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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Case filed against ranger and one daroga in corruption case in Balrampur.

Balrampur: 300 सागौन के पेड़ काटने के लिए प्रति पेड़ एक हजार रुपये दाम, रिश्वतखोरी में रेंजर व वन दरोगा पर केस

Tue, 19 Mar 2024 07:01 PM IST
ishwar ashish संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Published by: ishwar ashish Updated Tue, 19 Mar 2024 07:01 PM IST
सार

जिलाधिकारी की गोपनीय जांच में वन विभाग में भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है। कहा कि वन विभाग के अधिकारी संगठित रूप से भ्रष्टाचार कर रहे हैं।

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Case filed against ranger and one daroga in corruption case in Balrampur.
तुलसीपुर रेंज आफिस पर कार्रवाई के बाद पसरा सन्नाटा - फोटो : amar ujala

विस्तार

वन विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। पेड़ों की कटान के लिए तीन लाख रूपये की रिश्वतखोरी में तुलसीपुर रेंज के फार्रेस्ट रेंजर डीपी सिंह व वन दरोगा भरत प्रसाद सिंह के विरूद्व तुलसीपुर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। जिलाधिकारी अरविंद सिंह ने कहा कि संगठित रूप से वन विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार कर रहे थे। एफआईआर के साथ ही उनकी पूरे प्रदेश में संपत्तियों की जांच कराए जाने की सिफारिश यूपी भ्रष्टाचार निवारण संगठन को भेजी है।

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तहसील तुलसीपुर के ग्राम चरनगहिया में सागौन के पेड़ काटने की परमिट एवं परिवहन के लिए फारेस्ट रेंजर एवं वन दरोगा ने लकड़ी व्यवसायी से बकायदा रेट चार्ट बनाकर एक लाख इकहत्तर हजार रूपए वसूल लिए। इसके बाद भी परमिट नहीं दी। सिद्वार्थनगर नगर पालिका कसया जिला कुशीनगर निवासी सुनील वर्मा ने इस तरह हुई वसूली की जानकारी 19 मार्च को जिलाधिकारी को दी। शपथ पत्र देकर पूरा मामला बताया।
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बताया कि तुलसीपुर के ग्राम चरनगहिया में गाटा संख्या-632 रकबा 1.489 हेक्टयर जो रेनू सिंह पके नाम दर्ज है। इस गाटे में सागौन के 300 पेड़ उसने खरीदे और रेनू सिंह से नंवबर में आनलाइन आवेदन परमिट के लिए कराया। रिपोर्ट के लिए फार्रेस्ट रेंजर डीपी सिंह से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि सिस्टम के हिसाब से आओ। उन्होंने वन दरोगा भरत प्रसाद सिंह से मिलने को कहा। जब ठेकेदार वन दरोगा भरत प्रसाद सिंह से मिला तो उसने 300 सागौन के पेड़ो के लिए प्रति पेड़ एक हजार रूपये की दर बताई और तीन लाख मांगे। सहूलियत की मांग को नकार दिया, दो माह तक दौड़ाते रहे।


डीएम ने बताया कि जांच कराई गई तो यह बात सामने आई कि बाद में दो लाख में रिपोर्ट लगाने को फार्रेस्ट रेंजर डीपी सिंह तैयार हुए। ठेकेदार ने एक लाख 71 हजार रूपये दे दिया। इसके बाद फाइल आगे बढ़ाई गई। पेड़ काटने के बाद ठेकेदार ने परिवहन परमिट के लिए वन दरोगा से भरत सिंह से संपर्क किया तो उसने 90 हजार रूपये की मांग किया। डेढ़ माह से लकड़ी उठाने नहीं दी जा रही है। डीएम ने कहा कि जांच में तथ्यों की पुष्टि होने पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून व आपराधिक साजिश की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

पद का दुरूपयोग कर गैंग बनाकर अवैध वसूली की भेजी रिपोर्ट 
पूरे मामले की जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि वन विभाग के अधिकारी पद का दुरूपयोग कर गैंग बनाकर अवैध वसूली कर रहे हैं। एक मामले की शिकायत मिली है लेकिन इनकी तैनाती लंबे समय से है। इनके पूरे मामले की जांच कराने और उनके द्वारा अवैध ढंग से अर्जित की गई संपत्तियों की जांच राज्य स्तर से कराए जाने की संस्तुति भी डीएम ने की है। बताया कि ठेकेदार ने रिश्वत की अस्सी हजार रूपए नहीं दिए तो लगभग डेढ़ माह से पेड़ काटकर बोटा के रूप मौके पर पड़ा हुआ है।

परिवहन परमिट व ढुलाई की अनुमति नही दी जा रही है। वन दरोगा ने लकड़ी को जनपद की सीमा से पार कराने के लिए भी ठेकेदार से पैसे की मांग की गई। डीएम ने कहा कि यह मामला गंभीर है। पूरे जिले के अन्य विभागों को भी सचेत किया है कि इस तरह वसूली करने वालों के विरूद्व कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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