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B.Ed: परीक्षा में लागू हुआ कोडिंग सिस्टम
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 22 Feb 2014 09:35 AM IST
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प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में बीएड की प्रायोगिक परीक्षा के लिए कोडिंग सिस्टम लागू कर दिया गया है। इसके तहत अब परीक्षक न अपना नाम उजागर करेगा न परीक्षार्थी से उसका नाम पूछेगा।
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परीक्षक और परीक्षार्थी दोनों के लिए विश्वविद्यालय स्तर से कोड जारी किया जाएगा। इस संबंध में शासन की ओर से सभी विश्वविद्यालयों को पत्र जारी कर दिया गया है।
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उच्च न्यायालय के निर्देश के क्रम में शासन ने यह व्यवस्था लागू की है। इसके तहत उच्च शिक्षा निदेशालय से छह बिंदुओं पर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। परीक्षकों की टीम का गठन विश्वविद्यालय के कुलपति का दायित्व होगा।
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इसके लिए वे जिस विश्वविद्यालय के शिक्षक को आमंत्रित करेंगे, वह भी गोपनीय होगा। किसी भी कॉलेज में अचानक परीक्षकों की टीम भेजी जाएगी। कॉलेज प्रशासन को न पहले से इसकी जानकारी नहीं दी जाएगी और न परीक्षकों का नाम उजागर किया जाएगा।
परीक्षकों की टीम के सदस्य पहले विश्वविद्यालय पहुंचेंगे और वहां से उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन परीक्षा केंद्र भेजेगा। परीक्षक को अंत तक नहीं मालूम होगा कि उसे परीक्षा लेने कहां जाना है।
परीक्षा केंद्र पर जाने के बाद परीक्षक न अपना नाम बताएगा न किसी परीक्षार्थी से उसका नाम जानने की कोशिश करेगा। परीक्षक और परीक्षार्थी दोनों के लिए कोड नंबर जारी किए जाएंगे।
अगर कोई परीक्षक अपना नाम उजागर करता है या किसी परीक्षार्थी का नाम जानने की कोशिश करता है तो उसे काली सूची में डाल दिया जाएगा।
इतना ही नहीं नई व्यवस्था के तहत स्ववित्तोपषित कॉलेज के किसी शिक्षक को प्रायोगिक परीक्षा का परीक्षक नहीं बनाया जाएगा। जिस कॉलेज में परीक्षा होनी है, उस कॉलेज के शिक्षक को भी वहां का परीक्षक नहीं बनाया जाएगा।
परीक्षा केदिन ही परीक्षक सीलबंद लिफाफे में परीक्षार्थियों के नंबर विश्वविद्यालय को उपलब्ध कराएगा। नई व्यवस्था के क्रियान्वयन के लिए विश्वविद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक का चयन किया जाएगा।
जो सारी सूचनाएं सीधे कुलपति को उपलब्ध कराएगा। विशेष सचिव उच्च शिक्षा निधि केसरवानी की ओर से पत्र प्राप्त होने के बाद अब विश्वविद्यालय इस नई व्यवस्था को अपनाएंगे।