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Lucknow News: सात जगहों से खुला है चारबाग स्टेशन, हो रही एंट्री, जांच कहीं नहीं
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चारबाग व लखनऊ जंक्शन का मामला
सीसीटीवी, हैंड हेल्ड मशीनें, मेटल डोर डिटेक्टर नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। चारबाग रेलवे स्टेशन पर सात जगहों से एंट्री हो रही है। लेकिन सुरक्षा के इंतजाम कहीं नहीं है। न ही यात्रियों की जांच हो रही है, न ही उनके लगेज जांच के पुख्ता इंतजाम हैं। सीसीटीवी, हैंड हेल्ड मशीनें, मेटल डोर डिटेक्टर तक पर्याप्त नहीं हैं।
यह हाल तब है, जब विगत दिनों दिल्ली में आतंकियों ने घटना को अंजाम दिया है। चारबाग व लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर प्रवेश के लिए कई द्वार हैं। आधिकारिक तौर पर बने प्रवेशद्वारों पर सुरक्षा के इंतजाम नजर भी आते हैं। लेकिन यात्री जिन-जिन जगहों से स्टेशन पर एंट्री ले रहे हैं, वहां उनकी जांच के कोई इंतजाम नहीं है। मसलन, चारबाग रेलवे स्टेशन पर रेलवे कोर्ट के पास से, रेल मेल सेवा(आरएमएस), राजकीय पुलिस बल(जीआरपी) कार्यालय, फर्स्ट पोर्टिको, सेकेंड पोर्टिको, इन दोनों पोर्टिको के बीच बनी सीढ़ियों से, जो एफओबी से जुड़ता है, पार्सल घर, कैबवे के आगे से तथा सेकेंड एंट्री की ओर से स्टेशन पर यात्री प्रवेश करते हैं। इसमें फर्स्ट व सेकेंड पोर्टिको ही आधिकारिक तौर पर स्टेशन में एंट्री के लिए हैं। हालांकि जांच की बात की जाए तो सभी प्रवेशद्वारों पर व्यवस्थाएं नाकाफी हैं।
इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम ध्वस्त
दरअसल, चारबाग रेलवे स्टेशन व लखनऊ जंक्शन पर सुरक्षा व्यवस्था को मुकम्मल करने के लिए इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम लगाया गया। इसके तहत एचडी सीसीटीवी, हैंड हेल्ड मशीनें, मेटल डोर डिटेक्टर, लगेज स्कैनर आदि लगवाए गए। यह व्यवस्था कुछ दिन चली, फिर चौपट हो गई।
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68 सीसीटीवी की है जरूरत
चारबाग व लखनऊ जंक्शन स्टेशन के प्लेटफॉर्मों पर निगरानी के लिए 68 एचडी सीसीटीवी की आवश्यकता है। इससे चप्पे-चप्पे पर नजर रखने में मदद मिलेगी। हालांकि रेलवे प्रशासन की ओर से मुख्य प्लेटफॉर्मों व सरकुलेटिंग एरिया में नए सीसीटीवी लगवाए गए हैं। इसके अतिरिक्त प्रवेशद्वारों पर मेटल डोर डिटेक्टर लगाने की आवश्यकता है।
सीसीटीवी, हैंड हेल्ड मशीनें, मेटल डोर डिटेक्टर नहीं
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। चारबाग रेलवे स्टेशन पर सात जगहों से एंट्री हो रही है। लेकिन सुरक्षा के इंतजाम कहीं नहीं है। न ही यात्रियों की जांच हो रही है, न ही उनके लगेज जांच के पुख्ता इंतजाम हैं। सीसीटीवी, हैंड हेल्ड मशीनें, मेटल डोर डिटेक्टर तक पर्याप्त नहीं हैं।
यह हाल तब है, जब विगत दिनों दिल्ली में आतंकियों ने घटना को अंजाम दिया है। चारबाग व लखनऊ जंक्शन रेलवे स्टेशन पर प्रवेश के लिए कई द्वार हैं। आधिकारिक तौर पर बने प्रवेशद्वारों पर सुरक्षा के इंतजाम नजर भी आते हैं। लेकिन यात्री जिन-जिन जगहों से स्टेशन पर एंट्री ले रहे हैं, वहां उनकी जांच के कोई इंतजाम नहीं है। मसलन, चारबाग रेलवे स्टेशन पर रेलवे कोर्ट के पास से, रेल मेल सेवा(आरएमएस), राजकीय पुलिस बल(जीआरपी) कार्यालय, फर्स्ट पोर्टिको, सेकेंड पोर्टिको, इन दोनों पोर्टिको के बीच बनी सीढ़ियों से, जो एफओबी से जुड़ता है, पार्सल घर, कैबवे के आगे से तथा सेकेंड एंट्री की ओर से स्टेशन पर यात्री प्रवेश करते हैं। इसमें फर्स्ट व सेकेंड पोर्टिको ही आधिकारिक तौर पर स्टेशन में एंट्री के लिए हैं। हालांकि जांच की बात की जाए तो सभी प्रवेशद्वारों पर व्यवस्थाएं नाकाफी हैं।
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इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम ध्वस्त
दरअसल, चारबाग रेलवे स्टेशन व लखनऊ जंक्शन पर सुरक्षा व्यवस्था को मुकम्मल करने के लिए इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम लगाया गया। इसके तहत एचडी सीसीटीवी, हैंड हेल्ड मशीनें, मेटल डोर डिटेक्टर, लगेज स्कैनर आदि लगवाए गए। यह व्यवस्था कुछ दिन चली, फिर चौपट हो गई।
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68 सीसीटीवी की है जरूरत
चारबाग व लखनऊ जंक्शन स्टेशन के प्लेटफॉर्मों पर निगरानी के लिए 68 एचडी सीसीटीवी की आवश्यकता है। इससे चप्पे-चप्पे पर नजर रखने में मदद मिलेगी। हालांकि रेलवे प्रशासन की ओर से मुख्य प्लेटफॉर्मों व सरकुलेटिंग एरिया में नए सीसीटीवी लगवाए गए हैं। इसके अतिरिक्त प्रवेशद्वारों पर मेटल डोर डिटेक्टर लगाने की आवश्यकता है।