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Lucknow News: यूपीआई पर शुल्क से बाजार में नोट होंगे रिचार्ज
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प्रतीकात्मक।
लखनऊ। यूपीआई से होने वाले बड़े भुगतान पर शुल्क की व्यवस्था लागू होने से बाजार में नकदी का चलन फिर बढ़ सकता है। कारोबारियों का मानना है कि अब तक डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता देने वाले ग्राहक बड़े भुगतान के लिए नकद का विकल्प चुन सकते हैं। खासकर फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा, सराफा और अन्य महंगे सामान की खरीदारी में इसका असर दिखाई देने की उम्मीद व्यापारी जता रहे हैं।
Iमौजूदा समय में कोई भी फर्नीचर दो हजार रुपये से अधिक का आता है। कटौती के कारण फर्नीचर व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसकी भरपाई या तो रेट बढ़ाकर करनी पड़ेगी या फिर मजबूरन व्यापारी नकद भुगतान लेगा। I
I- इकबाल हसन, प्रदेश अध्यक्ष, फर्नीचर ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशनI
Iयूपीआई से भुगतान लोगों की जरूरत बन चुकी है। पहले इसको बढ़ावा देना और अब इस पर शुल्क लगाना ठीक नहीं है। मजबूर होकर व्यापारी नकद भुगतान की ओर से जा सकता है। इस लिहाज से इसे सरकार को वापस लेना चाहिए।I
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I- सुरेश छाबलानी, महानगर अध्यक्ष, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडलI
Iयूपीआई का प्रचलन काफी बढ़ चुका है। 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर शुल्क भले ही व्यापारी से लेने की बात कही जा रही है, लेकिन इसका सीधा असर ग्राहक पर ही पड़ेगा। महंगाई पहले से बढ़ी है, लिहाजा सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।I
I- मो. अफजल, प्रदेश कोषाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडलI
Iपहले से कैश हैंडलिंग, एसएमएस, आईएमपीएस चार्ज की मार झेल रहे व्यापारियों पर यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाना किसी भी दशा में उचित नहीं है। इससे आम जनता और व्यापारी दोनों परेशान होंगे। नकद का प्रचलन फिर बढ़ सकता है।I
I- संजय गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडलI
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Iमौजूदा समय में कोई भी फर्नीचर दो हजार रुपये से अधिक का आता है। कटौती के कारण फर्नीचर व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसकी भरपाई या तो रेट बढ़ाकर करनी पड़ेगी या फिर मजबूरन व्यापारी नकद भुगतान लेगा। I
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I- इकबाल हसन, प्रदेश अध्यक्ष, फर्नीचर ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशनI
Iयूपीआई से भुगतान लोगों की जरूरत बन चुकी है। पहले इसको बढ़ावा देना और अब इस पर शुल्क लगाना ठीक नहीं है। मजबूर होकर व्यापारी नकद भुगतान की ओर से जा सकता है। इस लिहाज से इसे सरकार को वापस लेना चाहिए।I
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I- सुरेश छाबलानी, महानगर अध्यक्ष, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडलI
Iयूपीआई का प्रचलन काफी बढ़ चुका है। 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर शुल्क भले ही व्यापारी से लेने की बात कही जा रही है, लेकिन इसका सीधा असर ग्राहक पर ही पड़ेगा। महंगाई पहले से बढ़ी है, लिहाजा सरकार को इस पर विचार करना चाहिए।I
I- मो. अफजल, प्रदेश कोषाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडलI
Iपहले से कैश हैंडलिंग, एसएमएस, आईएमपीएस चार्ज की मार झेल रहे व्यापारियों पर यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाना किसी भी दशा में उचित नहीं है। इससे आम जनता और व्यापारी दोनों परेशान होंगे। नकद का प्रचलन फिर बढ़ सकता है।I
I- संजय गुप्ता, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडलI