फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   caps of political parties

तो क्या यूपी में टोपी कर रही सियासत?

Tue, 22 Apr 2014 07:04 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 22 Apr 2014 07:04 PM IST
विज्ञापन
caps of political parties

इस चुनाव में टोपियों की जंग भी अपना अलग रंग दिखा रही हैं। एकाध को छोड़ सबके सिर पर टोपियां सवार हैं।

विज्ञापन


बीच-बीच में पार्टियों के नेता एक-दूसरे की टोपियां (इज्जत) तो उछालते तो थे लेकिन सिरों पर गांधी व नेहरू कट टोपियां गायब हो गई थीं।

हालांकि कुछ नेता मौके-मौके पर किसी मौलाना व इमाम के पास जाकर उनकी तरफ से दी गई खास किस्म की टोपी पहनकर सियासी समीकरण साधने की कोशिश करते थे।

पर, फोटो खिंचने के बाद यह टोपियां उनकी या उनके आसपास खड़े लोगों की जेब में चली जाती थीं।

इस बार भी मोदी ने इसे पहनने से इन्कार करके तो भाजपा के ही राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इसे स्वीकार करके चर्चा में ला दिया है।

कुछ लोग इसे आम आदमी पार्टी ‘आप’ की टोपियों का खौफ कह रहे हैं तो कुछ इसे गांधी युग की वापसी बता रहे हैं।

इस टोपी का अपना रंग

caps of political parties

राजनीति में गांधी व नेहरू टोपियां भले ही बीच में अपना रसूख खो बैठी हों।

पर, देश की सियासत में खास किस्म की गोल टोपी का काफी महत्व रहा है। इसे वोट दिलाऊ टोपी माना जाता रहा है।

इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि जब मोदी ने जब इस टोपी को पहनने से इन्कार किया तो यह देशव्यापी खबर बन गई।

पिछले दिनों एक न्यूज चैनल से बातचीत में भी जब मोदी ने इस तरह की टोपी पहनने से परहेज की बात कही तो भी इसकी काफी चर्चा हुई।

विज्ञापन
विज्ञापन

टोपी के साथ राजनाथ रंग

caps of political parties

मोदी के न्यूज चैनल पर टोपी की सियासत से इन्कार के बाद दूसरे किसी ने नहीं बल्कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इस टोपी को पहनकर इसका महत्व बता दिया।


कुछ लोग इसे राजनाथ की राजनीतिक दांव बता रहे हैं तो कुछ कुछ इसे मोदी की छाया से अलग दिखने की कोशिश।

जो भी हो मौलाना कल्बे जव्वाद ने यह कहकर, ‘मोदी से मुसलमानों को डर लगता है। राजनाथ की छवि अटल जैसी है।

भाजपा राजनाथ को आगे करके चुनाव लड़ती तो ज्यादा लाभ होता।’ इस टोपी के रंग व राजनाथ के ढंग की सारी अनकही कहानी को कह दिया।

साथ यह भी साफ कर दिया कि यह टोपी भविष्य में भाजपा के अंदरूनी राजनीति में भी अलग रंग दिखा सकती है।

भविष्य में क्या होगा, यह तो आगे पता चलेगा। पर, भाजपा की अंदरूनी सियासत में इस टोपी का रंग-ढंग चर्चा बन गया है।

विज्ञापन

तेरी टोपी मेरी टोपी

caps of political parties

अलग-अलग रंग की इन टोपियों की अपनी जंग भी कम दिलचस्प नहीं रही है। पिछले दिनों सपा के प्रदेश अध्यक्ष मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने टोपियों के बहाने ‘आप’ पर निशाना साधा।

कहा, उनके नेता दूसरों पर नकल करने का आरोप लगाते हैं। उनकी टोपी लेकर उसका रंग बदल दिया।

भाजपा के नेता यह कहते हुए ‘आप’ पर निशाना साध चुके हैं कि टोपी पहन लेने भर से कोई ईमानदार नहीं हो जाता।

यह बात दीगर है कि अब भाजपा कार्यकर्ताओं के सिर पर भी भगवा रंग की टोपियां दिखने लगी।

पर, टोपियां उतारने से बाज नहीं आ रहे नेता

caps of political parties

टोपियां तो आ गई लेकिन नेता एक-दूसरे की टोपियां उतारने से बाज नहीं आ रहे।

कहीं सपा, कांग्रेस और बसपा मोदी को जालिम और गोधरा का हत्यारा बताकर मोदी की टोपी उतारने की कोशिश कर रहे हैं तो मोदी गुजरात बनाने के लिए 56 इंच का सीना चाहिए, जैसे जुमले से मुलायम की टोपी को चुनौती दे रहे हैं।

राहुल गोधरा मॉडल को टाफी बताकर मोदी को टोपी पहनाने की कोशिश करते हैं तो मोदी बच्चों को टाफी ही अच्छी लगती है, कहकर कांग्रेस की टोपी खींचने की कोशिश करते हैं।

देखना यह है कि चुनाव बाद किसकी टोपी का रंग जमता है और किसी टोपी का रंग उतरता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed