉल्वर से पति को गोली मारकर हत्या का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। मंजू ने तहरीर में लिखा है कि पति का इंस्पेक्टर से कई दिन से विवाद चल रहा था। 30 अगस्त को भी ऑफिस में अचानक विवाद हुआ और इंस्पेक्टर ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से गोली चला दी, जिससे पति की मौत हो गई। पति का मोबाइल व सर्विस रिवॉल्वर इंस्पेक्टर ने ले लिया। मंजू ने तहरीर में इंस्पेक्टर पर हर महीने 50 हजार रुपया मांगने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पति के मोबाइल फोन पर इंस्पेक्टर की अंगुलियों के निशान हैं। यह मामला आत्महत्या का न होकर हत्या का है। उन्होंने हत्या और साजिश की धारा में केस दर्ज करने की मांग की है।