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मेट्रो रूट के दोनों ओर बनेंगे कॉमर्शियल कॉम्प्ल्ोक्स

Fri, 17 Jan 2014 09:13 AM IST
ऋषि मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ
ऋषि मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 17 Jan 2014 09:13 AM IST
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commercial use of both side of metro

मेट्रो रेल के 23 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में भूमि का सर्वश्रेष्ठ उपयोग हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा। इसके लिए राजधानी के कल्चरल हेरिटेज को ध्यान में रखते हुए मेट्रो स्टेशनों का डिजाइन किया जाएगा।

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इसके अलावा मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर जो भी स्थान उपलब्ध होगा, उसका श्रेष्ठ कॉमर्शियल इस्तेमाल किया जाएगा।

इसके लिए एलएमआरसी एक बिजनेस कंसलटेंट की मदद लेगा। लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की दूसरी बोर्ड बैठक में बृहस्पतिवार को ये फैसला लिया गया।

एलएमआरसी के चेयरमैन और मुख्य सचिव जावेद उस्मानी की अध्यक्षता में दूसरी बोर्ड मीटिंग पांच एजेंडे को लेकर हुई। इसमें तय किया गया कि कंसलटेंट के चयन के लिए एक बिड डॉक्यूमेंट तैयार किया जाएगा।
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इसके लिए कमेटी बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता मुख्य नगर एवं ग्राम्य नियोजक करेंगे। इसके अलावा एलएमआरसी के प्रारंभिक ढांचे के गठन के लिए एचआर नीति का अध्ययन प्रमुख सचिव आवास की अध्यक्षता में गठित एक उप समिति करेगी।
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बैठक में प्रमुख सचिव आवास सदाकांत, एमडी राजीव अग्रवाल, सचिव वित्त मुकेश मित्तल के अलावा अन्य महत्वपूर्ण अधिकारी मौजूद रहे।

केंद्र के साथ एमओयू की ओर बढ़ा कदम
केंद्र सरकार के साथ बहुत जल्द मेट्रो रेल परियोजना को लेकर प्रदेश सरकार मेमोरंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग को अमलीजामा पहनाएगी।

बोर्ड में फैसला हुआ कि जो सैद्धांतिक सहमति केंद्र की ओर से परियोजना को दी गई है, उसकी शर्तों का पालन कर के एमओयू का ड्राफ्ट बनाया जाए।

इसी ड्रॉफ्ट के आधार पर एमओयू को पहले शासन की हाईपॉवर कमेटी पास करेगी। इसके बाद में केंद्र सरकार के साथ एमओयू हो जाएगा।

1677 करोड़ केंद्र से और 3502 करोड़ का लेंगे ऋण
एलएमआरसी ने नार्थ साउथ कारिडोर पर आने वाले कुल खर्च के लिए केंद्र का हिस्सा और ऋण का बजट भी तय कर लिया है।

केंद्र सरकार से 1677 करोड़ रुपये का बजट और ऋण के तौर पर 3502 करोड़ रुपये लिए जाएंगे। इसको लेकर प्रस्ताव केंद्र सरकार को पहले ही भेजे जा चुके हैं। इसकी औपचारिक अनुमति एलएमआरसी बोर्ड से भी ले ली गई है।


टेक्नोफिजीबिलिटी पर खुद खर्च करें धन
मिल रोड, रिंग लाइन और अन्य मेट्रो रूटों का अध्ययन करने के लिए डीएमआरसी को जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, उस पर करीब चार करोड़ रुपये का खर्च आना है।

इसके लिए एलएमआरसी ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया था, लेकिन केंद्र ने इन्कार कर दिया। इस संबंध में फैसला हुआ कि एलएमआरसी यह रुपये खुद खर्च करे और केंद्र से दोबारा रुपये देने का अनुरोध करे।

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