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10 को भंग हो जाएगी छावनी परिषद, लखनऊ सहित देश की 56 छावनियों को आदेश जारी

Wed, 03 Feb 2021 01:59 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 03 Feb 2021 01:59 AM IST
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cantonment board will be break
छावनी परिषद के निर्वाचित बोर्ड को दस फरवरी को भंग किया जा रहा है। 11 फरवरी से छावनी की कमान प्रशासक के हाथ में पहुंच जाएगी। इस बाबत महानिदेशालय रक्षा संपदा के डिप्टी डायरेक्टर राजेश कुमार शाह की ओर से लखनऊ सहित देश की 56 छावनियों को आदेश जारी कर दिया गया है।
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छावनी परिषद के भंग होने से पहले अंतिम बोर्ड बैठक बुधवार को बुलाई गई है। जहां निर्माण कार्यों सहित अन्य मुद्दों पर विचार विमर्श किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने अपने आदेश में 11 फ रवरी से वैरी बोर्ड लगाने को कहा है। ऐसे में वर्तमान में छावनी का जो निर्वाचित बोर्ड है, वह 10 फ रवरी को भंग हो जाएगा। इसके बाद प्रशासन अब छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी के हाथ में होगा। परिषद अध्यक्ष मेजर जनरल राजीव शर्मा सीईओ के साथ सैन्य प्रशासन का प्रतिनिधित्व करेंगे। वहीं असैन्य इलाकों में रहने वालों के प्रतिनिधित्व के लिए एक उपाध्यक्ष रक्षा मंत्रालय द्वारा नामित किया जाएगा। इसके लिए लखनऊ छावनी परिषद से मंत्रालय को तीन नाम भेजे जाएंगे। छावनी से जुड़े वरिष्ठ सदस्यों ने बताया कि वर्ष 2002 से 2008 तक रक्षा मंत्रालय ने वैरी बोर्ड लगाया था।
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इसके बाद छावनी परिषद अधिनियम 2006 बनने के बाद सन 2008 में लखनऊ के आठ वार्डों के चुनाव हुए थे, जिनका कार्यकाल पांच साल का था और वह मई, 2013 में पूरा हुआ। इसके बाद छह-छह महीने के दो विस्तार दिए गए और फिर वैरी बोर्ड लगा दिया गया था। वहीं फ रवरी, 2015 में एक बार फिर से चुनाव हुए, जिनका कार्यकाल गत वर्ष फ रवरी में पूरा हो गया था। इस बार भी छह-छह महीने केदो विस्तार दिए थे। इसमें उपाध्यक्ष रूपा देवी, सदस्य प्रमोद शर्मा, जगदीश प्रसाद, स्वाति यादव, अमित शुक्ल, अंजुम आरा, संजय वैश्य और रीना सिंघानिया शामिल हैं, जिनका बोर्ड अब 10 को खत्म हो जाएगा।
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अगले चुनाव नए नियम से कराए जाएंगे
अब छावनी परिषद का चुनाव छावनी परिषद अधिनियम 2006 में संशोधन करने के बाद ही करवाया जाएगा। रक्षा मंत्रालय छावनी परिषद अधिनियम 2020 बना रहा है। इस नए अधिनियम में उपाध्यक्ष के चुनाव को लेकर बड़ा फेरबदल किया गया है। अभी तक निर्वाचित सदस्य ही बहुमत में अपने उपाध्यक्ष का चुनाव करते आए हैं। जबकि नए अधिनियम के बन जाने पर उपाध्यक्ष का चुनाव महापौर की तरह जनता द्वारा होगा।
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