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सरकारी मकानों से नेताओं-एनजीओ के अवैध कब्जे हटेंगे, योगी कैबिनेट ने नौ प्रस्तावों को दी मंजूरी

Wed, 08 Aug 2018 10:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 08 Aug 2018 10:22 AM IST
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cabinet decisions by yogi adityanath cabinet 7 aug.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala

राज्य संपत्ति विभाग के नियंत्रण वाले सरकारी भवनों में रहने का मानक न पूरा करने व अनधिकृत तरीके से रहने वाले लोगों, संस्थाओं व राजनीतिक दलों को अब तय प्रक्रिया के तहत बेदखल किया जा सकेगा। अब तक विभाग के भवनों में अनधिकृत तरीके से रहने वालों को निकालने के लिए कोई नियमावली नहीं थी। योगी कैबिनेट ने मंगलवार को इससे जुड़ी नियमावली को मंजूरी दे दी है।

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ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि राज्य संपत्ति विभाग के नियंत्रण वाले भवनों में सरकारी, गैर सरकारी संगठनों, राजनीतिक दलों, सामाजिक संस्थाओं, न्यासों, व्यावसायिक संघों, कर्मचारी संघों तथा राजनीतिक दलों की इकाइयों या अग्रणी संगठनों के गैर कानूनी निवासियों या गैर सरकारी व्यक्तियों (पत्रकार भी शामिल) की बेदखली करने और उससे संबंधित व्यवस्था के लिए यूपी सार्वजनिक भू-गृहादि (कतिपय अप्राधिकृत अध्यासियों की बेदखली) नियमावली-2018 को मंजूरी दी गई है। इसमें बेदखली की विस्तार से प्रक्रिया तय की गई है। अब इसके अनुसार बेदखली की कार्यवाही होगी।
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राजनीतिक दल भी निशाने पर
राज्य संपत्ति विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि तमाम संगठन अनधिकृत तरीके से राज्य संपत्ति के भवनों में कार्यालय चला रहे हैं। कई राजनीतिक व सामाजिक संगठन जिस मानक के भवन में हैं, पर उसका मानक पूरा नहीं करते हैं, इसके बावजूद कब्जा जमाए हैं। कई क्षेत्रीय व पंजीकृत दल, राष्ट्रीय राजनीतिक दलों की तरह बड़े-बड़े भवनों में काबिज हैं। मुख्य संगठन के अलावा फ्रंटल संगठनों के लिए बड़े-बड़े भवन में कब्जा जमाए हुए हैं। कोई नियमावली न होने से इनसे खाली कराने में तमाम कानूनी दांवपेंच की आशंका रहती है। नियमावली बनने से सरकार तय व्यवस्था से अब ऐसे लोगों को आसानी से बेदखल कर सकेगी। आगे देखें अन्य फैसले...

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विधायकों को निजी की तरह इंडियन एयरलाइंस में भी हवाई यात्रा की सुविधा

cabinet decisions by yogi adityanath cabinet 7 aug.

प्रदेश के विधायक और विधान परिषद सदस्य अब निजी एयरलाइंस की तरह बिना मूवमेंट कंट्रोल आर्डर (एमसीओ) के ही इंडियन एयरलाइंस से यात्रा कर वायुयान टिकट के बराबर भुगतान प्राप्त कर सकेंगे। उन्हें इंडियन एयरलाइंस से रेल कूपन के बराबर मूल्य का एमसीओ नहीं लेना होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को माननीयों की हवाई यात्रा से जुड़ी इस विसंगति को दूर करने के लिए संशोधित नियमावली को मंजूरी दे दी है। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि नियमावली में व्यवस्था है कि किसी सदस्य द्वारा वायुयान यात्रा का विकल्प देने पर इंडियन एयरलाइंस रेल कूपनों के सापेक्ष सममूल्य के एमसीओ जारी करेगी। इसी में यह भी व्यवस्था है कि यदि किसी सदस्य ने एमसीओ का बिना उपयोग किए इंडियन एयरलाइंस से भिन्न किसी एयरलाइंस से यात्रा की है तो संबंधित को हवाई यात्रा का टिकट दिखाने पर टिकट के मूल्य के बराबर राशि की प्रतिपूर्ति कर दी जाएगी।

शर्मा ने बताया कि विधायकों ने प्रतिनिहित विधायन समिति की पिछली बैठकों में बताया कि एमसीओ का प्रयोग किए बिना इंडियन एयरलाइंस द्वारा की गई यात्रा की प्रतिपूर्ति नहीं हो रही है। समिति ने इस समस्या के समाधान के लिए तत्कालीन प्रमुख सचिव न्याय की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। समिति ने 17 अगस्त 2016 की अपनी बैठक में विधान मंडल के सदस्यों को इंडियन एयरलाइंस से की गई यात्रा की प्रतिपूर्ति भी अन्य निजी एयरलाइंस की तरह किए जाने की संस्तुति की थी और इसके लिए संबंधित नियमावली में संशोधन को कहा था, जिसे सरकार ने मंजूरी दे दी है।

विधायकों को वर्ष में रेल कूपन के मिलते हैं 4.25 लाख
विधायकों को हर वर्ष 4.25 लाख रुपये का रेल कूपन मिलता है। इसी में पेट्रोल भत्ता व वायुयान सुविधा भी शामिल है।

सरकारी योजनाओं के प्रचार को नियुक्त होंगे 824 लोक कल्याण मित्र

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योगी सरकार ने लोकसभा चुनाव से पहले सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने और पब्लिक फीडबैक की जानकारी की रणनीति बना ली है। कैबिनेट ने मंगलवार को प्रदेश में 824 लोक कल्याण मित्रों की नियुक्ति के लिए लोक कल्याण मित्र इंटरर्नशिप प्रोग्राम को मंजूरी दे दी है। इनका चयन जिला स्तर पर होगा। इसमें 30 फीसदी महिलाएं होंगी।

अपर मुख्य सचिव सूचना अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया कि प्रदेश के सभी 822 विकास खंडों में एक-एक और राज्य स्तर पर दो लोक कल्याण मित्र तैनात किए जाएंगे। इनका चयन एक वर्ष के लिए होगा। कार्यक्रम की उपयोगिता के मद्देनजर मुख्यमंत्री के अनुमोदन से कार्यक्रम को एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकेगा। चयनित युवाओं को 25 हजार रुपये मानदेय और 5000 रुपये ग्रामीण क्षेत्रों में आने-जाने के लिए यात्रा भत्ता के रूप में मिलेंगे। इस तरह उन्हें प्रतिमाह 30 हजार रुपये का भुगतान हो सकेगा। इस प्रोग्राम के क्रियान्वयन के लिए अब नियमावली तैयार कर मंजूरी ली जाएगी। अक्तूबर तक इसे लागू कर दिया जाएगा। अवस्थी ने बताया कि प्रदेश सरकार की योजनाओं व कार्यक्रमों के व्यापक प्रचार-प्रसार व फीडबैक मेकेनिज्म को पुख्ता बनाने के लिए लोक कल्याण मित्र इंटर्नशिप प्रोग्राम को लागू किया गया है। इसमें ऐसे उत्साही व अनुभवी युवाओं को शामिल करना है जो वास्तव में सामाजिक परिवर्तन लाने के इच्छुक हैं।

डीएम की अध्यक्षता वाली समिति करेगी चयन
जिला स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में गठित समिति लोक कल्याण मित्रों का चयन करेगी। इसमें सीडीओ और सूचना विभाग के प्रतिनिधियों के अलावा अन्य जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी शामिल किए जा सकेंगे। राज्य स्तरीय दो कल्याण मित्रों का चयन मंडलायुक्त लखनऊ की अध्यक्षता में मंडल स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों वाली समिति करेगी। इनके चयन में आरक्षण के नियमों का पालन होगा।

केजीएमयू में प्रति कुलपति का पद बहाल

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सरकार ने केजीएमयू में प्रति कुलपति का पद बहाल कर दिया है। इस पद को 2004 में केजीएमयू एक्ट में बदलाव कर खत्म कर दिया गया था। कैबिनेट बैठक में प्रति कुलपति के पद को बहाल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। शासन के प्रवक्ता ने बताया कि केजीएमयू एक्ट-2002 की धारा-14 में प्रति कुलपति के पद का प्रावधान था। विधायी विभाग की अधिसूचना के बाद 27 फरवरी 2004 को प्रति कुलपति की व्यवस्था को खत्म कर दिया गया था। अब केजीएमयू में नए संकायों/विभागों की स्थापना, मेडिकल-नर्सिंग कॉलेजों की संबद्धता, नए चिकित्सालयों की स्थापना और कार्मिकों की संख्या में वृद्धि से कुलपति पर काम का बोझ बढ़ गया है। ऐसे में प्रति कुलपति के पद को बहाल किया जाना जरूरी था।

कैबिनेट ने प्रति कुलपति की नियुक्ति व दायित्वों से संबंधित नई धारा-18 को भी अधिनियम में जोड़ने को मंजूरी दी है। केजीएमयू एक्ट-2002 की धारा-24 में कंपनी अधिनियम-1956 के स्थान पर कंपनी अधिनियम 2013 लागू है, इसलिए धारा 24 में भी संशोधन किया जाएगा। केजीएमयू में पहले दो संकाय मेडिकल और डेंटल ही थे। अब नर्सिंग और पैरामेडिकल भी संकाय बन गए हैं।

नए नर्सिंग और पैरामेडिकल कालेजों को भी केजीएमयू के नए संकायों के रूप में स्वीकृति दे दी गई है। एसजीपीजीआई और एम्स की तरह ही केजीएमयू में भी एडिशनल प्रोफेसर के पद के सृजन की अनुमति कैबिनेट ने दे दी। अभी केजीएमयू में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के ही पद हैं।

विश्वविद्यालयों में विकास कार्यों के लिए 10.35 करोड़ मंजूर

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प्रदेश के राजकीय विश्वविद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं और विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार ने 10.35 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। कैबिनेट बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि 2017-18 में राज्य विश्वविद्यालयों मेंआधारभूत विकास कार्र्यों के लिए 9 करोड़ रुपये की एकमुश्त व्यवस्था की गई थी। विश्वविद्यालयों में 12 कार्यों के लिए 6.35 करोड़, 3 राजकीय विश्वविद्यालयों में निर्माण के लिए 3 करोड़ और एक राजकीय विवि में विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय भवन के लिए 1 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

यमुना एक्सप्रेस-वे एवं ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे पर बनेगा इंटरचेंज
यमुना एक्सप्रेस-वे और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेस-वे के क्रॉसिंग पर जगनपुर-अफजलपुर गांव पर इंटरचेंज का निर्माण होगा। कैबिनेट ने यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। सरकारी प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि इंटरचेंज पर भूमि का मालिकाना हक यीडा के पास रहेगा। सड़क का निर्माण एनएचएआई के ड्राइंग डिजाइन और मापदंड के आधार पर किया जाएगा। इस पर होने वाला खर्च एनएचएआई वहन करेगा। एनएचएआई यह राशि प्राधिकरण को देगा। सड़क का निर्माण होने के बाद सड़क का रखरखाव और टोल प्लाजा संचालन एनएचएआई की ओर से किया जाएगा।

विधानमंडल में सीएजी रिपोर्ट रखने को मंजूरी
राज्य विधानमंडल के आगामी मानसून सत्र में वर्ष 2016-17 के दौरान सरकार के वित्तीय खर्चों पर सीएजी की रिपोर्ट विधानमंडल के समक्ष पेश की जाएगी। कैबिनेट ने इससे जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस रिपोर्ट में सरकार द्वारा बजट बनाने की प्रक्रिया, बजट की आवश्यकता, स्वीकृतियाें और खर्चों के साथ सरकार के बजट प्रबंधन का विस्तृत विश्लेषण किया जाता है।

मानसून सत्र में फीस नियंत्रण के लिए विधेयक लाएगी सरकार

cabinet decisions by yogi adityanath cabinet 7 aug.

निजी विद्यालयों में मनमाने शुल्क वसूली को नियंत्रित करने के लिए सरकार विधानमंडल के मानसून सत्र में उप्र. स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) विधेयक 2018 पेश करेगी। प्रदेश कैबिनेट ने अध्यादेश की जगह विधेयक लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।

सरकारी प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि सरकार ने निजी स्कूलों में फीस वसूली को नियंत्रित करने के लिए 9 अप्रैल 2018 को स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क निर्धारण) अध्यादेश लागू किया था। अब सरकार ने अभिभावकों और विद्यार्थियों की सुविधा के लिए मानसून सत्र में विधेयक लाने का निर्णय किया है।

उन्होंने बताया कि मंडल स्तर पर बनाई गई समिति के स्थान पर शुल्क को विनियमित करने के लिए हर जिले में डीएम की अध्यक्षता में जिला शुल्क नियामक समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति को सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के अधीन दीवानी न्यायालय और अपीलीय न्यायालय की शक्तियां प्राप्त होंगी। समिति के सदस्यों का कार्यकाल दो वर्ष रहेगा। इस निर्णय से शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के साथ ही विद्यार्थियों और अभिभावकों को सीधा लाभ मिलेगा।

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