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Lucknow News: मधुमेह से पीड़ित गर्भवतियों के होने वाले बच्चों में हृदय रोग का खतरा अधिक

Fri, 14 Nov 2025 02:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ Updated Fri, 14 Nov 2025 02:30 AM IST
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Children born to pregnant women with diabetes have a higher risk of heart disease
लखनऊ। शारीरिक गतिविधियों की कमी और अत्यधिक चीनी व फास्ट फूड के सेवन से जेस्टेशनल डायबिटीज मेलिटस (जीडीएम) यानी गर्भावधि मधुमेह के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। 30 वर्ष से अधिक उम्र और अधिक वजन वाली गर्भवतियों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, जीडीएम से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के होने वाले बच्चों में हृदय रोग व अन्य दीर्घकालिक बीमारियों का खतरा अधिक रहता है।
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किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग की प्रो. (डॉ.) सुजाता देव ने बताया कि देश में 16 से 20 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं जीडीएम से पीड़ित हैं। यह रोग मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। जीडीएम के कारण प्रसव समय पूर्व हो सकता है। इससे जटिलताएं बढ़ जाती हैं। मां के शरीर में मौजूद अतिरिक्त ग्लूकोज प्लेसेंटा के माध्यम से शिशु तक पहुंचता है। इस कारण बच्चा सामान्य से बड़ा (चार किलो से अधिक) हो जाता है। ऐसे शिशुओं में सांस लेने में कठिनाई (एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम) का खतरा अधिक होता है।
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गर्भावस्था के 24 से 28 सप्ताह में जांच जरूरी

डॉ. सुजाता ने बताया कि जीडीएम के लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते। प्यास बढ़ना, बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक भूख लगना इसके संकेत हो सकते हैं। हर गर्भवती को गर्भावस्था के 24 से 28 सप्ताह के बीच मधुमेह की जांच करानी चाहिए ताकि समय पर पहचान और इलाज संभव हो सके।
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शिशुओं में दीर्घकालिक बीमारियों का बढ़ता जोखिम
गर्भावधि मधुमेह से जन्मे बच्चों में नवजात हाइपोग्लाइसीमिया (रक्त में ग्लूकोज की अत्यधिक कमी), बचपन में मोटापा, किशोरावस्था या वयस्क अवस्था में मधुमेह और मेटाबोलिक सिंड्रोम जैसी समस्याओं का खतरा रहता है। इसके चलते हृदय रोग, स्ट्रोक और टाइप-2 मधुमेह का जोखिम बढ़ जाता है।


ऐसे करें बचाव

विशेषज्ञों ने सलाह दी कि गर्भवती महिलाओं को वजन नियंत्रित रखना चाहिए, नियमित शारीरिक गतिविधियां करनी चाहिए और खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। अधिक चीनी, जंक फूड और फास्ट फूड से परहेज करें। बार-बार मूत्र या योनि संक्रमण होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
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