UP: बैंकों से यूपी वालों की शिकायतें हुईं कम, प्रति एक लाख खाताधारकों में प्रदेश से शिकायत का औसत सिर्फ 9.5
यूपी में बैंक ग्राहकों की शिकायतें कम हुई हैं। पिछले एक साल में यूपी में बैंकों की शिकायतों का औसत प्रति लाख खाताधारकों में 9.5, दिल्ली में 12, गुजरात में 11 और राजस्थान में 12 है। देखें - पूरी डिटेल:
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यूपी के बैंक ग्राहक देश के अन्य राज्यों की तुलना में अपने बैंकों से ज्यादा संतुष्ट हैं, इसीलिए उनकी शिकायतें भी कम हुई हैं। बैंकिंग लोकपाल के मुताबिक पिछले एक साल में यूपी में बैंकों की शिकायतों का औसत प्रति लाख खाताधारकों में 9.5, दिल्ली में 12, गुजरात में 11 और राजस्थान में 12 है।
प्रदेश में इससे पहले की अवधि में प्रति लाख खाताधारकों की शिकायतों का औसत 11 था। शिकायतों में सबसे ज्यादा मामले मोबाइल बैंकिंग, लोन और जमा खातों के हैं। कुल शिकायतों में से 65 फीसदी इन्हीं से संबंधित हैं।
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बैंकों से जुड़ी शिकायतों में कमी का प्रमुख कारण बैंकिंग सेवाओं का अपेक्षाकृत बेहतर होना है। सरकारी योजनाओं में लोन और सब्सिडी की मॉनीटरिंग और निजी व स्माल फाइनेंस बैंकों से प्रतिस्पर्धा भी इसका प्रमुख कारण है। राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी की मासिक और तिमाही समीक्षा में भी बैंकों में कामकाज का माहौल सुधरा है। हालांकि, इतना होने के बावजूद बैंक अब भी छोटे उद्यमियों को लोन देने से कतराते हैं।
शिकायतों के मामले में शीर्ष 10 राज्य
| राज्य | शिकायतें |
| चंडीगढ़ | 25.7 |
| दिल्ली | 12.1 |
| राजस्थान | 11.9 |
| गुजरात | 11.6 |
| उत्तराखंड | 10.0 |
| महाराष्ट्र | 9.8 |
| उत्तर प्रदेश | 9.5 |
| हरियाणा | 9.1 |
| तेलगांना | 8.9 |
| मध्य प्रदेश | 8.8 |
खाताधारकों के लिए मोबाइल बैंकिंग मुसीबत बनी
खाताधारकों को सबसे ज्यादा शिकायतें मोबाइल बैंकिंग से है। चिंताजनक बात ये है कि हर वर्ष इसमें इजाफा हो रहा है। वर्ष 2022 से 2024 के बीच शिकायतों की संख्या 39 हजार से बढ़कर 54 हजार हो गई हैं। इससे भी ज्यादा मामले लोन को लेकर हैं। बैंक टारगेट पूरा करने के दबाव में लोन और एडवांस देने में शर्तें छिपा रहे हैं। तीन वर्ष में लोन संबंधी शिकायतों के मामले ढाई गुना बढ़े हैं। इस अवधि में शिकायतें 24 हजार से बढ़कर 54 हजार से भी ज्यादा हो गईं। जमा खातों के संचालन और नए खातों की शिकायतें भी करीब तीन गुना बढ़ी हैं। यहां भी बैंकों पर नए खाते खोलने का दबाव है। ज्यादातर मामलों में जीरो बैलेंस बताकर खाते खुलवाए गए, लेकिन एक वर्ष बाद ही न्यूनतम बैलेंस न रखने पर लगने वाली पेनाल्टी ने ग्राहकों को नाराज कर दिया। इसी का परिणाम है कि तीन वर्ष में ये संख्या 16 हजार से बढ़कर 46 हजार हो गई है।