ड्यूटी के दौरान मनमानी और चूक कई अफसरों को पड़ेगी भारी, एक अफसर तो बिना प्रमोशन ही होंगे रिटायर
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सरकारी कामकाज में मनमानी, चूक व परिस्थितियों की कई बार कितनी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है, इसका अंदाजा पांच वरिष्ठ पीसीएस अफसरों के पदोन्नति प्रकरण से लगाया जा सकता है। इनमें एक अधिकारी जांच झेलते-झेलते अगले महीने बिना आईएएस बने ही रिटायर होने वाले हैं। दूसरे की पदोन्नति तो होगी, पर अपने तमाम कनिष्ठ अफसरों से भी कनिष्ठ हो जाएंगे। तीन अफसरों को एक बार फिर लिफाफा बंद पदोन्नति जैसी परिस्थिति का सामना करने की नौबत है।
केंद्र सरकार ने आईएएस काडर में पीसीएस से पदोन्नति के लिए वर्ष 2019 के लिए 26 रिक्तियां घोषित की हैं। इनमें चार पद ऐसे अफसरों के लिए सुरक्षित हैं जो पदोन्नति के दायरे में पूर्व के वर्षों में ही आ चुके हैं, लेकिन किसी न किसी आरोप में विभागीय जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।
संघ लोक सेवा आयोग ऐसे अफसरों को पात्रता वर्ष से ही लिफाफा बंद प्रमोशन देना शुरू कर देता है। इनके पदोन्नति के पद तब तक सुरक्षित रहते हैं जब तक वे जांच में निर्दोष साबित होकर कार्यभार न ग्रहण लें या दंड के साथ जांच न समाप्त हो अथवा रिटायर न हो जाएं।
पिछले वर्ष इस फार्मूले में आने वाले अफसरों की संख्या पांच थी। इनमें से एक प्रेम प्रकाश सिंह के प्रकरण की जांच लघु दंड के साथ समाप्त हो चुकी है। नतीजा ये है कि दंड पाने की वजह से ये वर्ष 2019 की पात्रता सूची की फ्रेस लिस्ट में शामिल होंगे और अपने से बाद के करीब 35 कनिष्ठ पीसीएस अधिकारियों से भी कनिष्ठ हो जाएंगे। ये 35 पीसीएस अधिकारी इनके प्रकरण की जांच के दौरान पिछले वर्षों में ही आईएएस में पदोन्नति प्राप्त कर आईएएस काडर में इनसे वरिष्ठ हो चुके हैं।
उदयी राम जुलाई में होंगे रिटायर
उदयी राम 1994 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। उनके खिलाफ एक मामले की जांच चल रही है। इनके अपने बैच व जूनियर बैच के करीब 70 पीसीएस अधिकारी आईएएस में पदोन्नति प्राप्त कर चुके हैं। ये जांच खत्म होने का इंतजार करते-करते अगले महीने रिटायर हो जाएंगे।
आईएएस संवर्ग में चयनित नहीं हो पाए। हालांकि 2019 की सेलेक्ट लिस्ट में इनका नाम शामिल है, लेकिन जांच लंबित होने से आयोग की विभागीय पदोन्नति समिति की आगामी बैठक में नाम रखने के बावजूद पिछले कई साल से बंद लिफाफा खुलने की संभावना न के बराबर है।
भीष्म लाल, हरीश चंद्र व घनश्याम का बढ़ता जा रहा इंतजार
1994 बैच के भीष्म लाल भी पीसीएस अधिकारी हैं। इनके खिलाफ भी जांच चल रही है। इनसे जूनियर करीब 66 पीसीएस अधिकारी पदोन्नति पाकर आईएएस हो चुके हैं। पिछले कई वर्षों से हर बार विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में इनके नाम पर चर्चा होती है।
जांच लंबित होने की वजह से प्रोविजनल पदोन्नति देकर लिफाफा बंद कर दिया जाता है। इस बार इनसे जूनियर 26 और पीसीएस अधिकारी आईएएस बनने जा रहे हैं। इनकी पदोन्नति का लिफाफा फिर बंद रहने के आसार हैं। इसी तरह 1997 बैच के पीसीएस अधिकारी हरीश चंद्र और घनश्याम सिंह के खिलाफ भी जांच चल रही है।
हरीश चंद्र के जूनियर तमाम साथी बीते दो वर्षों में आईएएस 2012 व 2013 बैच में शामिल हो चुके हैं। घनश्याम सिंह पिछले वर्ष आईएएस संवर्ग में पदोन्नति की पात्रता में आए थे। विभागीय कार्यवाही के दायरे में होने की वजह से उन्हें छोड़ 12 जूनियर साथियों को आईएएस संवर्ग में पदोन्नति मिल गई। इस बार भी लिफाफा बंद रहने की संभावना है।
1997 बैच : प्रेम प्रकाश सिंह
1998 बैच : बद्रीनाथ सिंह, राकेश चंद्र शर्मा, अंजनी कुमार सिंह, राज कुमार-प्रथम, डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, सौम्य श्रीवास्तव, गरिमा यादव, ज्ञानेंद्र सिंह, जयशंकर दुबे, ओम प्रकाश वर्मा, राकेश कुमार मालपानी, आशुतोष कुमार द्विवेदी, अविनाश सिंह, आनंद कुमार, जंग बहादुर यादव-प्रथम, मनोज कुमार, आलोक कुमार, अजय कांत सैनी, अनिल कुमार यादव, शीलधर सिंह यादव, गिरिजेश कुमार त्यागी।
इनकी पदोन्नति पर फिर होगा विचार
1994 बैच : उदयी राम व भीष्मलाल वर्मा।
1997 बैच : हरीश चंद्र, घनश्याम सिंह।