{"_id":"faca58cf6e7eee7e24f91d384f9069a9","slug":"clothes-industry-get-closed","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी में कपड़ा उद्योग की हालत खस्ता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी में कपड़ा उद्योग की हालत खस्ता
अभिषेक यादव/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 04 Jan 2014 08:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश में बंद कपड़ा मिलों की संख्या में पिछले दशक के दौरान सालाना करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे करीब 10 हजार से अधिक नौकरियों का नुकसान हुआ है।
विज्ञापन
अकेले 2010-11 में प्रदेश में 11,400 रोजगार कम पैदा हुए, जबकि 2000-01 में 2,300 नौकरियों का नुकसान हुआ था।
एसोसिएशन ऑफ चैंबर ऑफ कॉमर्स ने टैक्स्टाइल सेक्टर की राज्यवार मूल्यांकन रिपोर्ट में खुलासा हुआ है।
यह अध्ययन वर्ष 2001 से 2010 के हालात पर किया गया है। शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में बंद होती कपड़ा मिलों के लिहाज से उत्तर प्रदेश को देश के 5 सबसे खराब राज्यों में गिना गया है।
विज्ञापन
एसोचैम के अनुसार प्रदेश में कपड़ा मिलों की सामूहिक सालाना वृद्धि दर (कंपाउंड एन्युअल ग्रोथ रेट - सीएजीआर) 17 प्रतिशत रही है। बीते 10 सालों में इनकी संख्या 586 से बढ़कर 809 पहुंच गयी।
विज्ञापन
दशक भर पहले जहां 30 मिलें बंद थीं 2010 आते-आते इनकी संख्या बढ़कर 182 हो गई। यही नहीं जहां 556 मिलों से जहां 44,200 लोगों को रोजगार मिल रहा था, वह 39,400 रह गया है।
एसोचैम के राष्ट्रीय महासचिव डीएस रावत केअनुसार इससे राज्य को नौकरियों का नुकसान उठाना पड़ा है। निवेश और उत्पादकता का अनुपात भी 1.3 से घटकर 1.1 रह गया।
यह बताता है कि कपड़ा मिलों के लिए लाभ इस कदर घटा है कि फैक्ट्रियों को बंद होने की स्थिति में पहुंचा दिया।
इसलिए बंद हुई फैक्ट्रियां
रिपोर्ट के मुताबिक कम उत्पादकता, आधुनिक तकनीक की कमी, विदेशी निवेश की कमी, सप्लाई चेन में मंदी, मजदूरों की समस्याएं, उद्योग का बंटना और कमजोर ब्रांडिंग इसकी प्रमुख वजह है।
हो सकता है सुधार
अगर तकनीक और स्किल बढ़ाने पर काम किया जाए, विदेशी निवेश को बढ़ाया जाए, अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स से साझेदारी और लचीली मजदूरी नीति बनाई जाए तो कपड़ा मिलों को संकट से उबारा जा सकता है।
देश के स्तर पर पिछड़ा यूपी
भारत के कपड़ा उद्योग उद्योग में प्रदेश का योगदान 5.28 प्रतिशत से घटकर 4.94 प्रतिशत रह गया। कपड़ा मिलों से जहां देश का 4 प्रतिशत रोजगार यूपी पैदा कर रहा था वह घटकर 3 प्रतिशत रह गया
निवेश 2,500 करोड़ से बढ़कर 6,700 करोड़ हुआ यानी 168 प्रतिशत वृद्धि, लेकिन उत्पादन 3,200 से बढ़कर ही 7,700 ही हुआ जो 140 प्रतिशत है।
देश की मिलों के हालात
14 लाख नौकरियां देती है और जीडीपी में 4 प्रतिशत योगदान भी। औद्योगिक उत्पादन में 14 प्रतिशत उत्पादन, देश के निर्यात में 10.1 प्रतिशत योगदान। बंद मिलों की संख्या 6 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हुईं।
गुजरात में सबसे ज्यादा मिलें बंद
देश की 54 प्रतिशत बंद कपड़ा मिलें बंद तमिलनाडु में हैं। इसके बाद गुजरात (16 प्रतिशत), महाराष्ट्र (10 प्रतिशत), पंजाब (4 प्रतिशत) और यूपी (3 प्रतिशत) का नंबर आता है।
इससे तमिलनाडु में इससे 2 लाख नौकरियों का नुकसान हुआ तो गुजरात में 1 लाख। वहीं बिगड़ती स्थितियों में गुजरात सबसे आगे रहा जहां सर्वाधिक कपड़ा मिलें बंद हैं।
2001 में यहां 290 मिलें बंद थीं जो 2010 में 2,800 पर पहुंच गईं। इसकेबाद पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु का नंबर आता है।