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नगर निगम कार्यकारिणी में एक सीट झटक सकती है कांग्रेस
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सत्ता पक्ष में अंदरूनी खेमेबाजी का मिल सकता है पार्टी को फायदा
नगर निगम कार्यकारिणी के छह सदस्यों के लिए होने वाले चुनाव में इस बार कांग्रेस दांव मार सकती है। वोटों के लिहाज से पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकती है, लेकिन सत्ता पक्ष में अंदरूनी खेमेबाजी से कांग्रेस पहले की तरह एक सीट झटक सकती है। इसे लेकर भाजपा और सपा के पार्षदों में अंदरूनी सहमति भी बन रही है। छह पदों के लिए भाजपा और सपा में तेजी से जोड़-तोड़ चल रहा है।
निगम की 12 सदस्यीय कार्यकारिणी के छह सदस्यों के रिटायर होने के बाद जो बचे हैं उनमें भाजपा के चार और सपा के दो सदस्य हैं। जब सदस्य रिटायर नहीं हुए थे तब भाजपा के आठ और सपा के चार सदस्य थे। कांग्रेस का एक भी सदस्य नहीं था। ऐसे में कार्यकारिणी में भाजपा का दबदबा था, जो अब भी है। छह पदों पर चुनाव के बाद भी वोटों के लिहाज से भाजपा का ही दबदबा रहेगा, लेकिन अंदरूनी खींचतान से एक सीट पार्टी के हाथ से खिसक सकती है। भाजपा पार्षदों का एक खेमा मौजूदा व्यवस्था से खफा है। यह विपक्ष की आड़ लेकर उन्हें सबक सिखाने की तलाश में है, जो नगर निगम में सत्ता परिवर्तन के बाद से उन्हें उपेक्षित महसूस करा रहे हैं।
अधिनियम के जानकार व अनुभवी को भेजने की योजना
सपा, कांग्रेस के अलावा भाजपा के भी कुछ पार्षदों का खेमा कार्यकारिणी में ऐसे पार्षद को भेजना चाहता है जो अनुभवी होने के साथ नगर निगम अधिनियम का जानकार हो। पार्षदों में इसे लेकर चर्चा है कि यह पहली कार्यकारिणी है जिसमें विपक्ष में कोई बोलने वाला ही नहीं है। जिन्हेें इस उम्मीद के साथ पिछले साल कार्यकारिणी भेजा था, उन्होंने भी मुंह बंद कर लिया है। ऐसे में सत्ता पक्ष मनमाने तरीके से प्रस्ताव पास करा ले रहा है। इसे देखते हुए कांग्रेस के फिर उसी अनुभवी मास्टर की ओर सबकी निगाहें हैं, जो नियमों के साथ मुद्दों को प्रमुखता से रखते हैं।
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एक सीट के लिए 18 वोट की जरूरत
वरिष्ठ पार्षद ने बताया कि एक पद के लिए 18 वोट एक प्रत्याशी को प्रथम वरीयता में चाहिए होंगे। जिसे 18 वोट मिलेंगे वह जीत जाएगा। ऐसे में भाजपा की तीन सीटें तो पक्की हैं पर चौथी के लिए संकट हो सकता है, क्योंकि उसके तीन पार्षदों की मौत होने से 3 वोट कम हो गए हैं।
किस दल के कितने पार्षद
भाजपा- 60
सपा- 31
कांग्रेस- 07
निर्दलीय- 09
तीन पद रिक्त (पार्षदों की मृत्यु के कारण)
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नगर निगम कार्यकारिणी के छह सदस्यों के लिए होने वाले चुनाव में इस बार कांग्रेस दांव मार सकती है। वोटों के लिहाज से पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकती है, लेकिन सत्ता पक्ष में अंदरूनी खेमेबाजी से कांग्रेस पहले की तरह एक सीट झटक सकती है। इसे लेकर भाजपा और सपा के पार्षदों में अंदरूनी सहमति भी बन रही है। छह पदों के लिए भाजपा और सपा में तेजी से जोड़-तोड़ चल रहा है।
निगम की 12 सदस्यीय कार्यकारिणी के छह सदस्यों के रिटायर होने के बाद जो बचे हैं उनमें भाजपा के चार और सपा के दो सदस्य हैं। जब सदस्य रिटायर नहीं हुए थे तब भाजपा के आठ और सपा के चार सदस्य थे। कांग्रेस का एक भी सदस्य नहीं था। ऐसे में कार्यकारिणी में भाजपा का दबदबा था, जो अब भी है। छह पदों पर चुनाव के बाद भी वोटों के लिहाज से भाजपा का ही दबदबा रहेगा, लेकिन अंदरूनी खींचतान से एक सीट पार्टी के हाथ से खिसक सकती है। भाजपा पार्षदों का एक खेमा मौजूदा व्यवस्था से खफा है। यह विपक्ष की आड़ लेकर उन्हें सबक सिखाने की तलाश में है, जो नगर निगम में सत्ता परिवर्तन के बाद से उन्हें उपेक्षित महसूस करा रहे हैं।
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अधिनियम के जानकार व अनुभवी को भेजने की योजना
सपा, कांग्रेस के अलावा भाजपा के भी कुछ पार्षदों का खेमा कार्यकारिणी में ऐसे पार्षद को भेजना चाहता है जो अनुभवी होने के साथ नगर निगम अधिनियम का जानकार हो। पार्षदों में इसे लेकर चर्चा है कि यह पहली कार्यकारिणी है जिसमें विपक्ष में कोई बोलने वाला ही नहीं है। जिन्हेें इस उम्मीद के साथ पिछले साल कार्यकारिणी भेजा था, उन्होंने भी मुंह बंद कर लिया है। ऐसे में सत्ता पक्ष मनमाने तरीके से प्रस्ताव पास करा ले रहा है। इसे देखते हुए कांग्रेस के फिर उसी अनुभवी मास्टर की ओर सबकी निगाहें हैं, जो नियमों के साथ मुद्दों को प्रमुखता से रखते हैं।
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एक सीट के लिए 18 वोट की जरूरत
वरिष्ठ पार्षद ने बताया कि एक पद के लिए 18 वोट एक प्रत्याशी को प्रथम वरीयता में चाहिए होंगे। जिसे 18 वोट मिलेंगे वह जीत जाएगा। ऐसे में भाजपा की तीन सीटें तो पक्की हैं पर चौथी के लिए संकट हो सकता है, क्योंकि उसके तीन पार्षदों की मौत होने से 3 वोट कम हो गए हैं।
किस दल के कितने पार्षद
भाजपा- 60
सपा- 31
कांग्रेस- 07
निर्दलीय- 09
तीन पद रिक्त (पार्षदों की मृत्यु के कारण)