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UP: सीएम बोले- बाढ़ के स्थायी समाधान को नदी की स्थानीय परिस्थितियों का होगा सर्वेक्षण, ड्रेजिंग को प्राथमिकता

Fri, 28 Feb 2025 09:05 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Fri, 28 Feb 2025 09:05 PM IST
सार

सीएम ने कहा कि यदि ड्रेजिंग से समाधान होना संभव न हो, तब ही तटबंध अथवा कटान निरोधी अन्य उपायों को अपनाया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी नदियों के ड्रोन सर्वेक्षण कर स्थानीय परिस्थितियों के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें।

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CM Yogi said For permanent solution to floods, local conditions of river will be surveyed
सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : सूचना विभाग

विस्तार

राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को सीएम योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ सम्बन्धी परियोजनाओं की समीक्षा की। इस मौके पर उन्होंने बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए नदी की स्थानीय परिस्थितियों के अध्ययन के निर्देश दिए हैं। कहा कि जहां कहीं नदी की मुख्य धारा में सिल्ट की अधिकता हो, नदी उथली हो, वहां ड्रेजिंग को प्राथमिकता दी जाए और नदी को चैनलाइज किया जाए। 

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शुक्रवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बाढ़ प्रबंधन और सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों से बाढ़ जन-धन हानि का बड़ा कारण रही है। इसके स्थायी समाधान के लिए पिछले आठ वर्षों में किए गए प्रयासों के अच्छे परिणाम मिले हैं। बाढ़ की दृष्टि से अति संवेदनशील जिलों की संख्या में काफी कमी आई है। विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार आधुनिकतम तकनीक का प्रयोग कर बाढ़ का खतरा न्यूनतम करने में सफलता पाई है।

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1575 बाढ़ परियोजनाएं पूरी की गईं

बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई ने बताया कि जन-धन की सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए 2018-19 से अब तक 1575 बाढ़ परियोजनाएं पूरी की गईं। इसमें 305 परियोजनाएं अकेले वर्ष 2024-25 में पूरी की गई हैं। 2024-25 में हुए प्रयासों से 4.97 लाख हेक्टेयर भूमि और 60.45 लाख की आबादी को लाभ हुआ है। 

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मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वर्तमान सत्र के लिए तय की गईं परियोजनाओं का बचा काम प्राथमिकता के आधार पर समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में देरी से न केवल काम प्रभावित होता है, बल्कि वित्तीय बजट भी बढ़ता है। किसी भी परियोजना का बजट पुनरीक्षण नहीं होगा।

इन जिलों में अलर्ट मोड पर रहें 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बाढ़ की दृष्टि से 24 जिले अति संवेदनशील श्रेणी में हैं। इसमें महाराजगंज, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, बस्ती, बहराइच, बिजनौर, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, गोण्डा, बलिया, देवरिया, सीतापुर, बलरामपुर, अयोध्या, मऊ, फर्रुखाबाद, श्रावस्ती, बदायूं, अम्बेडकर नगर, आजमगढ़, संतकबीर नगर, पीलीभीत और बाराबंकी शामिल हैं। जबकि सहारनपुर, शामली, अलीगढ़, बरेली, हमीरपुर, गौतमबुद्ध नगर, रामपुर, प्रयागराज, बुलन्दशहर, मुरादाबाद, हरदोई, वाराणसी, उन्नाव, लखनऊ, शाहजहांपुर और कासगंज संवेदनशील प्रकृति के हैं। यहां अलर्ट मोड में रहना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बाढ़ से सुरक्षा के लिए विभिन्न नदियों पर 3869 किमी लंबाई वाले 523 तटबंध बने हैं जबकि 60047 किलोमीटर लंबाई के 10727 ड्रेन हैं। बाढ़ की आशंका को देखते हुए सभी तटबंधों की सतत निगरानी की जाए। सभी ड्रेन की सफाई 31 मार्च के पहले करा ली जाए। 

लगातार मॉनिटरिंग की जाए

राज्य स्तर और जिला स्तर पर बाढ़ राहत कंट्रोल रूप 24×7 एक्टिव मोड में रहें। उन्होंने कहा कि श्रावस्ती, गोण्डा, सीतापुर, हरदोई एवं बाराबंकी में प्रस्तावित कार्यों को समय से गुणवत्ता के साथ पूरा कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि नदियों में अवैध खनन की गतिविधि कहीं भी न हो सके, इसके लिए लगातार मॉनीटरिंग की जाए।

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