अदम्य साहस दिखाने वाली लखनऊ की ज्योति समेत 126 महिलाओं को मिला रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि महिलाओं को अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए सिर्फ सरकार के ही भरोसे न रहकर खुद के बल पर भी आगे आने की जरूरत है। मौजूदा केंद्र व राज्य सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तीकरण के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन उसका भरपूर लाभ महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सरकारी तंत्र से उम्मीद लगाने के बजाय महिलाओं को खुद आगे आकर योजनाओं का लाभ लेना होगा।
महिला कल्याण एवं बाल विकास और संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार’ समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि जल्द ही पीएसी में महिलाओं की एक बटालियन का गठन किया जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इससे जहां महिलाओं की सुरक्षा-व्यवस्था और मजबूत होगी, वहीं उनमें सुरक्षा की भावना भी पैदा होगी।
समारोह में 126 महिलओं को 'रानी लक्ष्मीबाई वीरता पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। इनमें से 98 महिलाएं ग्राम प्रधान हैं। इसके अलावा लखनऊ के मो. कलाम और बाराबंकी के कुंवर दिव्यांश को भी साहस के लिए सम्मानित किया गया।
महिलाओं के गिरते लिंगानुपात पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी में अब भी कुछ जिले ऐसे हैं, जहां बेटियों के प्रति भेदभाव हो रहा है। इसे रोकने के लिए महिलाओं को खुद आगे आना चाहिए। उन्होंने महिलाओं से सामाजिक कुरीतियों को दूर करने, ग्रामीण इलाकों में शराब बंदी व नशामुक्ति के लिए भी आगे आने का आह्वान किया।
पिछले साल हाईस्कूल व इंटर की परीक्षाओं में लड़कियों के बेहतर प्रदर्शन की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश में महिलाएं हर क्षेत्र में अपना नाम रोशन करें। इसके लिए सरकार के स्तर से पूरी मदद दी जाएगी। महिला कल्याण मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने विभाग के क्रियाकलापों पर प्रकाश डाला। राज्य मंत्री स्वाति सिंह ने अतिथियों के प्रति आभार जताया। संस्कृति मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने विभाग के क्रियाकलापों की जानकारी दी। इस मौके पर प्रमुख सचिव महिला कल्याण रेणुका कुमार, सचिव जयप्रकाश सगर, विशेष सचिव राम केवल और सचिव संस्कृति जगतराज भी मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री ने जिन्हें पुरस्कार दिया उनमें लखनऊ की ज्योति श्रीवास्तव, सिंधु व डॉ. जेड एमएस (मऊ), कुंवर दिव्यांश व महजबी (बाराबंकी), पुष्पा व तारा (बहराइच), रीतिका (मेरठ), रीमा सिंह (चंदौली), वर्षा सिंह (बस्ती), रंजना द्विवेदी व अवधेश कुमारी (गोरखपुर), सलिया बानो (फर्रुखाबाद) और शहनाज बानो (वाराणसी) शामिल हैं।
अपने-पराये नहीं, मेरिट पर हुआ चयन
रानी लक्ष्मी बाई वीरता पुरस्कार के लिए चयन को लेकर मुख्यमंत्री ने किसी का नाम लिए बगैर पिछली सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने कि इस पुरस्कार के लिए चयन अपने-पराये के आधार पर नहीं, बल्कि मेरिट और महिलाओं के योगदान को देखकर किया है। उनकी सरकार में कोई भी योजना सबको ध्यान में रखकर संचालित की जाती है न किसी जाति, धर्म या क्षेत्र को ध्यान में रखकर।
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