योगी सरकार की ट्रांसफर पॉलिसी फेल, 'सेटिंग' वाले कर रहे मजे, ये है विभागों का हाल
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प्रदेश सरकार ने नई तबादला नीति पारदर्शी व्यवस्था के तहत बिना पक्षपात तय सीमा में करने के लिए बनाई थी, लेकिन कई विभागों में नीति को ताक पर रखकर अफसरों-कर्मचारियों को इधर से उधर किया जा रहा है। कई जगह एक बार तबादले किए जाते हैं, फिर दौड़-धूप होने पर बदले जा रहे हैं। जिनकी सेटिंग हैं, उनको छुआ तक नहीं जा रहा। तबादलों के ‘खेल’ सार्वजनिक न हों, इसके लिए कई विभागों में तबादला आदेश तो शासनादेश पोर्टल पर अपलोड किया जाता है, लेकिन संशोधन आदेश अपलोड नहीं किए जा रहे।
शिक्षा विभाग : एक साल के भीतर ही पुराने जिले में वापस हो गए बृजलाल
मंडल में साल सात वर्ष से अधिक समय होने की वजह से तबादला नीति का हवाला देकर बहराइच के तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी बृजलाल का तबादला बहराइच से लखीमपुर खीरी कर दिया गया था। मजे की बात ये है कि 29 मई के तबादला आदेश में बृजलाल एक साल पूरा होने के पहले ही लखीमपुर खीरी से वापस बहराइच भेज दिए गए हैं।
मंडल में लौटे शैलेंद्र
लखनऊ मंडल के सीतापुर जिले में तैनात रहे खंड शिक्षा अधिकारी शैलेंद्र वर्मा को पिछले साल सीतापुर से बहराइच भेजा गया था। हवाला दिया गया था कि तैनाती के सात साल मंडल में पूरे हो चुके हैं। इस बार के तबादले में शैलेंद्र फिर लखनऊ मंडल में वापस कर दिए गए हैं। उन्हें उन्नाव जिले में तैनाती दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग : पहले तबादले, फिर संशोधन
रानी लक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय राजाजीपुरम लखनऊ में कार्यरत डॉ. अल्पना शर्मा को संयुक्त निदेशक स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय बनाया गया है। उन्हें पहले जिला महिला चिकित्सालय श्रावस्ती भेजा गया था।
- निदेशक ग्रेड की चिकित्सक डॉ. गीता यादव को एएचएम चिकित्सालय कानपुर से जिला महिला चिकित्सालय कानपुर देहात भेजा गया है। पहले उन्हें मिर्जापुर भेजा गया था।
- डॉ. अनिल कुमार सिंह को जिला चिकित्सालय बलिया में ही बहाल रखा गया है। पहले उनके गाजीपुर तबादले के आदेश दिए गए थे।
- रानी लक्ष्मीबाई संयुक्त चिकित्सालय राजाजीपुरम लखनऊ के डॉ. सरोज कुमार राय को भी वहीं बहाल रखा गया है। पहले उन्हें लखीमपुर भेजा गया था।
बाल विकास : अजब-गजब हाल
तबादला के चाबुक से दिव्यांग और कैंसर पीड़ित परेशान
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में सीडीपीओ कामिनी श्रीवास्तव के दोनों हाथ नहीं हैं। प्रदेश सरकार उन्हें लक्ष्मी बाई पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है। तबादला नीति में दिव्यांगों को सामान्यतया तबादले से मुक्त रखा गया है, लेकिन दिव्यांग होने के बावजूद कामिनी का लखनऊ से फतेहपुर ट्रांसफर कर दिया गया है।
- बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में कनिष्ठ सहायक मनोज कुमार को कौशांबी से चिकित्सीय आधार पर उनके गृह जिले इलाहाबाद तबादला किया गया था। वे कैंसर के गंभीर मरीज बताए जाते हैं। पर, कुछ ही दिन में मनोज का तबादला आदेश निरस्त कर भदोही भेज दिया गया।
- रोहित धुरिया लखीमपुर खीरी में प्रधान सहायक थे। 25 मई को इनका तबादला शामली किया गया। पांच दिन बीता और रोहित पीलीभीत पहुंच गए।
जिलों में डीपीओ के पद खाली, मुख्यालय पर बिना पद तैनाती
प्रदेश में जिला कार्यक्रम अधिकारी के करीब तीन दर्जन पद खाली बताए जाते हैं, मगर इस संवर्ग के कई अधिकारियों को बिना पद निदेशालय में तैनात रखा गया है। तबादला नीति में व्यवस्था है कि विभागाध्यक्ष कार्यालयों में कार्यरत अन्य अधिकारियों के समकक्ष पद यदि मुख्यालय से बाहर हैं तो तीन वर्ष से कार्यरत अधिकारियों को उनके समकक्ष पदों पर मुख्यालय से बाहर स्थानांतरित कर दिया जाए। मगर, बाल विकास एवं पुष्टाहार निदेशालय में लिपिक वर्ग के करीब आधा दर्जन कर्मी डेढ़-दो दशक से जमे हैं। ये पोषाहार सहित तमाम आकर्षक पटल देखते हैं। इनकी यहां ‘मोनोपोली’ चलती है, पर इनके तबादले की जरूरत नहीं महसूस की गई।
ग्राम्य विकास : पहले वाहवाही बटोरी, फिर पुराने ढर्रे पर लौटे
ग्राम्य विकास विभाग में 16 मई को 59 तबादले किए गए। इनमें आठ सीडीओ, 26 डीडीओ, 28 पीडी व 4 जेडीसी शामिल थे। दरबार लगाकर नाम पुकारकर उपलब्ध पदों में पसंद के आधार पर अफसरों को तैनाती दी गई। इससे विभाग ने खूब सुर्खियां बटोरीं, मगर इसके बाद 53 बीडीओ, एक सीडीओ और करीब 10 डीडीओ व पीडी इधर से उधर किए गए हैं। इन तबादलों में ‘ओपन ट्रांसफर’ की जगह सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट आया है।
पुलिस विभाग : रिटायरमेंट में 30 दिन बाकी, फिर भी तबादला
जिन कार्मिकों का रिटायरमेंट दो वर्ष के भीतर है, उनका तबादला यथासंभव उनकी सुविधा के अनुसार जिले में करने की व्यवस्था तबादला नीति में है। जवाहर झांसी में डीआईजी के पद पर तैनात थे। वे 30 जून को रिटायर हो रहे हैं। इसके बावजूद उनका तबादला वाराणसी पीएसी सेक्टर में कर दिया गया।