डॉक्टरों की तैनाती में विषमता, दवाइयों व उपकरणों की कमी, कैग की रिपोर्ट में हुआ खुलासा
प्रदेश में डॉक्टरों की तैनाती में मानकों का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। लखनऊ और आगरा में डॉक्टरों के साथ ही पैरा मेडिकल स्टाफ अधिक तैनात किया गया है। अस्पतालों में दवाइयों और उपकरणों की भी कमी है। इसका खुलासा अलग-अलग शहरों के 10 अस्पतालों की जांच में किया गया है।
भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) ने यूपी के जिला अस्पताल बदायूं, बांदा, गोरखपुर, सहारनपुर, इलाहाबाद, बलरामपुर, लखनऊ, आगरा और इलाहाबाद व संयुक्त अस्पतालों के मुआयने के बाद अपनी रिपोर्ट दी है।
वर्ष 2017-18 की यह रिपोर्ट मंगलवार को विधानसभा पटल पर रखी गई। इसके अनुसार, अंत: रोगी विभाग की सेवाओं की लेखा परीक्षा में मानव संसाधन के वितरण में काफी विषमता मिली।
लखनऊ और आगरा जैसे बड़े शहरों में चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ की अधिक तैनाती को प्राथमिकता से वापस लेने पर जोर दिया गया। साथ ही एक प्रणाली स्थापित करने का सुझाव दिया गया है, जिसमें आपात स्थिति को छोड़कर किसी भी स्तर के प्राधिकारी को इस तरह से तैनाती या प्रतिनियुक्ति देने का मनमाना अधिकार न हो।
अस्पतालों में दवाओं व उपकरणों की भारी कमी
रिपोर्ट में कहा गया कि अस्पतालों में दवाओं और उपकरणों की भारी कमी और ऑपरेशन थियेटर तक की सेवाओं में कमियां मिली हैं। ट्रॉमा सेंटर में सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। रोगियों को दिए जाने वाला भोजन भी अस्पतालों में अलग-अलग मिला। अग्निशमन इंतजाम भी काफी अपर्याप्त हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अभिलेखों के खराब रख-रखाव ने अंत: रोगी विभाग की जांच में बाधा उत्पन्न की। बांदा, बदायूं, गोरखपुर और सहारनपुर के जिला चिकित्सालय सुविधाओं की दृष्टि से काफी पीछेहैं।
रिपोर्ट में दवाओं की खरीद के लिए बनाई गई प्रणाली भी दोषपूर्ण मिली। दवाओं की आपूर्ति भी समय से नहीं की जा रही है। चिकित्सालयों में सफाई और लॉन्ड्री व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है।
उपकरणों और मानव संसाधन की कमी के चलते डायग्नोस्टिक सेवाएं अपेक्षित स्तर की नहीं मिलीं। यह भी कहा गया कि नमूना जांच के लिए चयनित जिला चिकित्सालयों में ओपीडी रोगियों की संख्या में वृद्धि के सापेक्ष डॉक्टरों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है।