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Lucknow News: चुटकी भंडार गर्ल्स कॉलेज की जर्जर बिल्डिंग में अब नहीं होगी पढ़ाई
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हाईकोर्ट लखनऊ।
लखनऊ। राजधानी के हुसैनगंज स्थित चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कॉलेज की जर्जर बिल्डिंग में अब पढ़ाई या कोई भी शिक्षण कार्य नहीं होगा। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार पांडेय को निर्देश दिया कि सप्ताह भर में कालेज में पढ़ाई या कोई भी शैक्षणिक कार्य न होना सुनिश्चित करें।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने डीआईओएस को स्पष्ट रूप से आदेश दिया है कि जिस भवन में चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कॉलेज संचालित हो रहा है, उसकी अत्यंत जर्जर स्थिति को देखते हुए, समस्त शैक्षणिक कार्यों को बंद करके सभी विद्यार्थियों को निकटवर्ती विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाए। कोर्ट ने यह आदेश विजय कुमार पांडेय की जनहित याचिका पर दिया। इसमें, कॉलेज की दयनीय स्थिति और छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया था।
अदालत ने कहा कि मामले में पहले डीआईओएस तथा लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं से काॅलेज भवन का निरीक्षण कराए जाने का निर्देश दिया गया था। इसकी निरीक्षण रिपोर्ट 28 अप्रैल को पेश की गई है। इसके अनुसार विद्यालय भवन की अधिकांश दीवारों में “शीयर फेल्योर क्रैक” तथा “स्ट्रक्चरल फेल्योर” के स्पष्ट संकेत पाए गए हैं। भवन की छत प्रबलित ईंटों (री इंफोर्स्ड ब्रिक) से निर्मित है तथा उक्त संरचना की मरम्मत की कोई संभावना नहीं है।
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ऐसे में संपूर्ण भवन को असुरक्षित घोषित किया गया है। ऐसी असुरक्षित संरचना में कक्षाओं का संचालन भी अनुमति योग्य नहीं है। कोर्ट ने आदेश में कॉलेज में काम कर रही सभी शिक्षकों, चतुर्थ श्रेणी व तृतीय श्रेणी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी एक सप्ताह के अंदर आसपास के स्कूलों में समायोजित करने के निर्देश दिए हैं। यह भी निर्देश दिया कि 15 मई से अगले सात दिनों की अवधि समाप्त होने के पश्चात इस संस्था के शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सेवा की निरंतरता तथा उन्हें प्राप्त होने वाले अन्य समस्त सेवा संबंधी लाभों को जिला विद्यालय निरीक्षक अथवा इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा।
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न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने डीआईओएस को स्पष्ट रूप से आदेश दिया है कि जिस भवन में चुटकी भंडार गर्ल्स इंटर कॉलेज संचालित हो रहा है, उसकी अत्यंत जर्जर स्थिति को देखते हुए, समस्त शैक्षणिक कार्यों को बंद करके सभी विद्यार्थियों को निकटवर्ती विद्यालयों में स्थानांतरित किया जाए। कोर्ट ने यह आदेश विजय कुमार पांडेय की जनहित याचिका पर दिया। इसमें, कॉलेज की दयनीय स्थिति और छात्राओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया था।
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अदालत ने कहा कि मामले में पहले डीआईओएस तथा लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं से काॅलेज भवन का निरीक्षण कराए जाने का निर्देश दिया गया था। इसकी निरीक्षण रिपोर्ट 28 अप्रैल को पेश की गई है। इसके अनुसार विद्यालय भवन की अधिकांश दीवारों में “शीयर फेल्योर क्रैक” तथा “स्ट्रक्चरल फेल्योर” के स्पष्ट संकेत पाए गए हैं। भवन की छत प्रबलित ईंटों (री इंफोर्स्ड ब्रिक) से निर्मित है तथा उक्त संरचना की मरम्मत की कोई संभावना नहीं है।
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ऐसे में संपूर्ण भवन को असुरक्षित घोषित किया गया है। ऐसी असुरक्षित संरचना में कक्षाओं का संचालन भी अनुमति योग्य नहीं है। कोर्ट ने आदेश में कॉलेज में काम कर रही सभी शिक्षकों, चतुर्थ श्रेणी व तृतीय श्रेणी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी एक सप्ताह के अंदर आसपास के स्कूलों में समायोजित करने के निर्देश दिए हैं। यह भी निर्देश दिया कि 15 मई से अगले सात दिनों की अवधि समाप्त होने के पश्चात इस संस्था के शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की सेवा की निरंतरता तथा उन्हें प्राप्त होने वाले अन्य समस्त सेवा संबंधी लाभों को जिला विद्यालय निरीक्षक अथवा इस संबंध में सक्षम प्राधिकारी द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा।