ध्यान दें अभिभावक: साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं आपके बच्चे, आत्महत्या के लिए उकसाया जा रहा
ऑनलाइन सुविधाओं से जितना जीवन आसान होता जा रहा है, उतनी ही चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। खासकर बच्चों के लिए नए खतरे पैदा हो रहे हैं। इंटरनेट की दुनिया में साइबर अपराधी घात लगाए हैं और मौके का भी फायदा उठाकर बच्चों को राह से भटका रहे हैं।
साइबर ब्लैकमेलिंग के साथ बीते दस दिनों में 181 वन स्टॉप सेंटर पहुंचे दो मामले चौंकाने वाले हैं। इसमें साइबर अपराधियों के चंगुल में फंसे बच्चे घर छोड़कर जाने के साथ आत्महत्या की कोशिश तक कर चुके हैं। वहीं, चाइल्ड लाइन के पास आने वाली शिकायतों में ऑनलाइन गेमिंग के फेर में घर छोड़ने वाले बच्चों के छह मामले दो महीने में दर्ज हुए हैं।
घर से भागकर दिल्ली पहुंच गई बिटिया
प्रतिष्ठित स्कूल में 10वीं की छात्रा की एक सप्ताह से 181 वन स्टाप सेंटर में काउंसिलिंग चल रही है। माता-पिता ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई करते-करते वह गेम खेलने लगी। इस दौरान चैट रूम में तीन लड़कों के संपर्क में आई।
इनमें से एक रेलवे कर्मचारी था, दूसरा पढ़ाई करता था और तीसरा बच्चा था। धीरे-धीरे बातें ज्यादा हुईं, जो ब्लैकमेलिंग तक पहुंची और फिर न्यूड फोटो शेयर करवाने लगे। बहकावे में आकर लड़की दिल्ली पहुंच गई, हालांकि माता-पिता उसे वापस ले आए। लड़की का तनाव दूर करने की कोशिश चल रही है।
बच्ची ने की आत्महत्या की कोशिश
कक्षा नौ में पढ़ने वाली 12 वर्ष की छात्रा ऑनलाइन चेस खेलने के शौक में राह से भटक गई। ऑनलाइन पढ़ाई के बीच उसका वक्त ऑनलाइन गेम में बीतता। एक दिन उसने नस काट ली, तब पता चला की वह साइबर ब्लैकमेलिंग का शिकार हो गई है। माता-पिता बदनामी और कॅरिअर के डर से रिपोर्ट दर्ज कराने से बचे। फिलहाल मामला 181 वन स्टॉप सेंटर के पास है। बच्ची को अवसाद से निकालने का प्रयास जारी है।
मुरादाबाद से लखनऊ आ गया नौकरशाह का बेटा
चाइल्ड लाइन के आंकड़े बताते हैं कि ऑनलाइन पढ़ाई से पैदा हुई बोरियत दूर करने की कोशिश में बच्चे अपराध का शिकार हो रहे हैं। हाल ही में कक्षा नौ का छात्र मुरादाबाद से भाग कर लखनऊ पहुंचा। वह एक ब्यूरोक्रेट का बेटा है। पिछले दो महीने में ऐसे करीब छह मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें ऑनलाइन गेम खेलने से रोकने पर बच्चों ने घर छोड़ दिया।
माता-पिता को देना होगा ज्यादा ध्यान
181 वन स्टॉप सेंटर की प्रशासनिक अधिकारी अर्चना सिंह का कहना है कि दो माह में साइबर ब्लैकमेलिंग के 10 मामले हमारे पास आए हैं। हालांकि, दोनों बच्चियों के मामले ज्यादा चौंकाने वाले हैं। ऑनलाइन सिस्टम आज की जरूरत है, पर ये बच्चों को अपराध की ओर ले जा रहा है। इस पर माता-पिता को बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
तलाशना होगा बीच का समाधान
बाल कल्याण समिति की सदस्य डॉ. संगीता शर्मा का कहना है कि यह समस्या आज हर अभिभावक की है। माता-पिता कहते हैं कि हर वक्त नजर रखना कैसे संभव है। यह चुनौतीपूर्ण है, लेकिन बीच का समाधान ढूंढना होगा, क्योंकि बच्चों का भविष्य दांव पर है।