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लविवि: रोहित वेमुला की पुण्यतिथि मनाने को लेकर छात्र संगठन आमने-सामने, एलयू में लगे जय श्रीराम के नारे

Tue, 17 Jan 2023 09:45 PM IST
ishwar ashish माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 17 Jan 2023 09:45 PM IST
सार

लखनऊ विश्वविद्यालय में रोहित वेमुला की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित करने जा रहे छात्रों का विरोध करने पर जमकर हंगामा हुआ। एबीवीपी और वामपंथी छात्र संगठन आमने-सामने आ गए।

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Clash between students organisations over Rohit Vemula death anniversary in Lucknow University.
विश्वविद्यालय में पुलिस बल मौजूद है। - फोटो : amar ujala

विस्तार

लखनऊ विश्वविद्यालय में मंगलवार को हैदराबाद विवि के छात्र रहे रोहित वेमुला की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम को लेकर छात्र संगठन भिड़ गए। ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन  (आइसा) की ओर से आयोजित कार्यक्रम का एनएसयूआई, समाजवादी छात्र सभा व बाप्सा ने समर्थन किया तो जातिवादी राजनीति व नारेबाजी का आरोप लगाते हुए एबीवीपी व आम छात्रों ने विरोध जताया। दोनों पक्ष के छात्र कई बार आमने-सामने आए और इनमें मारपीट व पुलिस से धक्कामुक्की हुई। दो घंटे से ज्यादा समय तक चले बवाल के बाद पुलिस ने अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद मामला सुलझाया।

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पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार आइसा ने रोहित वेमुला की पुण्यतिथि पर सेंट्रल लाइब्रेरी के सामने टैगोर लॉन में परिचर्चा का आयोजन किया था। इसका विषय ‘शिक्षण संस्थानों में सामाजिक भेदभाव, हिंसा और राजनीतिक विच-हंट’ था। हालांकि, विवि प्रशासन से इसकी अनुमति न होने से सुबह 11 बजे से पुलिस का कड़ा पहरा था। इस दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) व इनके समर्थक छात्र लॉन के आस-पास जय श्रीराम... के नारे लगा रहे थे। दोपहर एक बजे गेट नंबर पांच से आइसा, नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई), सछास, बिरसा अम्बेडकर फुले स्टूडेंट एसोसिएशन (बाप्सा) के छात्र रोहित वेमुला के पोस्टर-बैनर लेकर आ गए।
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जुलॉजी विभाग के सामने इन्हें प्रॉक्टोरियल बोर्ड व पुलिस प्रशासन ने रोका। इस बीच एबीवीपी व दूसरे छात्र भी आ गए और दोनों ओर से नारेबाजी शुरू हो गई। प्रशासन ने दोनों पक्षों को थोड़ी दूर पर रोका, लेकिन फिर नारेबाजी, नोकझोंक बढ़ने लगी। इस बीच कुछ छात्र आपस में भिड़ गए और आइसा के कार्यकर्ता को थप्पड़ मार दिया। मामला किसी तरह संभाला गया। एसीपी महानगर जया शांडिल्य फोर्स के साथ पहुंचीं, लेकिन दोनों पक्षों में नोकझोंक और पुलिस से धक्कामुक्की चलती रही। इसी बीच फिर एक छात्र आइसा-एनएसयूआई कार्यकर्ताओं के बीच घुसा और पोस्टर लेकर भाग गया। इस दौरान छात्राओं पर पानी भी फेंका गया।
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एडीसीपी मध्य राजेश श्रीवास्तव ने छात्रों को समझाने की कोशिश की, पर सफल नहीं हुए। थोड़ी देर बाद एक छात्र सछास का झंडा और बैनर छीनकर भागा, जिसे बाद में फाड़ दिया गया। इसे लेकर छात्रों के गुट एक बार फिर आमने-सामने हो गए और मारपीट होने लगी। एनएसयूआई के विशाल सिंह को दूसरे पक्ष के लोग खींचकर ले गए। हाथापाई व धक्कामुक्की में विशाल, आइसा के निखिल के साथ पुलिसवालों को भी चोटें आईं।

डेढ़ घंटे प्रदर्शन के बाद छात्र यहां से हटे, लेकिन फिर अंबेडकर प्रतिमा पर मार्ल्यापण को लेकर आमने-सामने आ गए। पुलिस ने दोनों पक्षाें को अलग-अलग मार्ल्यापण कराकर हटाया। इस दौरान दोनों संगठनों ने एक-दूसरे पर जातिवादी राजनीति करने और लोकतंत्र की हत्या व उसके नाम पर अराजकता करने का आरोप लगाया। आइसा के राज्य सचिव शिवम सफीर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि एबीवीपी ने मारपीट व गुंडागर्दी की है। कई कार्यकर्ताओं को चोटें आई हैं।

नहीं मिली अनुमति तो बदला कार्यक्रम
आइसा के पुण्यतिथि कार्यक्रम को अनुमति नहीं मिली तो छात्र संगठनों ने कार्यक्रम में बदलाव किया। कई संगठन मार्च निकालकर मालवीय भवन के सामने स्थित अंबेडकर प्रतिमा पर मार्ल्यापण कर सभा करने जा रहे थे। आइसा के जिला उपाध्यक्ष निखिल ने कहा, हमें शांतिपूर्ण मार्च निकालने पर भी रोका गया, धक्कामुक्की और मारपीट की गई। जातिसूचक गाली दी गई। इस दौरान प्रॉक्टोरियल बोर्ड मूकदर्शक बना रहा। बाबा साहेब के लिए लाई गई माला भी छीन ली गई।

आइसा के आयोजन को अनुमति नहीं दी गई थी। वे अंबेडकर प्रतिमा पर माल्यार्पण करने जा रहे थे। एबीवीपी के लोग भी मार्ल्यापण करना चाह रहे थे। रास्ते को लेकर दोनों पक्षों में विवाद था, जिसे सुलझाकर माल्यार्पण करा दिया गया। मौखिक समझौता हुआ है। कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाएगी और संवाद किया जाएगा।
- राजेश श्रीवास्तव, एडीसीपी मध्य

कार्यक्रम की अनुमति न मिलने पर भी आइसा ने गेट नंबर पांच से छात्र संगठनों के साथ आकर प्रदर्शन किया। इसी समय कुछ अन्य छात्र संगठन भी आ गए। प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने संयम से बीच-बचाव किया। दोनों पक्षों को हटाया और अंबेडकर प्रतिमा पर मार्ल्यापण के बाद दोनों संगठन गए। कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। कैंपस में अनुमति लेकर कार्यक्रम करने का नियम है।
- प्रो. राकेश द्विवेदी, चीफ प्रॉक्टर, लविवि

लापरवाही ने दी चिंगारी को हवा

लविवि में रोहित वेमुला की पुण्यतिथि पर आयोजन की जानकारी पुलिस व विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले से थी। बावजूद इसके एहतियाती कदम नहीं उठाए गए जिससे परिसर में दो घंटे तक हंगामा चला। विवि और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी काफी देर बाद मौके पर पहुंचे।

आइसा की ओर से आयोजित कार्यक्रम को लेकर प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम तो सुबह 11 बजे से टैगोर पार्क पर जमा थी। दोपहर एक बजे एबीवीपी व आइसा के समर्थक छात्र जुलॉजी विभाग के पास आमने-सामने हो गए। थोड़ी देर में नारेबाजी तेज हुई और स्थिति मारपीट तक पहुंच गई। प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम ने स्थिति संभाली। इसके बाद दोनों संगठन थोड़ी दूरी पर जमीन पर बैठकर प्रदर्शन और नारेबाजी करने लगे। अगर इसी समय इन दोनों संगठनों के छात्रों को वहां से हटा दिया जाता तो मारपीट और बवाल बढ़ने से रोका जा सकता था। किंतु विवि और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं थे।

प्रॉक्टोरियल बोर्ड का नेतृत्व असिस्टेंट प्रॉक्टर डॉ. ओपी शुक्ला कर रहे थे। उनके समझाने पर भी छात्र नहीं माने और बार-बार भिड़ंत की स्थिति बन रही थी। दोपहर करीब एक बजे शुरू हुए प्रदर्शन के बाद लगभग डेढ़ बजे एसीपी महानगर जया शांडिल्य पुलिस फोर्स के साथ वहां पहुंचीं। लेकिन मामला शांत नहीं हुआ। दोपहर लगभग दो बजे चीफ प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी और थोड़ी देर बाद एडीसीपी मध्य राजेश श्रीवास्तव अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पहुंचे। उन्होंने काफी जद्दोजहद के बाद दोनों पक्षों को अलग-अलग रास्तों पर भेजकर शांत कराया। विवि व पुलिस प्रशासन ने यह रणनीति अगर पहले अपनाई होती तो मामला इतना न बढ़ता। प्रो. द्विवेदी ने कहा कि पुलिस प्रशासन को दो दिन पहले ही इस आयोजन की सूचना भेज दी गई थी।

सही सूचना न देने पर एलआईयू सीओ भड़के
मामला इतना बढ़ जाएगा, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। यही वजह रही कि एलआईयू भी अपने आला अधिकारियों को समय से जानकारी नहीं दे सका। लगभग सवा दो बजे पहुंचे सीओ एलआईयू अवधेश चौधरी ने अपने सहयोगियों से इस पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बवाल इतना बड़ा है और आप लोग सूचित नहीं कर रहे हैं।

बल प्रयोग करने से पुलिस का इनकार
बढ़ता देख लगभग पौने दो बजे प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीम ने वहां उपस्थित एसीपी महानगर जया शांडिल्य से बल प्रयोग कर छात्रों को हटाने की बात कही लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पहले कुलपति या विवि के आला अधिकारी की अनुमति मिले, इसके बाद ही बल प्रयोग किया जाएगा। इस पर हल्की नोकझोंक हुई और फिर एसीपी ने कहा कि भले ही छात्र महीनों यहां बैठे रहें, पीएसी तैनात रहेगी लेकिन हम बल प्रयोग नहीं करेंगे।

आम छात्र भी पूरे समय तक डटे रहे
इस दौरान टैगोर लॉन से लेकर नहर के पुल तक भारी संख्या में अन्य छात्र-छात्राएं भी डटे रहे और बीच-बीच में हूटिंग भी कर रहे थे। जब मामला बढ़ता तो वहां से भागने की कोशिश करते और फिर लौटकर आ जाते थे। अंत में पुलिस ने उन्हें भी वहां से हटाया।

प्रॉक्टर गो बैक के नारे भी लगाए
आयोजन को लेकर अनुमति न मिलने व नोटिस जारी करने को लेकर वाम संगठनों के निशाने पर प्रॉक्टर प्रो. राकेश द्विवेदी पहले से हैं। यही वजह रही कि वे शुरुआत में यहां नहीं पहुंचे। दो बार मारपीट के बाद जब वे पहुंचे तो वाम संगठनों ने प्रॉक्टर गो बैक के नारे लगाए। इसे लेकर जब नोकझोंक बढ़ी तो वे लौट गए। दोबारा फिर आए और पुलिस के साथ उन्होंने छात्रों से वार्ता की और दोनों पक्षों को शांत कराया।

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