यूपी की 11 सीटों पर कौन मारेगा बाजी?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सूबे में विधानसभा की 11 सीटों पर उपचुनाव में आमतौर पर भाजपा और सपा के बीच सीधे मुकाबले की स्थिति बनी हुई है। हालांकि कुछ जगह तिकोनी टक्कर के भी आसार नजर आ रहे हैं।
बसपा ने इन चुनावों में प्रत्याशी नहीं उतारे हैं, इसलिए दोनों दलों की नजरें उसके वोट बैंक पर टिकी हैं। उपचुनावों में कुल 118 प्रत्याशी मैदान में है। सर्वाधिक 16 उम्मीदवार वाराणसी जिले की रोहनिया सीट पर और सबसे कम पांच प्रत्याशी बहराइच जिले की बलहा सीट पर हैं।
विधानसभा की जिन 11 सीटों पर 13 सितंबर को उपचुनाव हो रहे हैं, उनमें वर्ष 2012 में दस पर भाजपा और एक पर अपना दल को जीत हासिल हुई थी। इन सीटों से जीते विधायक अब सांसद बन गए हैं।
उनके इस्तीफे से खाली हुई सीटों पर ही उपचुनाव हो रहा है। ऐसे में इन्हें बरकरार रखना भाजपा के लिए चुनौती है। वहीं, सपा की कोशिश भाजपा से कुछ सीटें छीनकर लोकसभा चुनाव में खोई साख पाने की है। सपा ने इसके लिए पूरी ताकत झोंक रखी है। सभी सीटों पर उसे भाजपा से सीधी टक्कर मिल रही है।
दो-तीन जगह कांग्रेस उम्मीदवार मुकाबले को त्रिकोणात्मक बना रहे हैं। बसपा ने सभी सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों को समर्थन देने की घोषणा की थी, लेकिन उसने अभी तक इस बारे में पत्ते नहीं खोले हैं। ऐसे में बसपा के वोट बैंक को लेकर मारामारी है।
क्या काम करेगा भाजपा का ध्रुवीकरण प्लान?
सहारनपुर: मुस्लिम वोटों पर नजरें
पिछले दिनों सांप्रदायिक हिंसा से झुलसे सहारनपुर नगर में भाजपा के राजीव गुंबर, सपा के संजय गर्ग और कांग्रेस के मुकेश कुमार समेत कुल 10 प्रत्याशी मैदान में हैं। भाजपा को यहां हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण का भरोसा है तो सपा और कांग्रेस की नजर एकमुश्त मुस्लिम वोटों के साथ हिंदुओं वोटों के एक हिस्से पर टिकी है। तीनों ही दलों ने चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है। यहां बसपा नेता अभी तक खामोशी ओढ़े हुए हैं। उन्होंने किसी निर्दलीय उम्मीदवार के खुले समर्थन का ऐलान नहीं किया है।
बिजनौर: जंग सपा बनाम भाजपा
पश्चिमी यूपी की बिजनौर विधानसभा सीट पर जंग सपा बनाम भाजपा दिख रही है। भाजपा ने यहां पूर्व जिलाध्यक्ष हेमेंद्र पाल सिंह और सपा ने जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष रुचिवीरा को प्रत्याशी बनाया है। कांग्रेस के हुमायूं बेग और पीस पार्टी से जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष जमील अहमद समेत कुल दस प्रत्याशी मैदान में हैं। बसपा का रुख अभी तक यहां भी साफ नहीं है। उसके वोट बैंक पर सभी प्रत्याशियों की नजर है।
कांठ मुद्दे का कितना रहेगा असर?
ठाकुरद्वारा: कांठ के माहौल को भुनाने की कोशिश
मुरादाबाद जिले की इस सीट पर कुल 11 उम्मीदवार मैदान में हैं लेकिन नजरें सपा के नवाब जान, भाजपा के राजपाल चौहान और कांग्रेस के मोहम्मद उल्ला खान पर टिकी हैं। सपा और भाजपा ने यहां पूरी ताकत झोंक रखी है। भाजपा नजदीकी कांठ कस्बे और आसपास के गांवों में बने सांप्रदायिक माहौल को वोट में बदलने की कोशिश में है। सपा भी इसकी काट के लिए पूरा जोर लगा रही है।
नोएडा: दो महिलाओं में टक्कर
नोएडा विधानसभा सीट पर सपा ने डिबाई (बुलंदशहर) के विधायक श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित की पत्नी काजल शर्मा को प्रत्याशी बनाया है तो भाजपा से विमला बॉथम मैदान में हैं। कांग्रेस प्रत्याशी केरूप में राजेंद्र अवाना चुनावी जंग लड़ रहे हैं। यूं तो इस सीट पर 11 प्रत्याशी हैं लेकिन टक्कर भाजपा-सपा की महिला उम्मीदवारों के बीच मानी जा रही है।
यहां लालजी टंडन की प्रतिष्ठा दांव पर
यहां भाजपा ने पूर्व सांसद लालजी टंडन के बेटे आशुतोष टंडन (गोपालजी) को प्रत्याशी बनाया है। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने लालजी टंडन का टिकट काटकर लखनऊ से राजनाथ सिंह को प्रत्याशी बनाया था। शायद इसी कारण उनके बेटे को टिकट दिया गया है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में आशुतोष लखनऊ (उत्तर) सीट से चुनाव लड़े थे लेकिन हार गए थे।
अब लखनऊ पूर्व सीट पर उनका मुकाबला सपा की जूही सिंह और कांग्रेस के रमेश श्रीवास्तव से है। ये दोनों ही पिछला विधानसभा चुनाव इसी सीट से लड़े थे। दोनों ने ही चुनाव में पूरी ताकत झोंक रखी है।
निर्दलीय प्रत्याशी पूर्व एमएलसी शिवपाल सिंह एसपी सिंह चुनावी संघर्ष को तिकोना बनाने की कोशिश में हैं। यहां लालजी टंडन की प्रतिष्ठा दांव पर है। आशुतोष की हार-जीत से उनका कद तय होगा।
इस सीट से विधायक चुने गए कलराज मिश्र देवरिया से सांसद निर्वाचित हो चुके हैं। यहां उन्हीं के इस्तीफे से रिक्त हुई सीट पर चुनाव हो रहा है।
यहां खेला जा रहा जाति का कार्ड
निघासन: पटेल और वर्मा में जोर-आजमाइश
लखीमपुर खीरी जिले की निघासन सीट पर केवल सात उम्मीदवार हैं। भाजपा ने यहां पूर्व मंत्री रामकुमार वर्मा और सपा ने पूर्व विधायक कृष्ण गोपाल पटेल को प्रत्याशी बनाया है।
पटेल पिछला चुनाव भी सपा के टिकट पर यहीं से लड़े थे। कांग्रेस से शिव भगवान मैदान में हैं। अजय मिश्र टेनी के सांसद चुने जाने से खाली हुई इस सीट पर भाजपा और सपा में मुख्य मुकाबले की संभावना जताई जा रही है।
हमीरपुर: त्रिकोणीय मुकाबले के आसार
साध्वी निरंजन ज्योति के सांसद चुने जाने से खाली हुई हमीरपुर सीट पर कुल 11 उम्मीदवारों में सपा के शिवचरन प्रजापति, भाजपा के जगदीश प्रसाद और कांग्रेस के केशव बाबू शिवहरे के बीच मुख्य मुकाबले की संभावना जताई जा रही है। प्रजापति तीन बार विधायक रह चुके हैं।
शिवहरे पिछला चुनाव भी कांग्रेस के टिकट पर लड़े थे। जगदीश प्रसाद पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर सपा ने मंत्रियों की फौज उतार रखी है। यहां भी बसपा ने अभी तक रुख साफ नहीं किया है।
अब बसपा छोड़ सपा के सिपाही
सिराथू: जंग पासी और पटेल के बीच
कौशाम्बी जिले के सिराथू में सपा के वाचस्पति पासी और भाजपा के संतोष सिंह पटेल के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है। वाचस्पति पुराने बसपाई हैं। वह 2007 में इसी सीट से बसपा विधायक चुने गए थे। कुछ दिन पहले ही वह सपा में शामिल हुए हैं। बसपा के बहुत सारे कार्यकर्ता उनके साथ लगे हैं।
हालांकि अधिकृत तौर पर बसपा ने किसी को समर्थन नहीं दिया है। संतोष सिंह पटेल भाजपा के जिलाध्यक्ष और पूर्व ब्लॉक प्रमुख हैं। कांग्रेस ने राष्ट्रीय समानता दल छोड़कर आए लालचंद्र कुशवाहा पर भरोसा जताया है। केशव मौर्य के सांसद बनने जाने से खाली हुई इस सीट पर कुल 15 प्रत्याशी मैदान में हैं।
बलहा: लड़ाई सपा और भाजपा में
बहराइच जिले की इस सीट पर सबसे कम पांच प्रत्याशी चुनावी जंग में हैं। सावित्री बाई फूले के सांसद चुने जाने से रिक्त हुई इस सीट पर मुख्य मुकाबला सपा के वंशीधर बौद्ध और भाजपा के अक्षयवर लाल के बीच माना जा रहा है।
बौद्ध नामांकन से कुछ पहले ही बसपा छोड़कर सपा में शामिल हुए हैं। अक्षयवर लाल चार बार विधायक और मंत्री रह चुके हैं। कांग्रेस ने पूर्व जिलाध्यक्ष श्यामता प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है।
यहां होगा अनुप्रिया पटेल का इम्तेहान
रोहनिया: पटेलों की लड़ाई में अनुप्रिया का इम्तिहान
अपना दल की अनुप्रिया पटेल के इस्तीफे से खाली हुई वाराणसी जिले की रोहनिया सीट पर पटेलों के बीच दिलचस्प जंग हो रही है। यहां अपना दल ने कृष्णा पटेल को प्रत्याशी बनाया है। सपा ने महेंद्र सिंह पटेल और कांग्रेस ने डॉ. भावना पटेल को उम्मीदवार बनाया है। कृष्णा पटेल अपना दल की अध्यक्ष और सांसद अनुप्रिया की मां हैं। उनके चुनाव मैदान में होने से क्षेत्र में बेटी अनुप्रिया की लोकप्रियता की परीक्षा होगी। सपा के महेंद्र पटेल, राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल के भाई हैं। भावना पटेल पुरानी बसपाई हैं और कुछ समय पहले ही कांग्रेस में शामिल हुई हैं। निर्दलीय रमाकांत भी चुनाव में एक कोण बनने की कोशिश कर रहे हैं।
चरखारी: उमा की सीट पर लोधों की जंग
चरखारी सीट पर भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर है क्योंकि यहां उमा भारती के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर चुनाव हो रहा है। यहां कुल छह प्रत्याशी मैदान में हैं। सपा ने यहां कप्तान सिंह राजपूत और भाजपा ने गीता सिंह को मैदान में उतारकर लोधी कार्ड खेला है। कांग्रेस ने रामजीवन को उम्मीदवार बनाया है। तीनों ही प्रत्याशी जीत के लिए जोर लगाए हुए हैं। बसपा ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।