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अपहरण के छह साल बाद कब्र से मिले अगवा युवक के कपड़े-बेल्ट, कातिलों पर सख्त कार्रवाई की मांग
Tue, 21 May 2019 04:30 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 21 May 2019 04:30 PM IST
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लालजी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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सीबीसीआईडी की टीम ने सोमवार को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में लखनऊ के चिनहट क्षेत्र में कब्र खोदवा कर छह साल पहले अगवा युवक के कपड़े व बेल्ट बरामद की है। अपहृत युवक की तलाश में पुलिस की लापरवाही पर परिवारीजनों के प्रदर्शन व शिकायतों पर विवेचना सीबीसीआईडी को सौंपी गई थी।
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चिनहट के तिवारीगंज निवासी लालजी रावत के 2 जनवरी 2013 को अपहरण की विवेचना कर रहे सीबीसीआईडी के सेक्टर अफसर डॉ. कृष्ण गोपाल ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में इंदिरा नहर के माइनर इमली बांध बाबा के पास जेसीबी से खोदाई शुरू कराई।
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पांच फीट गहरा गड्ढा खोदने पर लालजी के कपड़े, स्वेटर, बेल्ट आदि बरामद हुई। उसे सील करके चिनहट कोतवाली के मालखाना में सुरक्षित रखा गया। कपड़े व बेल्ट की पहचान करने के साथ परिवारीजन रोने लगे। उन्होंने कातिलों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
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सीबीसीआईडी को सौंपी गई थी विवेचना
मालूम हो कि 25 वर्षीय लालजी दो जनवरी 2013 को मजदूरी करके लौटा और उसके बाद लापता हो गया। पुलिस ने कई दिन टालमटोल के बाद गुमशुदगी दर्ज की। लालजी की तलाश में भटक रहे भाई राकेश कुमार रावत ने गांव के ही गुड्डू सिंह, दीपू, छंगा व चंदन पर अपहरण का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
पुलिस की टालमटोल पर परिवार ने प्रदर्शन किया। शासन, मानवाधिकार आयोग व पुलिस उच्चाधिकारियों से कार्रवाई मांग की। लालजी का कुछ पता न चलने पर हत्या का अंदेशा जताया। इस पर अपहरण व दलित उत्पीड़न की प्राथमिकी दर्ज करके तफ्तीश गोमतीनगर के तत्कालीन क्षेत्राधिकारी विद्यासागर मिश्र को सौंपी गई।
राकेश का आरोप है कि विवेचक ने अपहृत की तलाश के बजाय उसे ही जेल भेजने की धमकी देकर भगा दिया। परिवार के लंबे संघर्ष के बाद विवेचना सीबीसीआईडी को सौंपी गई थी।
पुलिस की टालमटोल पर परिवार ने प्रदर्शन किया। शासन, मानवाधिकार आयोग व पुलिस उच्चाधिकारियों से कार्रवाई मांग की। लालजी का कुछ पता न चलने पर हत्या का अंदेशा जताया। इस पर अपहरण व दलित उत्पीड़न की प्राथमिकी दर्ज करके तफ्तीश गोमतीनगर के तत्कालीन क्षेत्राधिकारी विद्यासागर मिश्र को सौंपी गई।
राकेश का आरोप है कि विवेचक ने अपहृत की तलाश के बजाय उसे ही जेल भेजने की धमकी देकर भगा दिया। परिवार के लंबे संघर्ष के बाद विवेचना सीबीसीआईडी को सौंपी गई थी।