विदेशी मरीजों की खास पसंद बना लखनऊ, मिल रहा सस्ता व बेहतर इलाज
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राजधानी लखनऊ के चिकित्सा संस्थान देश-विदेश के मरीजों को बेहतर इलाज देकर दुनिया भर में अपना नाम बुलंदियों पर पहुंचा रहे हैं। यहां उत्तर प्रदेश के साथ-साथ नार्थ ईस्ट ही नहीं गल्फ कंट्री व साउथ ईस्ट एशिया के देशों के मरीज इलाज कराने आ रहे हैं। आलम ये है कि 110 वर्षों से अधिक पुराने केजीएमयू और 27 साल पुराने एसजीपीजीआई के चिकित्सकों ने अफगानिस्तान, यूएसए, सऊदी अरब, थाइलैंड के मरीजों को पूर्ण स्वस्थ कर यहां से रवाना कर रहे हैं।
देखें- ये मामले
केस-1
केजीएमयू के चिकित्सकों की टीम ने सिक्किम से आई एक महिला को जीभ के कैंसर से निजात दिला दी। एक पखवाड़े पहले 60 साल की इस महिला को भर्ती किया गया था।
ओरल एंड मेक्सिलोफेशियन सर्जरी विभाग के प्रो.हरी राम, ईएनटी के विभागाध्यक्ष प्रो.एसपी अग्रवाल व प्लास्टिक सर्जन व चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विजय कुमार की टीम ने 11.30 घंटे तक चली सर्जरी के दौरान उसकी कैंसरग्रस्त 70 फीसदी जीभ को सर्जरी कर निकाल दिया। साथ ही हाथ की स्किन से उसकी नई जीभ भी बना दी। इस सर्जरी के बाद महिला को बोलने में दिक्कत नहीं होगी।
ये दो मामले भी देखें
केस-2
सऊदी अरब के हबीब अल रशीद को पीजीआई के सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के डॉ. अशोक कुमार और उनकी टीम ने गंभीर बीमारी से निजात दिला दी। फीकल इंकॉन्टिनेंस नाम की बीमारी के इलाज के लिए वह यूएसए के चिकित्सकों से भी संपर्क कर चुकेथे लेकिन उन्हें पीजीआई आकर राहत मिली।
हबीब के इलाज ने एक बार फिर राजधानी में मेडिकल टूरिज्म के अवसर को हवा दे दी है। सिर्फ सऊदी अरब ही नहीं पीजीआई में इलाज कराने के लिए अफगानिस्तान, थाइलैंड, नेपाल से भी मरीज आ रहे हैं। इनको पीजीआई के विशेषज्ञों की काबलियत ही लायी है। अपने हुनर के कारण मरीजों ने इंटरनेट पर इन विशेषज्ञों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने अपना इलाज कराया।
केस-3
किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ.एसएन कुरील ने आंध्र प्रदेश के साढ़े चार साल के बच्चे को जन्मजात विकृति से निजात दिला दी। बच्चा पेशाब की थैली की विकृति से पीड़ित था। जिससे उसे लगातार पेशाब का रिसाव होता रहता था।
आंध्र प्रदेश के चिकित्सकों ने उसके दो ऑपरेशन किए लेकिन उन्हें विकृति को दूर करने में सफलता नहीं मिली। इसके बाद चेन्नई के एक अस्पताल से उन्हें केजीएमयू आने की सलाह दी गई। जहां सर्जरी के बाद बच्चे को जन्मजात विकृति से निजात मिल गई।
इन्टरनेट से जानकारी जुटा कर आ रहे हैं इलाज के लिए
एसजीपीजीआई और केजीएमयू जैसे चिकित्सा संस्थानों के बारे में इंटरनेट पर जानकारी जुटाकर काफी मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इन संस्थानों में बेहतर इलाज के साथ अन्य देशों के मुकाबले इलाज का खर्च भी काफी कम है।
केजीएमयू के आर्थोपैडिक सर्जन व पीडियाट्रिक आर्थोपैडिक विभाग के हेड प्रो. अजय सिंह ने एवस्कुलर नेक्रोसिस (एवीएन) से इस थॉमस कुट्टी नाम के मरीज का स्टेम सेल से इलाज किया था। अहमदाबाद निवासी 36 वर्षीय मरीज थामस कुट्टी एक-डेढ़ साल तक कूल्हे के इलाज के लिए भटक चुके थे लेकिन उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद वो इंटरनेट पर इलाज के लिए सर्च कर रहे थे। अचानक उन्हें कूल्हे जाम होने की बीमारी से संबंधित एक जानकारी इंटरनेट पर मिल गई।
केजीएमयू और प्रो.अजय सिंह का नाम देखकर उन्होंने वेबसाइट से उनका ई-मेल आईडी जुटाया। बीमारी से सबंधित जानकारी थॉमस कुट्टी ने प्रो. अजय सिंह को ई-मेल से दी। उनकी रिपोर्ट्स देखने के बाद कुछ माह पहले थॉमस कुट्टी का स्टेम सेल ट्रांसप्लांट कर दिया गया।
इसी तरह सऊदी अरब के हबीब अल रशीद को पीजीआई के सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के डॉ. अशोक कुमार और उनकी टीम ने गंभीर बीमारी से निजात दिलायी थी। अपने हुनर के कारण मरीजों ने इंटरनेट पर इन विशेषज्ञों के बारे में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने अपना इलाज कराया।
अफगानिस्तान- म्यांमार से भी आए मरीज
म्यांमार का एक मरीज इंटरनेट पर पीजीआई सर्च करने के बाद डॉ. गौरव से संपर्क में आया। इंडोसर्जरी विभाग के प्रो.गौरव अग्रवाल ने 21 वर्षीय यविंथ की हाइपरथायरडिज्म (ग्रेव्स डिजीज) की वजह से थायरायड हारमोन का स्तर बढ़ा था।
इसके कारण गले में सूजन, शरीर के भार में गिरावट, मांसपेशियों में कमजोरी की परेशानी हो रही थी। इसके बाद उन्होंने पीजीआई बुलाकर लेप्रोस्कोपिक तकनीक से यविंथ के बढ़े हुए ग्लैंड को निकाल दिया गया।
इसी तरह सीटीवीएस विभाग के हेड प्रो. निर्मल गुप्ता ने अफगानिस्तान से आयी एक फैमिली के बच्चे की सर्जरी कर उसके दिल की गंभीर बीमारी से निजात दिलायी थी। डेढ़ साल के रहमान के दिल में छेद था। दिल्ली और बंगलुरुमें दिखाने के बाद हाफिज उल्ला वहां पहुंचे थे।
कई देशों की टीमें कर चुकी हैं दौरा
बांग्लादेश की बंगबंधु शेख मुजीब मेडिकल यूनिविर्सिटी के विशेषज्ञों की टीम केजीएमयू का दौरा करने आयी थी। इस टीम ने बांग्लादेश में चिकित्सा शिक्षा को उच्चीकृत करने के लिए केजीएमयू का सहयोग मांगा था।
इसके अलावा मेडिकल टूरिज्म पर भी चर्चा की थी क्योंकि यूरोपीय देशों को मुकाबले कम शुल्क में अच्छा इलाज के चलते बांग्लादेश-भारत के बीच नए संबंध बन रहे हैं।
नेपाल में हुई दक्षेस की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बांग्लादेश में चिकित्सा शिक्षा को उच्चीकृत करने के लिए केजीएमयू को नोडल सेंटर बनाया था। क्योंकि बांग्लादेश में सुपर स्पेशलिटी इलाज के लिए मरीजों को यूरोप के देशों में जाना पड़ता है। वहां उनका इलाज में कई गुना अधिक खर्च होता है। जबकि भारत में मात्र एक तिहाई खर्च में विश्वस्तरीय इलाज मिलता है।
इसी तरह पीजीआई से चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण के लिए म्यांमार ने सहयोग मांगा था। वहां के यांगॉन जनरल हॉस्पिटल के सीनियर मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉएच मिंट के नेतृत्व में आयी टीम ने पीजीआई के इंडोक्राइन सर्जरी विभाग के हेड व टेलीमेडिसिन प्रभारी प्रो. एसके मिश्रा के साथ टेलीमेडिसिन सिस्टम की जानकारी ली थी।
मेडिकल टूरिज्म को मिल रहा बढ़ावा
पीजीआई, केजीएमयू, डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थान होने के कारण हर साल कम से कम आधा दर्जन ऐसे आयोजन होते हैं, जिनमें सैकड़ों विशेषज्ञ बाहर से आते हैं। इनके आने से मेडिकल टूरिज्म को भी बढ़ावा मिल रहा है।
कॉन्फ्रेंस में दुनिया भर से आने वाले डॉक्टर विशेषज्ञता के अलावा यहां की नवाबी धरोहरों रूमी गेट, इमामबाड़ा और रेजीडेंसी से भी परिचित हो रहे हैं। इसके अलावा लखनवी चिकन के कपड़े, टुंडे कबाबी उनके आकर्षण का केंद्र बना रहता है।
सेमिनार के अंतिम दिन को लखनऊ दर्शन के रूप में रखा जाता है, जिससे वह इस ऐतिहासिक शहर के बारे में जान सकें। इन चिकित्सा शिक्षा आयोजनों से ट्रेवल, होटल इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलता है।
इस पर एसजीपीजीआई के प्रो. राकेश कपूर का कहना है कि पीजीआई में विदेशों से मरीज लगातार आते रहते हैं। ऐसे मरीज सीधे संबंधित विभागों के संपर्क में आते हैं। इसलिए विभागाध्यक्षों को निर्देश हैं कि वह उन्हें स्पेशल केस की तरह लें।
रजिस्ट्रेशन काउंटर पर जनसंपर्क अधिकारियों को उनकी मदद के लिए लगाया जाता है। विदेशी मरीजों को और अधिक आकर्षित करने के लिए विशेष सुविधाएं दी जाएंगी।