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कैग ने उठाए सवाल: यूपी में यथार्थ आधार पर नहीं तैयार होता बजट, 2018-19 के बजट का अध्ययन कर दी सलाह

Thu, 19 Aug 2021 10:37 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 19 Aug 2021 10:37 AM IST
सार

कैग ने 2018-19 के बजट का अध्ययन कर बताया है कि राजस्व मद के विभिन्न लेखा शीर्षों के अंतर्गत वित्त विभाग द्वारा अनुमोदित बजट अनुमानों व वास्तविक राजस्व खर्च में बड़ी भिन्नता रहती है। इससे स्पष्ट है कि बजट अनुमानों को यथार्थ आधार पर तैयार नहीं किया गया है।

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CAG raises question on preparing budget in Uttar Pradesh.
फाइल फोटो - फोटो : amar ujala

विस्तार

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने वित्त विभाग के बजट अनुमानों पर गंभीर सवाल खड़ा किया है और राज्य में शिथिल राजस्व प्रशासन की बानगी पेश की है। कैग ने बजट तैयार करने की कार्यवाही पर सवाल उठाते हुए सरकार को इसे अधिक यथार्थवादी बनाने की सलाह दी है।

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कैग ने 2018-19 के बजट का अध्ययन कर बताया है कि राजस्व मद के विभिन्न लेखा शीर्षों के अंतर्गत वित्त विभाग द्वारा अनुमोदित बजट अनुमानों व वास्तविक राजस्व खर्च में बड़ी भिन्नता रहती है। इससे स्पष्ट है कि बजट अनुमानों को यथार्थ आधार पर तैयार नहीं किया गया है। कैग ने बजट अनुमानों को और अधिक यथार्थवादी बनाने के लिए बजट तैयार करने की विधियां का पुनरीक्षण करने की सलाह दी है।
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इसी तरह कैग ने लेखा परीक्षा रिपोर्ट पर समय से कार्रवाई न किए जाने का खुलासा किया है। कैग ने वर्ष 2017-18 के दौरान छह विभागों के 245 लेखापरीक्षित इकाइयों में टर्न ओवर, कर भुगतान से संबंधित अभिलेखों की नमूना जांच की। उसमें 52,956 मामलों में 4151.75 करोड़ के राजस्व हानि, कम कर लगाने जैसे मामले पकड़े गए। इनमें से बड़ी संख्या में मामले अभी भी कार्रवाई के लिए लंबित पड़े हैं। लेखा परीक्षा में सहयोग की कमी की भी बात कही गई है।

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राज्य में शिथिल राजस्व प्रशासन

कैग की पड़ताल में पता चला कि 31 मार्च 2019 को बिक्री, व्यापार आदि पर कर, स्टांप एवं निबंधन फीस, वाहनों, माल व यात्री कर, राज्य आबकारी व मनोरंजन कर का राजस्व बकाया 30,285.43 करोड़ था। इसमें से 13,129.57 करोड़ रुपये पांच वर्ष से अधिक समय से लंबित था।

कैग ने इसे राज्य में शिथिल राजस्व प्रशासन व अनुपालनहीनता को सूचक करार दिया। जांच में बकाया निर्धारण में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पकड़ी गईं। कैग ने विभागों को लंबित बकाए के लिए केंद्रीकृत डाटाबेस बनाने की सिफारिश की है, जो बकाए की प्रगति की अपडेटेड जानकारी दे सके।

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