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...तो इसलिए दिखाई जाएंगी स्कूलों में कार्टून फिल्में

Sun, 13 Oct 2013 09:16 AM IST
शैलेंद्र श्रीवास्तव/लखनऊ
शैलेंद्र श्रीवास्तव/लखनऊ Updated Sun, 13 Oct 2013 09:16 AM IST
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cartoon film will be shown in primary schools

पढ़ोगे लिखोगे तो होगे नवाब, खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराब...। यह बीते जमाने की बातें होंगी। अब बच्चे जितना खेलेंगे उतना ही पढ़ाई में अच्छे होंगे।

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यही नहीं, बच्चों को ऐसी कार्टून फिल्में भी दिखाई जाएंगी जो बच्चों में समझ विकसित करेंगी। इसके लिए न पाठ्यक्रम संशोधित होगा और न ही नई किताबें छापी जाएंगी।
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इस हेतु बेसिक शिक्षा विभाग विशेषज्ञों की एक टीम तैयार करेगा। नई व्यवस्था अगले शिक्षण सत्र जुलाई 2014 से लागू करने की तैयारी है। शासन स्तर पर इस संबंध में सहमति बन गई है।
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नई व्यवस्था ब्लाक संसाधन केंद्र के कक्षा एक व छह तथा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में लागू की जाएगी। इनमें सफलता के बाद इसे अन्य स्कूलों में लागू किया जाएगा।


प्रदेश में बेसिक शिक्षा का बहुत बड़ा दायरा है। 1,54,272 प्राइमरी स्कूलों में 2.61 करोड़ बच्चे पढ़ते हैं। 76,782 उच्च प्राइमरी स्कूलों में 92.15 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इसके बाद भी यहां पढ़ाई व्यवस्था बहुत अच्छी नहीं है।

अभिभावक बच्चों का नाम लिखाते तो जरूर हैं, लेकिन काफी बच्चे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते हैं। स्कूल आने वालों की भी बौद्धिक क्षमता अच्छी नहीं होती। कई बच्चों को अक्षर का ज्ञान तक नहीं होता। इसलिए सरकार चाहती है कि कुछ ऐसा किया जाए जिससे बच्चे खेल-खेल में पढ़ने लगें।


शासन स्तर पर इस बारे में बैठक बुलाई गई थी। इसमें परिषदीय स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई का स्तर सुधारने पर विचार-विमर्श किया गया। यह सहमति बनी है कि प्राइमरी स्कूलों में कक्षा एक के बच्चों को कार्टून फिल्म व खेल के माध्यम से शिक्षा दी जाए।



कार्टून के माध्यम से हिंदी, अंग्रेजी व खेल से गणित की पढ़ाई कराई जाए। कार्टून फिल्मों का निर्माण बेसिक शिक्षा विभाग के राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान से कराया जाए।

इसी तरह कक्षा छह व कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की इस कक्षा की लड़कियों को हिंदी नाटक के माध्यम से पढ़ाया जाए। इसके लिए ऐसा फॉर्मूला विकसित किया जाएगा कि नाटक में बच्चे भी शामिल होंगे। इससे उनकी समझ विकसित होगी।

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