चार विभागों ने यूपी सरकार को 706 करोड़ की लगाई चपत, कैग रिपोर्ट में खुलासा
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प्रदेश में वाणिज्यकर समेत चार विभागों के अफसरों ने वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान जमकर अनियमितता बरती। इसके चलते प्रदेश सरकार को 706 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान हुआ। यह खुलासा हुआ है भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में।
कैग की यह रिपोर्ट सोमवार को विधानसभा में रखी गई। वाणिज्यकर के अलावा भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग, आबकारी विभाग व स्टांप एवं पंजीयन में सरकारी खजाना लुटाने का मामला सामने आया है।
वाणिज्यकर विभाग: अफसरों के ‘खेल’ में 253 करोड़ का नुकसान
वाणिज्यकर विभाग को सर्वाधिक 253 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ। इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की आड़ में अफसर सरकारी खजाना लुटाते रहे। इसके अलावा कर निर्धारण, सत्यापन और छूट देने में भी जमकर खेल किया गया।
वहीं, देर से टीडीएस जमा करने वाले और टर्नओवर छिपाने वाले कारोबारियों भी विभागीय अफसर खूब मेहरबान रहे। लेखा परीक्षकों ने 2,087 कर निर्धारण मामलों में अनियमितता पाई। व्यापारियों पर अर्थदंड लगाने में अनियमितता से ही खजाने को 112.73 करोड़ की चपत लगी।
भूतत्व एवं खनिकर्म 226.65 करोड़ रुपये का नुकसान
भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग में अनियमितता, खनन पट्टा धारकों से रॉयल्टी, ब्याज एवं जुर्माना और खनिज मूल्य की वसूली न करने के चलते 226.65 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। रिपोर्ट के अनुसार रवन्ना पर्ची के बिना बालू, मौरंग और गिट्टी का परिवहन किया गया। पट्टा धारकों से वसूली की सिफारिश को गंभीरता से नहीं लिया गया।
नियमों को किया नजरअंदाज, लगाई 36 करोड़ की चपत
स्टांप एवं पंजीयन विभाग के अफसरों ने संपत्तियों का गलत मूल्यांकन किया। रजिस्ट्री के अभिलेखों के वर्गीकरण में नियमों को ताक पर रख दिया गया। इससे विभाग को 35.77 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। रजिस्ट्री केदस्तावेजों के गलत वर्गीकरण की वजह से ही 27.03 करोड़ का नुकसान हुआ। कैग रिपोर्ट में विभिन्न जिलों में 5.09 लाख वर्ग मीटर के आवासीय भूमि को कृषि भूमि दिखाकर रजिस्ट्री कराने का खुलासा किया है।
आबकारी विभाग : गटक गए 191 करोड़ का राजस्व
अफसरों की लापरवाही के चलते आबाकारी विभाग को 191 करोड़ रुपये का चूना लगा है। लेखा परीक्षक ने 13,144 मामलों में से 4006 मामलों की जांच की। इसमें 2332 मामलों में अनियमितता मिली। इसमें लाइसें फीस से लेकर ब्याज की वसूली में गड़बड़ी की गई।