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शहर के ड्राइवर अब फेसबुक पर होंगे
विवेक त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Fri, 18 Oct 2013 08:42 AM IST
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सभी ऑटो-टेंपो और सिटी बस के चालक बहुत जल्द फेसबुक पर होंगे। डीआईजी
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नवनीत सिकेरा इनका क्लोज्ड ग्रुप बनवा रहे हैं।
फेसबुक प्रोफाइल को मोबाइल सेवा से जोड़ने की भी तैयारी है। डीआईजी का कहना है कि फेसबुक और मोबाइल सेवा के कनेक्ट होते ही सिर्फ एक एसएमएस भेजकर ऑटो-टेंपो या बस चालक के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
इससे झगड़ा-मारपीट या छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर आसानी से लगाम लगाई जा सकेगी।शहर में ऑटो-टेंपो व सिटी बस के दस हजार से ज्यादा चालक हैं।
पढ़ें- DIG का निर्देश, अब टेम्पो-ऑटो में नहीं बजेंगे गाने
अलग-अलग शहरों से यहां आकर काम कर रहे इन चालकों की पुलिस, ट्रैफिक और आरटीओ के पास न तो कोई आइडेंटिटी है न ही रिकाॅर्ड। ज्यादातर चालकों के पास गैर जनपदों से बनवाए गए ड्राइविंग लाइसेंस हैं।
ऑटो-टेंपो-बस में रोजाना छेड़छाड़, मारपीट और लूटपाट व टप्पेबाजी जैसी घटनाएं होती हैं। इसमें फरार चालक का सुराग लगाना भी मुश्किल होता है। डीआईजी ने बताया कि चालकों को पुलिस और परिवहन विभाग के अफसरों के हस्ताक्षर वाले आई कार्ड देने की तैयारी की जा रही है।
पढ़ें- दृष्टिबाधित एथलीट से ऑटो में छेड़छाड़
इसके लिए चालकों से एक फॉर्म भरवाया जाएगा जिसमें उनके नाम, पहचान चिह्न, स्थाई व अस्थाई पता, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट साइज फोटो के अलावा शैक्षिक योग्यता, लाइसेंस नंबर, बैंक खाता, संरक्षक का विवरण और फोटो भी होगी।
फार्म में संबंधित चालक की जांच व वेरीफिकेशन करने वाले पुलिसकर्मी का भी ब्यौरा भी लिखा जाएगा। डीआईजी ने बताया कि यही जानकारियां चालकों की फेसबुक प्रोफाइल बनाकर अपलोड कर दी जाएंगी।
पढ़ें- जानिए, कितना बढ़ा सिटी बस का किराया
इससे पुलिस को चालकों का डिजिटल डाटा मिल जाएगा। बकौल डीआईजी, फेसबुक को मोबाइल से कनेक्ट करके सिर्फ एक एसएमएस से किसी भी चालक के बारे में पूरी जानकारी तत्काल मंगाई जा सकेगी।
डीआईजी ने कहा कि सभी चालकों को अपना आईकार्ड सामने टांगकर चलना होगा। इसके लिए एसएमएस नंबर जल्द तय किया जाएगा।
लखनऊ की और खबरों के लिए यहां आएं...
फेसबुक प्रोफाइल को मोबाइल सेवा से जोड़ने की भी तैयारी है। डीआईजी का कहना है कि फेसबुक और मोबाइल सेवा के कनेक्ट होते ही सिर्फ एक एसएमएस भेजकर ऑटो-टेंपो या बस चालक के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
इससे झगड़ा-मारपीट या छेड़छाड़ जैसी घटनाओं पर आसानी से लगाम लगाई जा सकेगी।शहर में ऑटो-टेंपो व सिटी बस के दस हजार से ज्यादा चालक हैं।
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अलग-अलग शहरों से यहां आकर काम कर रहे इन चालकों की पुलिस, ट्रैफिक और आरटीओ के पास न तो कोई आइडेंटिटी है न ही रिकाॅर्ड। ज्यादातर चालकों के पास गैर जनपदों से बनवाए गए ड्राइविंग लाइसेंस हैं।
ऑटो-टेंपो-बस में रोजाना छेड़छाड़, मारपीट और लूटपाट व टप्पेबाजी जैसी घटनाएं होती हैं। इसमें फरार चालक का सुराग लगाना भी मुश्किल होता है। डीआईजी ने बताया कि चालकों को पुलिस और परिवहन विभाग के अफसरों के हस्ताक्षर वाले आई कार्ड देने की तैयारी की जा रही है।
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इसके लिए चालकों से एक फॉर्म भरवाया जाएगा जिसमें उनके नाम, पहचान चिह्न, स्थाई व अस्थाई पता, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट साइज फोटो के अलावा शैक्षिक योग्यता, लाइसेंस नंबर, बैंक खाता, संरक्षक का विवरण और फोटो भी होगी।
फार्म में संबंधित चालक की जांच व वेरीफिकेशन करने वाले पुलिसकर्मी का भी ब्यौरा भी लिखा जाएगा। डीआईजी ने बताया कि यही जानकारियां चालकों की फेसबुक प्रोफाइल बनाकर अपलोड कर दी जाएंगी।
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इससे पुलिस को चालकों का डिजिटल डाटा मिल जाएगा। बकौल डीआईजी, फेसबुक को मोबाइल से कनेक्ट करके सिर्फ एक एसएमएस से किसी भी चालक के बारे में पूरी जानकारी तत्काल मंगाई जा सकेगी।
डीआईजी ने कहा कि सभी चालकों को अपना आईकार्ड सामने टांगकर चलना होगा। इसके लिए एसएमएस नंबर जल्द तय किया जाएगा।
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