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मायाराज में अपर निजी सचिव भर्ती में हुई गड़बड़ी की सीबीआई जांच शुरू
Fri, 22 Feb 2019 11:11 AM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Fri, 22 Feb 2019 11:11 AM IST
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बसपा सुप्रीमो मायावती
- फोटो : amar ujala
स्मारकों के निर्माण में घपलेबाजी को लेकर फंसी बसपा सुप्रीमो मायावती एक और मामले में घिरने जा रही हैं। सीबीआई ने मायावती के शासनकाल के दौरान यूपी लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) में वर्ष 2010 में हुई अपर निजी सचिर्व भर्ती में भाई-भतीजावाद के आरोपों की जांच शुरू करते हुए अज्ञात अफसरों पर प्रारंभिक रिपोर्ट (पीई) दर्ज कर ली है।
सीबीआई सपा शासनकाल (2012-2017) के दौरान आयोग में हुई भर्तियों की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह शिकायत मिली कि 2010 में अपर निजी सचिवों की भर्ती में भी घालमेल हुआ है। यह भर्ती जांच के दायरे में नहीं थी, इसलिए सीबीआई के अपर निदेशक एके शर्मा ने इसके लिए मुख्य सचिव को पत्र लिखा था। तब राज्य सरकार ने इसकी सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। जांच एजेंसी ने जांच व पूछताछ के बाद पीई दर्ज की। इसके बाद सीबीआई इस प्रकरण में संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर औपचारिक पूछताछ व साक्ष्य जुटाने की कवायद शुरू करेगी।
250 पदों की भर्ती में लगे थे करीबियों पर मेहरबानी के आरोप
सीबीआई अफसरों ने बृहस्पतिवार को बताया कि 250 पदों के लिए हुई उक्त भर्ती में लोकसेवकों के करीबी रिश्तेदारों को तरजीह देने का आरोप है। यह सभी अधिकारी 2007 से 2012 तक मुख्यमंत्री रहीं मायावती के दौर में सत्ता के करीबी माने जाते थे। आरोप था कि यूपीपीएससी के कुछ अधिकारियों ने न्यूनतम अर्हता पूरी न होने के बावजूद कई लोगों की भर्ती कर ली। मानकों की अनदेखी कर जिनकी भर्ती की गई, उनमें सचिवालय में तैनात कई निजी सचिवों के नजदीकी रिश्तेदारों के नाम सामने आए। अयोग्य उम्मीदवारों का चयन करने के लिए परीक्षकों पर भी उनके प्राप्तांक में फेरबदल करने का दबाव बनाया था।
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सीबीआई सपा शासनकाल (2012-2017) के दौरान आयोग में हुई भर्तियों की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह शिकायत मिली कि 2010 में अपर निजी सचिवों की भर्ती में भी घालमेल हुआ है। यह भर्ती जांच के दायरे में नहीं थी, इसलिए सीबीआई के अपर निदेशक एके शर्मा ने इसके लिए मुख्य सचिव को पत्र लिखा था। तब राज्य सरकार ने इसकी सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। जांच एजेंसी ने जांच व पूछताछ के बाद पीई दर्ज की। इसके बाद सीबीआई इस प्रकरण में संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर औपचारिक पूछताछ व साक्ष्य जुटाने की कवायद शुरू करेगी।
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250 पदों की भर्ती में लगे थे करीबियों पर मेहरबानी के आरोप
सीबीआई अफसरों ने बृहस्पतिवार को बताया कि 250 पदों के लिए हुई उक्त भर्ती में लोकसेवकों के करीबी रिश्तेदारों को तरजीह देने का आरोप है। यह सभी अधिकारी 2007 से 2012 तक मुख्यमंत्री रहीं मायावती के दौर में सत्ता के करीबी माने जाते थे। आरोप था कि यूपीपीएससी के कुछ अधिकारियों ने न्यूनतम अर्हता पूरी न होने के बावजूद कई लोगों की भर्ती कर ली। मानकों की अनदेखी कर जिनकी भर्ती की गई, उनमें सचिवालय में तैनात कई निजी सचिवों के नजदीकी रिश्तेदारों के नाम सामने आए। अयोग्य उम्मीदवारों का चयन करने के लिए परीक्षकों पर भी उनके प्राप्तांक में फेरबदल करने का दबाव बनाया था।
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एक ग्रुप नहीं चाहता था... केस सीबीआई तक पहुंचे
सूत्र बताते हैं कि सीबीआई के हाथ जो दस्तावेज लगे उनमें यहां तक की जानकारी मिली कि अपनों को नियुक्ति दिलाने में बड़े अफसरों ने एक्ट तक में संशोधन कर चहेतों की खातिर भर्ती में खूब मनमानी की। गौरतलब है कि यह मामला सीबीआई में न जाए इसके लिए सचिवालय के ही एक ग्रुप ने खासा जोर लगा रखा था।
लोकसेवक कौन... अफसरों ने नहीं बताया
सीबीआई अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस मामले में लोक सेवक शब्द का प्रयोग निर्वाचित प्रतिनिधि यानी विधायक या मंत्री के लिए किया गया है या किसी अन्य के लिए। लेकिन उन्होंने इस सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की कि चुने गए उम्मीदवारों के ‘करीबी रिश्तेदार’ सरकार के निर्वाचित सदस्य थे या नहीं।
लोकसेवक कौन... अफसरों ने नहीं बताया
सीबीआई अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस मामले में लोक सेवक शब्द का प्रयोग निर्वाचित प्रतिनिधि यानी विधायक या मंत्री के लिए किया गया है या किसी अन्य के लिए। लेकिन उन्होंने इस सवाल पर कोई टिप्पणी नहीं की कि चुने गए उम्मीदवारों के ‘करीबी रिश्तेदार’ सरकार के निर्वाचित सदस्य थे या नहीं।