{"_id":"f85a1f5e626b5ea5bd5183b5cc190b6f","slug":"challenges-for-raja-bhaiya-ahead","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजा भैया के इंतजार में 'अग्निपथ'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजा भैया के इंतजार में 'अग्निपथ'
मनोज श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Sun, 13 Oct 2013 09:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्थितिजन्य कारणों से राजा भैया ने फिर अखिलेश मंत्रिमंडल में कुर्सी तो हासिल कर ली है, पर आगे का रास्ता जटिल है।
विज्ञापन
पूरब से पश्चिम तक ठाकुरों की नाराजगी झेल रही सरकार की लाल बत्ती और बिरादरी के बीच इकबाल बरकरार रख पाना असंभव तो नहीं कठिन जरूर होगा।
इसमें राजा के राजनीतिक कौशल की भी परीक्षा होगी कि किस तरह वे दोनों पक्षों के बीच सामंजस्य बिठाते हैं।
सीओ मर्डर केस से निपटने में राजा भैया को जितनी कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ा, अब मंत्री बनने के बाद उससे जटिल दौर से गुजरना है। पहली परीक्षा तो खेड़ा (मेरठ) के मामले में होनी है।
मुजफ्फरनगर कांड के सिलसिले में ठाकुर बहुल इस गांव में पिछले दिनों एक पंचायत के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था और सैकड़ों लोगों पर मुकदमे दर्र्ज किए थे। इनमें ज्यादातर ठाकुर हैं।
विज्ञापन
इस मामले को लेकर इलाके के ठाकुरों में सरकार के प्रति बेहद आक्रोश है। नाराज ठाकुरों ने इस मामले में राजा भैया से भी मदद की अपील की थी।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के उमाशंकर सिंह बताते हैं कि खेड़ा मामले सहित ठाकुरों के साथ हो रहे अन्याय के अन्य मुददें पर हमने बातचीत की थी, तब तो उनका रुख संतोषजनक था। अब मंत्री बनने के बाद क्या रुख होगा, यह बातचीत के बाद ही पता चलेगा।
विज्ञापन
उधर, पिछले हफ्ते आजम खां ने जब राजा भैया से उनके घर पर मुलाकात की थी, तब कहा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जो स्थितियां हैं, उनमें उनके सहयोग की आवश्यकता है।
स्वाभाविक है जल्द ही सपा नेतृत्व चाहेगा कि राजा भैया वहां ठाकुरों के बीच जाकर सरकार विरोधी माहौल को हल्का करने की कोशिश करें। बस, यहीं देखना होगा कि वे किस तरह संतुलन साधते हैं।
उनकी दूसरी परीक्षा लोकसभा चुनाव में होगी। राजा समर्थक कहते रहते हैं कि उनका चुनावी असर प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, कौशांबी और फतेहपुर में रहता है।
सपा नेतृत्व की अपेक्षा होगी कि वे इन सीटों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर पार्टी प्रत्याशियों को जिताने में मदद करें। जैसी कि चर्चा है सुल्तानपुर में वरुण गांधी भाजपा से चुनाव लड़ेंगे, संजय सिंह मौजूदा सांसद हैं। ऐसे में सपा को सीट निकालना आसान नहीं होगा।
प्रतापगढ़ में रत्ना सिंह का कांग्रेस से चुनाव लड़ना तय माना जा रहा है, भाजपा से मोती सिंह के नाम की चर्चा है। इन स्थितियों में सीएन सिंह के लिए ठाकुरों का अधिसंख्य वोट जुटा पाना बेहद मुश्किल होगा।
वैसे भी सीएन सिंह से इनके रिश्ते ठीक नहीं माने जाते। जो हवा है, उसमें इस बार कौशांबी व फतेहपुर में सपा को इस बार वॉक ओवर तो नहीं मिलने वाला।
ठाकुर राजनीति का मर्म समझने वाले एक पूर्व विधायक ने कहा कि स्थितियां निश्चित ही बेहद पेचीदा हैं। सत्ता की तरफ ज्यादा झुकते हैं तो बिरादरी के बीच सवाल खड़े होंगे और बिरादरी की तरफ ज्यादा झुकते हैं तो लाल बत्ती देने वाले मुंह फुलाएंगे।
ऐसे में राजा की अग्निपरीक्षा इस बात को लेकर होगी कि खिलाफ हवा में वे साइकिल को कितनी रफ्तार पकड़वा पाते हैं।