नारी निकेतन में लड़कियों के रहने लायक हालात नहीं: हाईकोर्ट
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‘नारी निकेतन में लड़कियों के रहने लायक आदर्श स्थितियां नहीं होती हैं। ऐसे में किसी लड़की को अंतिम विकल्प के रूप में यहां रखा जाना चाहिए, जब उसके पास रहने की दूसरी जगह न हो।’
हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस टिप्पणी के साथ लखनऊ के महिला संरक्षण गृह में रह रही युवती को तुरंत वहां से रिहा करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि युवती को अपनी मर्जी के मुताबिक जाने दिया जाए।
न्यायमूर्ति अजय लांबा और न्यायमूर्ति रवींद्रनाथ मिश्र द्वितीय की खंडपीठ ने यह फैसला युवती की तरफ से उसके कथित पति के जरिये दायर याचिका पर सुनाया। इसमें युवती को महिला संरक्षण गृह से मुक्त किए जाने और उसे वहां रखने संबंधी सीतापुर की एक अदालत के आदेश को रद्द किए जाने का आग्रह किया गया था।
‘भगाया नहीं भागकर आई हूं’
युवती को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के आरोपों में सीतापुर के अटरिया थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। वहीं, युवती ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए कलमबंद बयान में कहा कि युवक (कथित पति) ने उसे भगाया नहीं बल्कि वह खुद अपनी मर्जी से उसके साथ गई थी और उससे शादी कर ली है।
युवती ने अपने पति के साथ ही रहने की इच्छा जताई। जांच के बाद युवती की उम्र भी 18-19 साल पाई गई। कोर्ट ने युवती की तरफ से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को मंजूर कर लिया। साथ ही सीतापुर के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत के 19 जून 2015 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया।
कोर्ट ने महिला संरक्षण गृह लखनऊ के अधीक्षक को निर्देश दिया कि युवती को तत्काल रिहा कर दिया जाए।