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फुटपाथ वालों के लिए बनाएंगे पॉलिसी: अखिलेश

Mon, 28 Sep 2015 01:07 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 28 Sep 2015 01:07 PM IST
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CM Akhilesh Yadav to work for poor people.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने वाले नौ लोगों को आर्थिक मदद देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि समाज में मिसाल पेश करने वालों का सम्मान दूसरे लोगों को अच्छा काम करने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने फुटपाथ पर बैठकर काम करने वालों के लिए नीति बनाने की घोषणा भी की।

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कालिदास मार्ग स्थित सरकारी आवास पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिया के युवाओं ने मगरमच्छ को पकड़कर वह काम किया जो वन विभाग के लोग नहीं कर सके। इसी तरह मिर्जापुर के रामजीत यादव ने अपनी जान पर खेलकर कई बच्चों की जान बचाई।
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टाइपिस्ट के रूप में किशन कुमार ने न जाने कितने लोगों की नौकरी, दुख-दर्द की दरख्वास्त लिखी होंगी लेकिन उनके सम्मान को ठेस पहुंचाई गई। उन्होंने कोशिश की है कि उन्हें पहुंची ठेस की कुछ भरपाई हो सके। उन्होंने कहा कि अमीर और गरीब का सम्मान बराबर है। ऊंचे पदों पर बैठे लोगों को अधिकार नहीं है कि वे किसी को अपमानित करें।
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उन्होंने मुख्य सचिव से कहा है कि वर्षों से फुटपाथ पर बैठकर काम करने वालों के लिए पॉलिसी बनाएं। मुख्यमंत्री ने पढ़ाई के साथ रोजी-रोटी के लिए काम करने वाले हरेंद्र सिंह की सराहना की और कम उम्र में तमाम डिग्रियां लेकर पीएचडी करने वाली सुषमा की प्रतिभा को सराहा।

इस मौके पर राजनीतिक पेंशन मंत्री राजेंद्र चौधरी, बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री कैलाश चौरसिया, मुख्य सचिव आलोक रंजन और मशहूर शायर वसीम बरेलवी मौजूद रहे।

यूपी पुलिस के बारे में धारणा खराब है

CM Akhilesh Yadav to work for poor people.

टाइपिस्ट किशन कुमार के साथ बदसुलूकी पर सीएम ने कहा कि पूरे देश की पुलिस एक जैसी है, लेकिन यूपी पुलिस के बार में धारणा खराब है। हम कानून-व्यवस्था को और बेहतर करना चाहते हैं। इसके लिए पुलिस की बुराइयां दूर करनी होंगी। प्रयास करना होगा कि वे नैतिकता को समझें, संवेदनशील बनें।

बुराई दूर करने के लिए अच्छाई की सराहना जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में बुराई के साथ अच्छाई भी है। डॉ. लोहिया कहते थे कि जब तक बुरे को बुरा नहीं कहोगे, तब तक बुराई खत्म नहीं होगी। बुराई दूर करने के लिए अच्छाई की सराहना जरूरी है।

इसलिए हुआ इनका सम्मान

पांच युवाओं ने बलिया में पकड़ा मगरमच्छ
बलिया के दलछपरा गांव में कोलबाला कुंड में घाघरा नदी से मगरमच्छ आ गया था। इस गहरे कुंड का पानी कभी सूखता नहीं है।

गांव के संजय साहनी, राजकुमार, शिवकुमार, पिंटू और कामाक्षा साहनी ने 14 सितंबर को महाजाल डालकर मगरमच्छ को पकड़ लिया और वन विभाग की टीम को सौंप दिया। बाद में उसे नदी में छोड़ दिया गया। मुख्यमंत्री ने पांचों युवाओं को एक-एक लाख रुपये की मदद दी।

रामजीत ने डूबती नाव से बचाए बच्चे

CM Akhilesh Yadav to work for poor people.

मिर्जापुर के दलापट्टी गांव के रामजीत यादव ने 15 सितंबर को गंगा नदी में नाव हादसे में कई बच्चों को बचाया था। रामजीत ने कहा, नाव में पानी भरने लगा तो बच्चे उनसे लिपट गए।

उन्हें लगा कि अपनी जान बचाकर यदि बच्चों को डूबने दिया तो उनके मां-बाप धिक्कारेंगे। वे भी खुद को माफ नहीं कर पाएंगे। उन्होंने जान की बाजी लगाकर बच्चों को बचाया। मुख्यमंत्री ने उन्हें पांच लाख रुपये की मदद देकर सम्मानित किया।

पढ़ाई के साथ वेइंग मशीन से आजीविका चला रहा हरेंद्र

मूलतया इटावा जिले के नंगला चौहान के रहने वाले हरेंद्र सिंह चौहान के माता-पिता नोएडा में रहते हैं। हरेंद्र ने गढ़ी चौखंडी स्थित श्रीकृष्ण इंटर कॉलेज में नौ कक्षा में दाखिला ले रखा है। पिता बेरोजगार हैं, इसलिए हरेंद्र ने पढ़ाई जारी रखते हुए सिटी सेंटर में पार्ट टाइम वेइंग मशीन लेकर बैठ गया।

कुछ लोग वजन कराने के लिए आते थे। इससे 50-100 रुपये की आमदनी हो जाती थी। सोशल मीडिया में मामला छाने के बाद उसे सम्मानित करने का फैसला किया गया। अपने पिता रामगोपाल सिंह के साथ आए हरेंद्र को मुख्यमंत्री ने पांच लाख रुपये दिए।

सबसे कम उम्र में पीएचडी कर रही सुषमा

CM Akhilesh Yadav to work for poor people.

बरिगवां, कानपुर रोड निवासी सुषमा वर्मा ने महज 7 साल की उम्र में हाईस्कूल और 9 साल की उम्र में इंटर करने के बाद जूलॉजी, बॉटनी और केमिस्ट्री के साथ 13 साल की उम्र में बीएससी पास किया। इसके बाद बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी से एमएससी (माइक्रोबायोलॉजी) करने के बाद वह यहीं से माइक्रोबायोलॉजी में पीएचडी कर रही है।

वह पीएचडी करने वाली सबसे कम उम्र की छात्रा हैं। पिता तेजबहादुर वर्मा और तीन साल की बहन अनन्या के साथ आई 15 साल की सुषमा को मुख्यमंत्री ने पांच लाख रुपये की सहायता राशि दी।

पुलिस उत्पीड़न के शिकार हुए थे टाइपिस्ट किशन कुमार
राजधानी में जीपीओ के पास फुटपाथ पर टाइपराइटर से रोजी-रोटी चलाने वाले किशन कुमार एक दरोगा की बदसुलूकी और उत्पीड़न के शिकार हुए थे।

उनसे दुर्व्यवहार और टाइपराइटर को लात मारकर तोड़ती हुई फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री ने डीएम और एसएसपी को नया टाइपराइटर लेकर उनके घर भेजने के साथ ही उन्हें एक लाख रुपये की मदद करने का ऐलान किया था। सीएम ने रविवार को किशन कुमार को एक लाख रुपये का चेक दिया।

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