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फर्श पर तड़पते रहे मरीज, डॉक्टर बोले बेड नहीं है अगले दिन आना

Thu, 08 Sep 2016 03:43 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Thu, 08 Sep 2016 03:43 PM IST
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carelessness of doctors in government hospitals
मरीज श‌िवनाथ - फोटो : amar ujala

राजधानी और उसके आसपास जिलों के मरीजों का इलाज मुश्किल हो गया है। राजधानी के ज्यादातर बड़े सरकारी अस्पतालों में बेड फुल हो चुके हैं। 

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लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में बुधवार को कुछ ऐसे ही हालात रहे जहां बुखार के गंभीर मरीज सुबह से इमरजेंसी के बाहर जमीन पर इलाज की आस में पड़े रहे। 
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अस्पताल के सीएमएस डॉ. ओंकार यादव का कहना है कि इस वक्त मरीजों की भीड़ काफी बढ़ गई है जिससे इमरजेंसी में तुरंत बेड मुहैया कराना मुश्किल हो रहा है। 
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शिफ्टिंग करने के साथ मरीजों को लगातार डिस्चार्ज किया जा रहा है लेकिन इसके बावजूद बेड की किल्लत बनी हुई है।
पहले दौड़ाया, फिर दवा देकर टरका दिया

फैजाबाद की शालू पांडेय (35) को पिछले 15 दिनों से तेज बुखार है। उनका इलाज वहीं के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। बुधवार जब शालू की हालत ज्यादा खराब हुई तो परिवारीजन उन्हें बृहस्पतिवार सुबह लोहिया अस्पताल ले आए। 

शिफ्टिंग के साथ लगातार किया जा रहा डिस्चार्ज

carelessness of doctors in government hospitals
मासूम असहाक - फोटो : amar ujala

यहां डाक्टरों ने इमरजेंसी में भर्ती कराने को कहा। वहां बेड खाली न होने की बात कह कर डॉक्टरों ने भर्ती करने से मना कर दिया। बुखार से बेहाल शालू  इमरजेंसी के बाहर इलाज की आस में सुबह से लेकर शाम तक पड़ी रही। 

हालत ज्यादा खराब हुई तो तीमारदार के विनती करने पर डॉक्टरों ने दवा लिख कर टरका दिया। इसी तरह बाराबंकी के शिवनाथ (35) भी सुबह 11 बजे से शाम तक बुखार से बेहाल इमरजेंसी के बाहर बेड के इंतजार में पड़े रहे।

महमूदाबाद के 10 महीने के मासूम असहाक को तेज जुकाम के कारण सांस लेने में दिक्कत है। दादी मोमिना बताती है कि पिछले कुछ दिनों स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा था।

कोई सुधार न होने के कारण वह बृहस्पतिवार को लोहिया इमरजेंसी पहुंची। यहां डॉक्टर ने बेड खाली न होने की बात कह कर अगले दिन ओपीडी में दिखाने को कह दिया।

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