कोल्ड स्टोरेज से निकला 13.50 लाख बोरी आलू, मगर बाजार नहीं पहुंचा, सीएम योगी बोले- जमाखोरों पर छापे मारो
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राजधानी लखनऊ के खुदरा बाजार में चढ़े आलू के दाम कालाबाजारी या जमाखोरी की ओर इशारा कर रहे हैं। शहर के कोल्ड स्टोरेज से अक्तूबर में 13.50 लाख बोरी आलू बिकने के लिए निकला, मगर बाजार तक नहीं पहुंचा। राजधानी के 15 कोल्ड स्टोरेज से 31 अक्तूबर तक 90 फीसदी आलू की निकासी हो चुकी है। यह आलू बाजार में पहुंचता तो दाम में कमी जरूर होती। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ।
लखनऊ कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष यश कुमार के अनुसार कोल्ड स्टोरेज में सिर्फ 10 फीसदी आलू बचा है। वहीं, उद्यान विभाग के अधिकारियों ने आशंका जताई है कि निकाला गया आलू मंडी में भेजने के बजाय कहीं और रख लिया गया है।
राजधानी में रोजाना की मांग की अपेक्षा आलू 50 टन कम आ रहा है। लखनऊ में एक दिन की औसत मांग 4000 बोरी यानी महीने में 1 लाख 20 हजार बोरी है। इस हिसाब से 13.50 लाख बोरी आलू में से 12.30 लाख बोरी बाजार में ही नहीं पहुंचा। इसके अलावा रोजाना 100 टन आलू कन्नौज व आसपास से जबकि 50 टन लखनऊ व आसपास से आता है। इस हिसाब से तो आलू का दाम नीचे गिरना चाहिए था, मगर स्थिति इसके विपरीत है। साथ ही, सरकार की ओर से 32 रुपये/किलो की दर से आलू बेचा जा रहा है। इसके बावजूद खुदरा मंडी में कीमत 40 से 45 रुपये/किलो है।
बाजार के लिए उतारा गया आलू गायब
जानकारों की मानें तो जमाखोरी के चलते भारी मात्रा में बाजार के लिए उतारा गया आलू गायब है और दाम चढ़े हुए हैं। दुबग्गा मंडी के आढ़ती रजी अहमद कहते हैं, कोल्ड स्टोरेज से अधिकांश आलू निकाले जाने के बावजूद सस्ता नहीं हो सका। स्टोर से निकला आलू कहां गया, पता ही नहीं।
योगी का निर्देश... जमाखोरों के ठिकानों पर छापे मारो
रविवार को राजधानी में एक बैठक के दौरान सीएम ने कहा कि राज्य सरकार इन आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने के सभी प्रयास कर रही है। सरकार जनता की कठिनाइयों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है।
उन्होंने निर्देश दिए कि आलू-प्याज, सब्जियों और दालों की बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को कोई परेशानी न हो।