मैं केवल सेनापति, जो हाईकमान आदेश देगा वही करेंगे: राज बब्बर
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यूपी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर का कहना है कि वे तो केवल सेनापति हैं। जैसा पार्टी नेतृत्व का आदेश होगा उसी के अनुसार चुनावी रण में उतरेंगे। सेनापति व फौज तैयार है। बस नेतृत्व की रणनीति का इंतजार है।
राज बब्बर मानते हैं कि चुनावी तैयारियों में कांग्रेस थोड़ी पिछड़ी जरूर है, पर वे यह भी दावा करते हैं कि प्रत्याशियों का एलान होते ही इसकी भरपाई कर ली जाएगी।
उनका यह भी कहना है कि वैसे तो कांग्रेस सभी 403 सीटों पर मजबूती के साथ चुनाव लड़ने में सक्षम है और प्रत्याशियों का चयन भी कर लिया गया है, पर गठबंधन को लेकर नेतृत्व जो फैसला होगा उसी के मुताबिक प्रदेश इकाई चुनाव मैदान में उतरेगी।
कांग्रेस की मौजूदा चुनौतियों, सपा से गठबंधन, समाजवादी पार्टी में मचे घमासान समेत तमाम मुद्दों पर ‘अमर उजाला’ ने राज बब्बर से विस्तार से बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश-
ये हैं कांग्रेस की अब तक की तैयारियां
सवाल- दूसरे के मुकाबले कांग्रेस चुनावी तैयारियों में पिछड़ी दिखाई दे रही है? कैसे कर पाएंगे मुकाबला?
जवाब- इसमें कोई शक नहीं है कि प्रत्याशियों के चयन में हम थोड़ा पिछड़ गए हैं लेकिन जो देरी हुई है उसकी भरपाई जल्द कर लेंगे। प्रदेश इकाई ने प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया पूरी करके सभी 403 सीटों का पैनल केंद्रीय चुनाव समिति को भेज दिया है। इसी सप्ताह तीसरे चरण तक के उम्मीदवारों की सूची जारी हो जाने की उम्मीद है। इसके बाद आपको चुनाव में कांग्रेस भी मुख्य मुकाबले में नजर आने लगेगी।
सवाल- लेकिन अटकलें तो सपा से गठबंधन की हैं। असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कहां तक पहुंची बात?
जवाब- हम केवल एक ही चीज में लगे हैं। चयन प्रक्रिया और मजबूत प्रत्याशी। हमने मजबूत प्रत्याशियों की लिस्ट अपने नेताओं के सामने रख दी है। अब उनको फैसला करना है कैसे चुनाव लड़ना है। स्वाभाविक तौर पर लड़ाई की दिशा नेतृत्व तय करता है। हम तो सेनापति हैं। फौज के साथ तैयार हैं। हमें आदेश मिलेगा कि तलवार लेकर चलना है तो तलवार लेकर चलेंगे। पैदल धावा बोलना है तो पैदल बोलेंगे। घोड़े पर जाना है तो घोड़े पर जाएंगे। हवाई जहाज पर जाना है तो हवाई हमले करेंगे।। ऊपर का जैसा आदेश और जो रणनीति होगी उसी के अनुसार हमारे लोग चुनाव मैदान में उतरेंगे। हमारा नेतृत्व व प्रदेश इकाई हर तरह से सक्षम है।
'सब कुछ हमी हैं, हमारे अलावा और कुछ नहीं'
सवाल- दूसरे दल तो अभी से आक्रामक प्रचार में जुटे हैं। कांग्रेस कहीं नजर नहीं आ रही है?
जवाब- वो लोग बहुत ज्यादा धनबल के साथ चुनाव में जाना चाहते हैं। एक पार्टी जाति समीकरण के सहारे है और बार-बार चिल्ला-चिल्लाकर कह रही है, देखो मेरे पास ये है तुम लोग बंट मत जाना। अजीब से हालात हैं। चुनाव में या तो ब्लैकमेल किया जा रहा है या प्रलोभन दिया जा रहा है। एक तरफ सरकारी पार्टियां हैं। वो चाहे प्रदेश की हो या केंद्र की हो।
प्रदेश की पार्टी दूसरी तरह की ताकत दिखा रही है और उस ताकत में विघटन भी हो रहा है। केंद्र की पार्टी तो पूरी तरह दबंगई पर उतरी हुई है। कह रही है- ‘वी आर दी माइट’... सब कुछ हमी हैं, हमारे अलावा और कुछ नहीं है। जनता इन तमाम चीजों को देख रही है। चाहे वो नोटबंदी हो, चाहे धर्म की राजनीति करने वाले लोग हों या मजहबी माहौल बनाकर बार-बार डराने की कोशिश कि आप बंट गए तो खत्म हो जाओगे।
जहां तक हमारा सवाल है तो हमारी कोशिश ग्रास रूट पकड़ने की है। कांग्रेस की बुनियाद और पहचान के साथ लोगों के बीच जा रहे हैं। इसके उत्साहजनक परिणाम भी मिल रहे हैं।
'यूपी में कब जारी करेंगे घोषणा पत्र'
सवाल- पंजाब में तो राहुल गांधी का इंतजार किए बगैर घोषणा पत्र जारी कर दिया गया। अब तो राहुल लौट भी आए हैं। यूपी में कब कर रहे हैं?
जवाब- इसी हफ्ते पहले दो-तीन फेज के प्रत्याशियों की घोषणा हो जाने की उम्मीद है। इसके बाद घोषणा पत्र भी जारी कर देंगे। नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने से पहले घोषणा पत्र जारी हो जाएगा। इसके बाद प्रचार अभियान का खाका भी तैयार किया जाएगा।
सवाल- किन खास मुद्दों के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी है?
जवाब- हमारा खास फोकस यूथ पर रहेगा। सूबे में जिन भी पार्टियों की सरकारें बनीं, कांग्रेस को गाली देकर बनी हैं। उन्होंने कांग्रेस को सिर्फ बुरा-भला कहा। हम लोगों का भी दोष रहा और कमजोरी रही कि मजबूती से अपनी बात कह नहीं पाए। हम जनता को बताएंगे कि जिन वादों को लेकर ये सरकारें बनीं, इन 27 सालों में किया क्या?
जिस जाति, बिरादरी या धर्म का नारा देकर सत्ता में आए, उन लोगों के डवलपमेंट के लिए क्या किया? सिर्फ अपने परिवारों का डवलपमेंट किया या अपने उन सहयोगियों के लिए किया जो इनका साथ देते हैं। समाज का क्या हुआ? न उस जाति के लोगों का कोई भला हुआ न बिरादरी और न धर्म के लोगों का। इससे प्रदेश का बड़ा नुकसान हुआ। कारखाने बंद हो रहे हैं।
आज नौजवान बेरोजगार है। 27 साल पहले कांग्रेस ने जो योजनाएं व विकास के काम शुरू किए थे, वही चल रहे हैं। यह एक बड़ा मुद्दा होगा। यूपी के लिए कंपोजिट ब्ल्यू प्रिंट बनाना पड़ेगा। यूथ के साथ किसानों को भी टारगेट किया जाएगा, क्योंकि आज सबसे ज्यादा मुसीबत में वही हैं।
'अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया'
सवाल- सूबे में मुख्य मुकाबला किससे मान रहे हैं?
जवाब- सही मायने में आज की तारीख में फाइट उन शक्तियों से है जो सिर्फ भावनात्मक नारों व झूठे सपनों के सहारे प्रदेश को पीछे दर पीछे ले जा रही हैं। बीजेपी और बाकी तमाम पार्टियां इसमें शामिल हैं, नारों से अब काम नहीं चलेगा।
पार्टी कोई भी हो, चाहे हमारी ही पार्टी क्यों न हो। कांग्रेस की विश्वसनीयता आज भी है। आप देख लीजिए अगर पांच मिनट के लिए मनमोहन सिंह कहते हैं नोटबंदी आपदा है और इससे जीडीपी नीचे आ जाएगी तो यह सच भी साबित हो रहा है और लोग इसे मान भी रहे हैं। कांग्रेस के पास विजन व अनुभव है।
प्रदेश के नौजवानों व किसानों का अधिकार कांग्रेस ही दे सकती है। आज व्यापारियों पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। नोटबंदी के चलते व्यापार चौपट हो गया। जब लोगों की जेब में पैसा ही नहीं होगा तो व्यापारी क्या करेगा? दुकान सजाकर बैठे रहने के अलावा कोई काम नहीं रह गया है। जहां 85-90 फीसदी कैस इकोनॉमी है वहां की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया गया है।
'कब हो रही है राहुल-अखिलेश की मुलाकात'
सवाल- राहुल-अखिलेश की मुलाकात कब हो रही है?
जवाब- कयास तो बहुत लग रहे हैं। रोज सुबह होता है कि पिताजी-बेटेजी की सुलह हो रही है। फिर शाम को कहते हैं कि नहीं हुई, रात को फिर कयास लगने लगते हैं। हम चुनाव के लिए तैयार हैं और खुद को सक्षम मान रहे हैं। अब हमारा नेतृत्व हमें जो आदेश देगा उसी के अनुसार काम करेंगे।
सवाल- आप भी सपा में रहे हैं। सपा में आजकल जो कुछ चल रहा है उस पर आपका क्या नजरिया है? सूबे की सियासत पर इसका कितना असर पड़ेगा?
जवाब- इस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करूंगा, क्योंकि उनके परिवार और पार्टी का मसला है। लेकिन हर कोई जानता है कि मुलायम ने बड़े संघर्षों के साथ पार्टी बनाई है। आज की तारीख में सब ये भी जानते हैं कि अखिलेश यूपी में नेतृत्व के लिए पार्टी का सक्षम चेहरा हैं। अब ये फैसला तो दोनों और पार्टी के कार्यकर्ताओं को करना है। न तो कोई मुलायम सिंह यादव के संघर्ष को भुला सकता है और न ही अखिलेश की जो लोकप्रियता बढ़ी है उसे नजरंदाज कर सकता है। इसमें बाहर का व्यक्ति कुछ नहीं कर सकता है।
हां कार्यकर्ताओं को जरूर तकलीफ हो रही होगी। वो बड़ी आपाधापी की स्थिति में हैं। एक पार्टी जो सत्ता में हो, इतने कार्यकर्ता बनाए हों, जो केवल पार्टी का झंडा लेकर नहीं चलते बल्कि अपनी पहचान बनाकर चलते हैं उसका यूपी की राजनीति में निश्चित तौर पर नुकसान होगा।