सत्ता पर होगा कौन काबिज यह जानने के लिए अफसरों की भी टिकी निगाहें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी के सत्ता पर काबिज होने के लिए सियासी दलों के बीच चल रहे घमासान पर नौकरशाही की भी निगाहें टिकी हैं। शासन के शीर्ष नौकरशाहों से लेकर जिलों तक के अफसर हवा का रुख भांपने में लगे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि चुनाव की दुंदुभी बजते ही चुनाव की दिशा भांप लेने वाले बड़े-बड़े नौकरशाह भी इस बार वोटरों का रुख देखकर सकते में हैं। अफसर भी समझ नहीं पा रहे कि बाजी किस सियासी दल के हाथ लगेगी।
अलग-अलग सियासी दलों के ‘वफादार’ माने जाने वाले अफसर चुनाव में लगी मशीनरी के जरिये टोह लेने की कोशिश तो कर रहे हैं लेकिन अभी तक तस्वीर साफ होती नहीं दिख रही है।
यूं तो अफसरशाही के बारे में आमराय यही रहती है कि जिसकी सरकार बनती दिखाई देती है उसकी तरफ ही उनका झुकाव होने लगता है लेकिन बहुत से ऐसे अफसर भी हैं जिनकी पहचान उनकी सियासी निष्ठा से होती है।
ऐसे अफसरों में खासी बेचैनी है। अखिलेश सरकार में प्रभावी रहे अफसर जहां सपा के सत्ता में लौटने की संभावनाएं टटोलने में जुटे तो मायावती के भरोसेमंद अफसर बसपा की सीटों के आंकड़ों पर माथापच्ची कर रहे हैं।
अफ सरों का एक खेमा ऐसा भी है जो भाजपा की परफॉर्मेंस पर नजरे गड़ाए हुए है। हालांकि शासन के बहुत से अफसर दूसरे राज्यों में बतौर प्रेक्षक बनाकर भेजे गए हैं लेकिन जो यहां हैं भी वह सिर्फ चुनाव तक ही केंद्रित होकर रह गए हैं।
सभी की जुबान पर एक ही सवाल और यह जानने की उत्सुकता है कि सूबे में किसकी सरकार बनने जा रही है। हालांकि पहले चरण के चुनाव के रुझान के बाद सत्ता के गलियारे में त्रिशंकु विधानसभा की चर्चाएं ज्यादा ही तेज हैं। कौन किसके साथ मिलकर सरकार बना सकता है इसे लेकर भी अटकलें लगने लगी हैं।
सीएम ने बना ली थी भरोसेमंद अफसरों की टीम
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भरोसेमंद व वफादार अफसरों की टीम तैयार कर ली थी। उनके ड्रीम प्रोजेक्ट्स को अमली जामा पहनाने में पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन का काफी योगदान रहा।
यही वजह रही आलोक रंजन के रिटायर होने के बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें अपना मुख्य सलाहकार बना दिया। लखनऊ मेट्रो का काम रिकार्ड समय में पूरा कराने का काफी कुछ श्रेय आलोक रंजन को ही है।
प्रमुख सचिव वित्त के रूप में राहुल भटनागर भी अखिलेश की कसौटी खरे उतरे तो उन्हें मुख्य सचिव की कुर्सी इनाम में मिल गई। मुख्यमंत्री की सबसे अहम परियोजना आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को धरातल पर उतारकर नवनीत सहगल ने भी उनका भरोसा जीता।
सहगल के जिम्मे सूचना, पर्यटन और यूपीडा जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी है। बिजली के मोर्चे पर ब्यूरोक्रेट व टेक्नोक्रेट की जोड़ी संजय अग्रवाल व एपी मिश्रा अखिलेश की टीम का अहम हिस्सा रही।
इसके अलावा सीएम की टीम में रमारमण भी शामिल हैं जो नोएडा के सीईओ के साथ ही प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
साथ ही प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पंडा, पार्थसारथी सेन शर्मा, पंधारी यादव, प्रांजल यादव, जीएस नवीनकुमार, आमोद कुमार, शिव सिंह यादव जैसे अफसर भी मुख्यमंत्री की कोर टीम केसदस्य रहे हैं। अगर सपा फिर सत्ता में लौटती है तो मुख्यमंत्री के विकास के एजेंडे के और धार देने की जिम्मेदारी इन्हीं अफसरों के कंधे पर रहेगी।