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सामने आया एलडीए-बिल्डर की साठगांठ का सच
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 16 Nov 2014 05:08 PM IST
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आगा मीर ड्योढ़ी में सिटी स्टेशन के पास अवैध बिल्डिंग के खिलाफ सीलिंग की कार्रवाई के दौरान एलडीए-बिल्डर गठजोड़ का सच सामने आया।
जैसे ही दस्ते ने कोर्ट का आदेश दिखाते हुए शनिवार को सीलिंग शुरू की, बिल्डर व उसके भाई दस्ते से भिड़ गए।
बिल्डर ने कहा कि जब लाखों रुपये ले गए, तब इमारत अवैध नहीं थी और हाईकोर्ट के आदेश की प्रति फाड़ दी। पुलिस ने बिल्डर व उसके दोनों भाइयों की पिटाई कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
प्राधिकरण ने इमारत सील कर पुलिस अभिरक्षा में सौंप दी है। इस इमारत के अवैध होने की जानकारी आरटीआई के तहत दी गई थी।
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जैसे ही दस्ते ने कोर्ट का आदेश दिखाते हुए शनिवार को सीलिंग शुरू की, बिल्डर व उसके भाई दस्ते से भिड़ गए।
बिल्डर ने कहा कि जब लाखों रुपये ले गए, तब इमारत अवैध नहीं थी और हाईकोर्ट के आदेश की प्रति फाड़ दी। पुलिस ने बिल्डर व उसके दोनों भाइयों की पिटाई कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
प्राधिकरण ने इमारत सील कर पुलिस अभिरक्षा में सौंप दी है। इस इमारत के अवैध होने की जानकारी आरटीआई के तहत दी गई थी।
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धार्मिक स्थल ध्वस्त किया
बाद में कोर्ट ने निर्माण रुकवा कर कानूनी कार्रवाई करने का आदेश दिया था। आगामीर की ड्योढ़ी के प्राचीन भवन संख्या 206/44 को तोड़ कर यह अवैध निर्माण किया जा रहा है।
इसका क्षेत्रफल करीब 2000 वर्ग फीट है। जबकि, पड़ोस की जमीन पर अवैध कब्जा करके इसको 2800 वर्ग फीट तक बढ़ाया गया।
शिकायतकर्ता ओमप्रकाश का कहना है कि जितनी भूमि पर कब्जा किया गया, उसके एक हिस्से में एक धार्मिक स्थल भी ध्वस्त किया गया था।
पांचवीं मंजिल पर निर्माण शुरू करने की तैयारी थी। अक्तूबर में हाईकोर्ट ने प्राधिकरण के सचिव को आदेश दिया था कि, इस इमारत के खिलाफ कार्रवाई अगले दो माह में करें।
इसके बावजूद कोई एक्शन नहीं लिया गया। शिकायतकर्ता ने जब मुख्य अभियंता ओपी मिश्र से शिकायत की तब उन्होंने कड़ी कार्रवाई कर सूचित करने को कहा।
इसका क्षेत्रफल करीब 2000 वर्ग फीट है। जबकि, पड़ोस की जमीन पर अवैध कब्जा करके इसको 2800 वर्ग फीट तक बढ़ाया गया।
शिकायतकर्ता ओमप्रकाश का कहना है कि जितनी भूमि पर कब्जा किया गया, उसके एक हिस्से में एक धार्मिक स्थल भी ध्वस्त किया गया था।
पांचवीं मंजिल पर निर्माण शुरू करने की तैयारी थी। अक्तूबर में हाईकोर्ट ने प्राधिकरण के सचिव को आदेश दिया था कि, इस इमारत के खिलाफ कार्रवाई अगले दो माह में करें।
इसके बावजूद कोई एक्शन नहीं लिया गया। शिकायतकर्ता ने जब मुख्य अभियंता ओपी मिश्र से शिकायत की तब उन्होंने कड़ी कार्रवाई कर सूचित करने को कहा।