लखनऊ मेट्रो को केंद्र सरकार देगी 1350 करोड़ की मदद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र और राज्य सरकार के बीच मेट्रो रेल परियोजना को लेकर मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) एक सप्ताह के भीतर हो जाएगा। इसके तहत केंद्र से मेट्रो को मिलने वाली आर्थिक मदद के संबंध में जो नियम और शर्तें हैं, उन पर एलएमआरसी की सहमति ली जाएगी।
ड्राफ्ट एमओयू सेंटर गवर्नमेंट ने एलएमआरसी को भेज दिया है। इसका परीक्षण एलएमआरसी कर रहा है। इस संबंध में प्रबंध निदेशक कुमार केशव का कहना है कि, बहुत जल्द हम एमओयू पर साइन कर देंगे।
22 दिसंबर को मेट्रो रेल परियोजना के लिए केंद्र सरकार ने अपनी स्वीकृति दे दी थी। जिसके बाद तय हो गया था कि केंद्र से नार्थ-साउथ कॉरिडोर के लिए 1350 करोड़ रुपये की मदद मिलेगी।
यह परियोजना 20 फीसदी केंद्रीय, 20 फीसदी राज्य के अंशदान और बाकी 60 फीसदी ऋण से वित्तपोषित होगी। पहले फेज का कुल बजट 6900 करोड़ रुपये का है।
इसी वित्तीय के अंत में केंद्र से 173 करोड़ रुपये की मदद मिलेगी। यह पिछले और चालू वित्तीय वर्ष का अंशदान है। जबकि, यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक भी इस वर्ष 23 मिलियन यूरो से ऋण की पहली किस्त दे देगी।
केंद्र और राज्य दोनों ही एलएमआरसी में अब 50-50 फीसदी के भागीदार होंगे। कुल 4100 करोड़ रुपये के विदेशी ऋण की राह आसान हुई है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच एमओयू के बाद एलएमआरसी को आर्थिक अंशदान की पहली किस्त जारी कर दी जाएगी।
केंद्र की मदद के बाद विदेशी ऋण जुटाया जाएगा
ट्रांसपोर्टनगर से मुंशी पुलिया तक करीब 22 किलोमीटर के इस रूट पर कुल खर्च करीब 6900 करोड़ रुपये का होगा। डीएमआरसी की ही तरह जो वित्तीय व्यवस्था लखनऊ मेट्रो के लिए है, उसमें कुल बजट 6900 करोड़ का 20 फीसदी राज्य सरकार, 20 फीसदी केंद्र सरकार और बकाया 60 फीसदी विदेशी ऋण के जरिये जुटाया जाएगा।
जिसमें राज्य और केंद्र सरकार करीब 1350-1350 करोड़ खर्च करेंगे। बकाया करीब 4100 करोड़ रुपये विदेशी ऋण से जुटाये जायेंगे। 1000 करोड़ रुपये राज्य सरकार की ओर से देने का एलान पहले ही किया जा चुका है। जबकि, केंद्र सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में 100 करोड़ और चालू वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 173 करोड़ रुपये देने का एलान किया है।
हमको केंद्र सरकार से एमओयू की ड्राफ्ट कॉपी मिल गई है जिसका परीक्षण किया जा रहा है। बहुत जल्द केंद्र और राज्य सरकार के बीच इस एमओयू पर साइन होगा। इसके बाद केंद्रीय अंशदान के साथ ही विदेशी ऋण भी मिल सकेगा।
कुमार केशव, प्रबंध निदेशक- एलएमआरसी