कोल्ड डायरियाः लापरवाही न बन जाए जानलेवा
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ठंड के मौसम को चिकित्सक भले ही हेल्दी सीजन कहते हैं लेकिन यह भी सच है कि बीमारी फैलाने वाले वायरस सर्दी के मौसम में तेजी से बढ़ रहे हैं जिसके सबसे ज्यादा शिकार छोटे बच्चे हो रहे हैं।
रोट्रो और नोरो वायरस से पीड़ित बच्चों को कोल्ड डायरिया की शिकायत हो रही है। बलरामपुर अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विष्णुलाल ने बताया कि कोल्ड डायरिया के सबसे ज्यादा मामले शुरुआती ठंड में होते हैं।
इस दौरान बरती गई लापरवाही मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाती है और संक्रमण के चलते उल्टी-दस्त की समस्या शुरू हो जाती है। कोल्ड डायरिया सामान्य डायरिया की तरह है।
इसमें पीड़ित को सर्दी, जुकाम के साथ बुखार होता है जिसके बाद बच्चे रोट्रो व नोरो वायरस की चपेट में आकर उल्टी दस्त के शिकार हो जाते हैं। शादी और पार्टी का खाना खाने से भी बच्चे और बड़े दोनों इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।
ये लक्षण दिखाई दें तो हो जाएं सावधान
बाल रोग विशेषज्ञों की मानें तो कोल्ड डायरिया मूल रूप से ठंड में वायरस अटैक से होता है। इसके अलावा ठंड में जोयारोट्रो वायरस, इंट्रोवायरस, क्लैपसेला और ईकोलाई से परेशानी होती है।
इन वायरस के प्रवेश के बाद बच्चों को पेचिस की शिकायत हो जाती है। एक दिन में दो या तीन बार से अधिक पानी की दस्त हो जाए तो इसका मतलब है कि बच्चे के भीतर रोट्रो व नोरो वायरस का अटैक पड़ गया है।
इसके अलावा बच्चे ठंड में पानी नहीं पीते हैं जिसकी वजह से उनके शरीर में पानी की कमी हो जाती है और वो विंटर डायरिया की चपेट में आ जाते हैं।
ठंड से बलरामपुर अस्पताल में दो माह की दीप्ति की मौत हो गई। उसे शनिवार सुबह ही भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि कोल्ड डायरिया से पीड़ित दीप्ति को उसके परिवारीजन इमरजेंसी लेकर आए थे। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विष्णु लाल उसका इलाज कर रहे थे, लेकिन हालत गंभीर होने से उसे बचाया नहीं जा सका।